September 23, 2026 7:12 am

ईरान का अमेरिका को बड़ा ऑफर: ‘7 दिन में खोल देंगे होर्मुज जलडमरूमध्य’, बस माननी होगी यह एक शर्त, क्या राजी होंगे ट्रंप

वैश्विक अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और कच्चे तेल के सबसे बड़े जीवन रेखा माने जाने वाले ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को लेकर पश्चिमी एशिया से एक बहुत बड़ी और राहत भरी कूटनीतिक खबर सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें उच्चस्तरीय सत्र में हिस्सा लेने अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर पहुंचे ईरान के उच्चस्तरीय राजनयिक प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी प्रशासन को एक स्पष्ट और ठोस शांति प्रस्ताव भेजा है। ईरान के एक बेहद वरिष्ठ और शीर्ष राजनयिक अधिकारी ने वैश्विक समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए बयान में खुलासा किया है कि यदि संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान के खिलाफ अपने सैन्य दबाव को तत्काल कम करता है और ईरानी वाणिज्यिक बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने का लिखित आश्वासन देता है, तो तेहरान प्रशासन महज 7 दिनों के भीतर पूरे होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों की निर्बाध आवाजाही के लिए पूरी तरह फिर से खोल देगा। तेहरान के इस अप्रत्याशित और सकारात्मक रुख ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के संकेत दिए हैं, साथ ही पूरी दुनिया की नजरें अब व्हाइट हाउस और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की औपचारिक प्रतिक्रिया पर टिक गई हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के बीच ईरान का दांव: रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू करने का मिला पूरा अधिकार

न्यूयॉर्क में मौजूद ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के नेतृत्व में आए राजनयिकों को सर्वोच्च नेता और तेहरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की ओर से वाशिंगटन के साथ ठप पड़ी कूटनीतिक वार्ता को दोबारा शुरू करने के लिए पूर्ण कार्यकारी अधिकार (Full Mandate) दिए गए हैं। ईरानी राजनयिकों ने स्पष्ट किया है कि वे दशकों पुरानी दुश्मनी को पीछे छोड़कर एक व्यावहारिक समझौते के लिए पूरी तरह मेज पर बैठने को तैयार हैं। ईरानी पक्ष का साफ कहना है कि उनका मकसद दुनिया को ऊर्जा संकट में डालना कभी नहीं था, बल्कि पश्चिमी नौसैनिक बेड़े द्वारा उनके देश की आर्थिक घेराबंदी और बंदरगाहों के अवरोध के जवाब में ही उन्हें यह कड़ा कदम उठाने के लिए बाध्य होना पड़ा था। यदि अमेरिका अपनी आक्रामक सैन्य उपस्थिति को कम करता है और ईरान के वैध तेल निर्यात व व्यापारिक जहाजों को बिना किसी प्रतिबंध के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में जाने की अनुमति देता है, तो ईरान भी सद्भावना के तहत फारस की खाड़ी के इस सबसे महत्वपूर्ण समुद्री द्वार को दुनिया के लिए खोल देगा।

वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की लाइफलाइन: क्यों इतना संवेदनशील है होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता

होर्मुज जलडमरूमध्य को भूगोल और भू-राजनीति की दृष्टि से दुनिया का सबसे संकरा लेकिन सबसे महत्वपूर्ण समुद्री गलियारा माना जाता है। यह जलमार्ग फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। सामान्य दिनों में दुनिया भर में समुद्री रास्ते से निर्यात होने वाले कुल कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत से 25 प्रतिशत हिस्सा और वैश्विक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का एक-तिहाई व्यापार इसी बेहद संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत, कतर और इराक जैसे बड़े तेल निर्यातक देशों की संपूर्ण अर्थव्यवस्था इसी जलमार्ग पर निर्भर है। इस समुद्री रास्ते के बंद हो जाने से दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह चरमरा गई है, जिसके चलते यूरोप, एशिया और विकासशील देशों में पेट्रोल, डीजल और गैस के दामों में आग लगी हुई है। ऐसे में ईरान की ओर से 7 दिनों के भीतर इसे खोलने का प्रस्ताव वैश्विक मुद्रास्फीति और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से एक जीवनरक्षक दवा के समान देखा जा रहा है।

 2 मार्च 2026 से ठप्प पड़ा है समुद्री मार्ग: जहाजों पर हमलों के बाद पैदा हुआ था युद्ध का महा-संकट

होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के ऐतिहासिक घटनाक्रम पर नजर डालें तो यह रणनीतिक जलमार्ग व्यावसायिक और वाणिज्यिक जहाजों के लिए मुख्य रूप से 2 मार्च 2026 से पूरी तरह बंद पड़ा है। ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल परीक्षणों और मध्य पूर्व में सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों के बाद तनाव अपने चरम पर पहुंच गया था, जिसके बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने इस रास्ते से किसी भी तेल टैंकर के गुजरने पर पूर्ण पाबंदी लगाने का ऐलान कर दिया था। हालांकि, बीच में जून और जुलाई के महीनों के दौरान कुछ तटस्थ अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों के प्रयासों से इसे बेहद सीमित समय के लिए खोलने की कोशिश की गई थी, लेकिन उस दौरान अज्ञात मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण कई विदेशी व्यापारिक जहाजों को भारी नुकसान पहुंचा और यह समुद्री गलियारा एक बार फिर पूरी तरह ठप्प हो गया। तब से लेकर अब तक दुनिया भर के बड़े शिपिंग कंसोर्टियम अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप का लंबा, जोखिम भरा और अत्यधिक खर्चीला चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

 क्या डोनाल्ड ट्रंप मानेंगे ईरान की शर्त: सैन्य दबाव घटाने और नाकेबंदी हटाने पर फंसा पेंच

ईरान की इस 7 दिवसीय समय सीमा वाली पेशकश के बाद अब सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनका रक्षा विभाग पेंटागन ईरान की इस शर्त को स्वीकार करेंगे। डोनाल्ड ट्रंप सार्वजनिक रूप से ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते रहे हैं और उनका स्पष्ट संकल्प रहा है कि ईरान पर अधिकतम दबाव (Maximum Pressure) की नीति जारी रखी जाए ताकि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट कर दे। हालांकि, दूसरी तरफ अमेरिका के भीतर आगामी चुनावों और घरेलू स्तर पर बढ़ती ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ट्रंप पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अमेरिकी उद्योगपतियों का भारी दबाव है। ट्रंप ने हाल ही में ईरानी नेतृत्व से सीधी बातचीत की इच्छा भी जताई थी, लेकिन अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाता है तो इसे घरेलू राजनीति में ट्रंप के पीछे हटने के रूप में देखा जा सकता है। आने वाले कुछ दिन वैश्विक कूटनीति के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं, क्योंकि यदि दोनों देश किसी न्यूनतम समझौते पर सहमत होते हैं तो दुनिया को एक बड़े वैश्विक युद्ध और आर्थिक महामंदी के खतरे से बचाया जा सकेगा।

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