मकराना (नागौर)3 मिनट पहले

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की पार्टी शिव सेना (यूबीटी) के 9 में से 4 सांसद राजस्थान के मकराना में ठहरे हुए हैं. बताया जा रहा है कि ये सभी सांसद मकराना में आरके मार्बल्स फैक्ट्री में बने एक रिसॉर्ट में ठहरे हैं, हालांकि अभी तक कोई इसकी पुष्टि नहीं कर रहा है. यहां के कर्मचारी भी इससे इनकार कर रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक चारों सांसदों को कल शाम किशनगढ़ एयरपोर्ट पर उतरते देखा गया.
सूत्रों के मुताबिक, बुधवार सुबह 9:30 बजे शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों ने शिंदे गुट में विलय के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेजा. इन बागी सांसदों में नागेश पाटिल अष्टिकर और संजय दीना पाटिल, संजय हरिभाऊ जाधव और संजय देशमुख शामिल हैं।
राउत ने कहा, 'हमारे 6 सांसदों का अपहरण कर लिया गया है'
गुरुवार शाम को दिल्ली में शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक हुई. इस बैठक में 9 में से सिर्फ 3 लोकसभा सांसद- अनिल देसाई, अरविंद सावंत और राजाभाऊ वाजे ही शामिल हुए. इस दौरान यूबीटी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि हमारे सांसदों का अपहरण कर लिया गया है. बैठक में जो आएगा वह हमारे साथ है, जो नहीं आएगा वह गद्दार है।
विपक्षी पार्टियां बीजेपी पर उन्हें तोड़ने का आरोप लगाती हैं
लोकसभा में परिसीमन बिल गिरने को लेकर संजय राउत ने बीजेपी पर विपक्षी दलों को तोड़ने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा- परिसीमन बिल पास नहीं हुआ तो क्या देश पर आसमान टूट पड़ेगा? सभी दलों के बीच आम सहमति बनाकर इसे दोबारा लाया जा सकता था।
राउत ने कहा- बिल पास नहीं होने के बाद बीजेपी जिस तरह की राजनीतिक गतिविधियां कर रही है वो बेहद आपत्तिजनक और निंदनीय है. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी विपक्ष को कमजोर करने के लिए दलबदल को बढ़ावा दे रही है.
6 सांसदों के समूह को दलबदल विरोधी कानून से राहत मिल सकती है
- लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के 9 सांसद हैं. दल-बदल विरोधी कानून के तहत, पार्टी में विभाजन के बाद अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों का समर्थन आवश्यक है। इसका मतलब है कि अगर 9 में से 6 सांसद एक साथ अलग होने का फैसला करते हैं, तो वे वैध गुट होने का दावा कर सकते हैं। यही कारण है कि 6 सांसदों के बगावत करने की खबर को राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल एक अलग समूह बनाना पर्याप्त नहीं होगा। आगे चलकर इन सांसदों को किसी अन्य पार्टी में विलय की प्रक्रिया भी पूरी करनी पड़ सकती है। ताकि कानूनी तौर पर उनकी स्थिति मजबूत हो सके.









