September 23, 2026 6:33 am

कैंसर की दवा ₹2,700 की, MRP ₹27,000… सुप्रीम कोर्ट की फार्मा कंपनियों को कड़ी फटकार, कहा- ‘यह दिन-दहाड़े डकैती है’

जीवन रक्षक दवाओं, विशेषकर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की अत्यधिक कीमतों और दवा कंपनियों के अनियंत्रित मुनाफे पर देश की शीर्ष अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने फार्मास्यूटिकल कंपनियों द्वारा आवश्यक दवाओं पर वसूले जा रहे 800 से 1000 प्रतिशत तक के भारी ट्रेड मार्जिन पर गहरी नाराजगी जताई है। एक गंभीर मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस दवा की वास्तविक निर्माण और थोक लागत मात्र ₹2,700 है, उस पर ₹27,000 की अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) अंकित कर मरीजों से बेतहाशा वसूली करना किसी ‘दिन-दहाड़े डकैती’ (Daylight Robbery) से कम नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य का अधिकार जीवन के मौलिक अधिकार का अटूट हिस्सा है और कंपनियों को मानवीय लाचारी का अनुचित वित्तीय लाभ उठाने की खुली छूट नहीं दी जा सकती।

सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने आवश्यक दवाओं की मूल्य निर्धारण नीति और राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह तल्ख टिप्पणी की। अदालत ने रिकॉर्ड पर पेश किए गए आंकड़ों का हवाला देते हुए रेखांकित किया कि कैसे कैंसर और अन्य दुर्लभ बीमारियों की कीमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी दवाओं में विनिर्माण लागत और रिटेल एमआरपी के बीच एक बहुत बड़ी खाई मौजूद है।

अदालत ने कहा कि जब कोई परिवार कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझता है, तो अत्यधिक दवा खर्च के चलते वह आर्थिक रूप से पूरी तरह तबाह हो जाता है। ऐसे संवेदनशील समय में दवा कंपनियां, डिस्ट्रीब्यूटर्स और कुछ निजी अस्पताल सिंडिकेट बनाकर 900 से 1000 प्रतिशत तक का ट्रेड मार्जिन वसूलते हैं। बेंच ने टिप्पणी की कि व्यापार में उचित लाभ कमाना अलग बात है, लेकिन मजबूरी में फंसे मरीजों की जान की कीमत पर इस तरह का शोषण सीधे तौर पर जनविरोधी और अनैतिक है।

शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और रसायन व उर्वरक मंत्रालय के अधीन काम करने वाले ड्रग प्राइस रेगुलेटर NPPA से पूछा कि दवाओं की कीमतों को तर्कसंगत बनाने के लिए अब तक प्रभावी तंत्र क्यों नहीं विकसित किया गया। अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि:

  • ट्रेड मार्जिन रेशनलाइजेशन (TMR): सभी गैर-अनुसूचित जीवन रक्षक दवाओं, विशेषकर ऑन्कोलॉजी (कैंसर) दवाओं पर पहले प्वाइंट ऑफ सेल (Price to Stockist) से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचने वाले ट्रेड मार्जिन की एक ऊपरी सीमा (Cap) तय की जाए।

  • दवा मूल्य नियंत्रण आदेश (DPCO): नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन्स (NLEM) के दायरे का विस्तार किया जाए ताकि दुर्लभ और अत्यंत महंगी कैंसर रोधी दवाओं को भी सीधे मूल्य नियंत्रण के दायरे में लाया जा सके।

  • पारदर्शिता और ऑडिट: फार्मा कंपनियों के उत्पादन खर्च और उनके द्वारा तय की जाने वाली एमआरपी के फार्मूले की स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों से वित्तीय जांच कराई जाए।

स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों और याचिकाकर्ताओं ने अदालत के समक्ष यह उजागर किया कि दवा उद्योग में अक्सर कृत्रिम रूप से एमआरपी को अत्यधिक ऊंचा रखा जाता है। इसके पीछे मुख्य कारण निजी अस्पतालों, थोक विक्रेताओं और रिटेलर्स को आकर्षित करना होता है।

जिस दवा की उत्पादन और थोक आपूर्ति लागत ₹2,700 होती है, उसकी एमआरपी ₹27,000 दर्ज कर दी जाती है। इसके बाद अस्पताल या मेडिकल स्टोर संचालक मरीज को 10 से 20 प्रतिशत की ‘दिखावटी छूट’ देकर भी प्रति यूनिट 800 प्रतिशत से अधिक का भारी मुनाफा कमा लेते हैं। ब्रांडेड दवाओं के इस खेल के चलते मरीज और उनके परिजन बाजार में उपलब्ध सस्ती जेनेरिक दवाओं तक नहीं पहुंच पाते, क्योंकि पर्चियों पर अक्सर विशिष्ट महंगे ब्रांड नाम ही लिखे जाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त रुख के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि केंद्र सरकार कैंसर और अन्य असाध्य रोगों की दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण के लिए एक कड़ा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क लागू करेगी।

विभिन्न जन-स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (Public Health Activists) का मानना है कि यदि सरकार ट्रेड मार्जिन को 30 से 40 प्रतिशत तक सीमित कर देती है, तो कैंसर के एक सामान्य चक्र (Chemotherapy Cycle) का खर्च लाखों रुपये से घटकर कुछ हजारों में आ सकता है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए संबंधित मंत्रालयों से ठोस कार्ययोजना और हलफनामा दाखिल करने को कहा है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी नागरिक केवल महंगी दवाओं के अभाव में इलाज से वंचित न रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

R . 1

Advertisement Carousel

Your Opinion

Will Donald Trump's re-election as US President be beneficial for India?
error: Content is protected !!