
विश्व प्रसिद्ध कान्स फिल्म फेस्टिवल-2026 में इस बार जयपुर की सांस्कृतिक विरासत और राजस्थान की कला ने खास छाप छोड़ी। डिजाइनर आशना वासवानी ने खादी से बनी विशेष पोशाकें बनाकर रेड कार्पेट पर भारतीय संस्कृति का शानदार प्रदर्शन किया, जिसमें जयपुर के प्रसिद्ध हवा महल सहित कई ऐतिहासिक स्मारकों के डिजाइन शामिल थे।
जयपुर की फैशन डिजाइनर आशना वासवानी ने कान्स में अपनी क्रिएटिविटी और भारतीय शिल्प कौशल का शानदार प्रदर्शन कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है।
आशना न सिर्फ अपने लेटेस्ट कलेक्शन के साथ कान्स पहुंची बल्कि उन्होंने खादी फैब्रिक को हाई फैशन और रेड कार्पेट कॉउचर का हिस्सा बनाकर नया इतिहास भी रच दिया।
आशना वासवानी को पहली भारतीय डिजाइनर बताया जा रहा है, जिन्होंने पूरी तरह से खादी फैब्रिक से रेड कार्पेट गाउन तैयार किया है। इस खास डिजाइन को उन्होंने खुद पहनकर कान्स के प्रतिष्ठित मंच पर भी पेश किया था।
उनके डिज़ाइन ने फैशन उद्योग का ध्यान आकर्षित किया और अंतर्राष्ट्रीय फैशन जगत में चर्चा का विषय बन गया।

आशना ने हवा महल की डिजाइन वाला कवच पहना हुआ है.
हवा महल से प्रेरित विशेष डिजाइन
आशना के डिजाइन की प्रेरणा जयपुर के ऐतिहासिक हवा महल से ली गई थी। 1799 में महाराजा सवाई प्रताप सिंह द्वारा निर्मित हवा महल की स्थापत्य कला को इस डिजाइन में शामिल किया गया था।
कोर्सेट में झरोखे (खिड़कियाँ) शामिल हैं जिन्हें हवा महल, जाली डिजाइन, राजपूताना मेहराब, छतरियां और पारंपरिक पुष्प पैटर्न की पहचान माना जाता है। डिजाइन में राजस्थानी और मुगल कला का प्रभाव भी साफ नजर आया।
इस खास लुक के साथ आशना ने खादी को भी प्रमुखता दी। पीतल के कोर्सेट के साथ, उन्होंने एक हस्तनिर्मित केप और खादी लहंगा पहना था। खादी को भारत की पहचान माना जाता है और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी इसका विशेष महत्व था।
आशना ने अपने डिजाइन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि भारतीय पारंपरिक कपड़े और हस्तशिल्प अंतरराष्ट्रीय फैशन मंचों पर भी मजबूती से अपनी पहचान बना सकते हैं।
आशना के लुक को जयपुर के मशहूर ज्वेलरी ब्रांड आम्रपाली ज्वेल्स की ज्वेलरी ने और भी खास बना दिया। भारतीय कला और पारंपरिक डिजाइन से तैयार की गई ज्वेलरी उनके पूरे लुक को रॉयल टच दे रही थी। बाल गोपाल भी साथ थे
आशना वासवानी ने इस अंतर्राष्ट्रीय यात्रा में अपना व्यक्तिगत विश्वास भी अपने साथ रखा। उन्होंने बताया कि वह हमेशा अपने साथ बाल गोपाल की एक मूर्ति रखती हैं और इस बार भी वह इसे कान्स में अपने साथ ले गईं। उनके मुताबिक, यह उनकी परंपरा और विश्वास का हिस्सा है, जो उन्हें हर नई यात्रा पर सकारात्मक ऊर्जा देता है।

कपड़ों पर हवा महल की खिड़कियां जयपुर के कारीगरों द्वारा बनाई गई थीं।
डेनिम को कॉउचर फॉर्म दिया
आशना द्वारा बनाया गया यह विशेष गाउन उनके प्रशंसित संग्रह 'देवी ड्रेप' का हिस्सा है। यह गाउन पूरी तरह से डेनिम से बनाया गया था, जिसे आम तौर पर रोजमर्रा के कपड़ों के कपड़े के रूप में देखा जाता है। लेकिन आशना ने इसे रेड कार्पेट लुक देकर हाई फैशन में बदल दिया।
फुल-स्लीव क्रॉप्ड कोर्सेट, मरमेड कट स्कर्ट और लॉन्ग फिशटेल ट्रेल के साथ तैयार इस आउटफिट ने कान्स में मौजूद फैशन एक्सपर्ट्स और इंटरनेशनल मीडिया का ध्यान खींचा। डेनिम हमेशा से लोगों की जिंदगी का हिस्सा रहा है
आशना का कहना है कि डेनिम हमेशा से लोगों की जिंदगी का हिस्सा रहा है और वह इसे दुनिया के सबसे बड़े फैशन प्लेटफॉर्म पर ले जाना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि मैं यह दिखाना चाहती थी कि भारतीय शिल्प और आधुनिक फैशन एक साथ मिलकर खूबसूरती से आगे बढ़ सकते हैं। यह तो एक शुरूआत है।

फैशन डिजाइनर आशना ने खुद इस फेस्टिवल में हिस्सा लिया और राजस्थान की खूबसूरती को दिखाते हुए अपने लिए ड्रेस तैयार की.
जयपुर की कला और भारत की विरासत को पहचान दिलाई
आशना वासवानी ने अपने संग्रह के माध्यम से भारतीय शिल्प कौशल को आधुनिक फैशन के साथ जोड़ने का प्रयास किया। उनके 'देवी ड्रेप' कलेक्शन में खादी, डेनिम, हस्तनिर्मित पीतल का काम, कोटा डोरिया, ब्लॉक प्रिंटिंग और भारतीय हस्तशिल्प का सुंदर मिश्रण था।
अंतर्राष्ट्रीय मॉडलों ने भारतीय डिज़ाइन के परिधान पहने
कान्स फिल्म फेस्टिवल के दौरान आशना ने इंटरनेशनल मॉडल्स के साथ अपना लेटेस्ट कलेक्शन पेश किया। उनके शोकेस 'इनटू द वाइल्ड' में भारतीय परंपरा और आधुनिक फैशन का अनोखा मिश्रण था।

कान्स फिल्म फेस्टिवल के मंच पर आशना की मौजूदगी जयपुर के लिए गर्व की बात है।
इस संग्रह में खादी वस्त्र, पीतल के कोर्सेट, ब्लॉक प्रिंटिंग, हाथ से छपाई और हजारों घंटों की शिल्प कौशल से तैयार किए गए डिजाइन शामिल थे। हर पोशाक भारतीय शिल्प और आधुनिक फैशन तकनीकों के बीच संतुलन को दर्शाती दिखाई दी।
जयपुर की डिजाइनर आशना वासवानी न केवल एक डिजाइनर हैं बल्कि एक बुनकर और शिक्षिका भी हैं। वह कपड़े की कताई, बुनाई और डिजाइनिंग की प्रक्रिया में व्यक्तिगत रूप से शामिल रहती हैं।
उनका डिज़ाइन दर्शन भारतीय परंपरा को आधुनिक वैश्विक फैशन भाषा से जोड़ने पर आधारित है।









