
देश के प्रमुख कॉर्पोरेट हब और साइबर सिटी के रूप में पहचाने जाने वाले गुरुग्राम से एक बेहद चौंकाने वाला और शर्मनाक मामला सामने आया है। गुरुग्राम के एक पॉश इलाके में बने पेइंग गेस्ट यानी पीजी (PG) आवास के अंदर बड़े पैमाने पर अवैध सेक्स रैकेट का संचालन किया जा रहा था। स्थानीय पुलिस को पिछले काफी समय से इस संदिग्ध गतिविधि की गुप्त सूचना मिल रही थी, जिसके आधार पर पुलिस ने एक गुप्त योजना के तहत इस स्थान पर अचानक छापेमारी (Red) कर दी। पुलिस के इस अचानक एक्शन से वहां अफरा-तफरी मच गई और पूरे इलाके में हड़कंप सा मच गया। इस सनसनीखेज कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से 8 महिलाओं समेत कुल 21 लोगों को हिरासत में लिया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है।
साइबर सिटी गुरुग्राम में रोजगार की तलाश में आने वाले युवाओं और छात्रों के लिए पीजी रहना एक आम बात है, लेकिन जब इस तरह के आवासीय परिसरों का इस्तेमाल आपराधिक और अनैतिक गतिविधियों के लिए किया जाने लगता है, तो यह समाज और सुरक्षा व्यवस्था दोनों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन जाता है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि इस रैकेट का संचालन करने वाले लोग बेहद शातिर तरीके से इस अवैध धंधे को अंजाम दे रहे थे। वे ऑनलाइन माध्यमों, सोशल मीडिया और विशेष तौर पर बनाए गए नेटवर्क्स के जरिए ग्राहकों से संपर्क करते थे और इस पीजी को सेफ जोन बताकर बाहरी लोगों का आना-जाना जारी रखते थे। स्थानीय लोगों को जब इसकी भनक लगी तो उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस प्रशासन से की, जिसके बाद यह बड़ी कार्रवाई अमल में लाई गई।
पुलिस की स्पेशल रेड और मौके पर मिला आपत्तिजनक सामान
गुरुग्राम पुलिस के उच्च अधिकारियों को जब इस हाई-प्रोफाइल सेक्स रैकेट के बारे में पक्की खबर मिली, तो एक विशेष टीम का गठन किया गया। योजना के तहत एक फर्जी ग्राहक को उस पीजी में भेजा गया ताकि अंदर चल रहे अवैध कारोबार का पुख्ता सबूत मिल सके। जैसे ही अंदर से हरी झंडी मिली, पुलिस बल ने पूरी इमारत को चारों तरफ से घेर लिया और अचानक रेड डाल दी। इस अचानक हुई छापेमारी से वहां मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। पुलिस ने कमरे की तलाशी के दौरान भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्रियां, नकदी, मोबाइल फोन और कई अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं, जो इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यह धंधा काफी लंबे समय से और बड़े पैमाने पर चलाया जा रहा था।
हिरासत में लिए गए सभी 21 लोगों से पुलिस थाने में गहन पूछताछ की जा रही है। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जो इस पूरे नेटवर्क के मुख्य संचालक या दलाल बताए जा रहे हैं, साथ ही वे युवतियां भी हैं जिन्हें पैसों का लालच देकर इस दलदल में धकेला गया था। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस रैकेट के तार गुरुग्राम के अलावा दिल्ली-एनसीआर या अन्य पड़ोसी राज्यों से जुड़े हैं या नहीं। पूछताछ के दौरान कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे इस अवैध नेटवर्क के अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जा सकेगा और उनके खिलाफ सख्त कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।
गुरुग्राम के पीजी और किराए के मकानों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस सनसनीखेज घटना के सामने आने के बाद एक बार फिर से गुरुग्राम में चल रहे पीजी और किराए के कमों की सुरक्षा व्यवस्था, पुलिस वेरिफिकेशन और स्थानीय प्रशासन की निगरानी पर बहुत बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। नियमों के मुताबिक, हर पीजी संचालक के लिए यह अनिवार्य होता है कि वह वहां रहने वाले या आने-जाने वाले हर व्यक्ति का पुलिस सत्यापन (Police Verification) कराए और पूरी जानकारी स्थानीय थाने में दर्ज रखे। इसके बावजूद, कई मकान मालिक अधिक किराए के लालच में इस तरह के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हैं और बिना किसी कागजी कार्रवाई के लोगों को कमरे किराए पर दे देते हैं। इस प्रकार की लापरवाही अपराधियों और असमाजिक तत्वों के लिए एक सेफ हेवन तैयार कर देती है।
स्थानीय रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और आम नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस प्रकार के पीजी और ओयो रूम्स की समय-समय पर औचक जांच की जानी चाहिए ताकि आवासीय क्षेत्रों की पवित्रता और सुरक्षा बनी रहे। लोगों का कहना है कि जब इस तरह के घिनौने धंधे रिहायशी इलाकों के बीचों-बीच चलने लगते हैं, तो वहां रहने वाले परिवारों और विशेष रूप से महिलाओं तथा बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है। पुलिस और नगर निगम को मिलकर एक ऐसा कड़ा तंत्र विकसित करना चाहिए जिससे बिना रजिस्ट्रेशन या बिना वेरिफिकेशन के चलने वाले ऐसे सभी अवैध अड्डों को तुरंत सील किया जा सके और उनके मालिकों के खिलाफ मिसाल कायम करने वाली कार्रवाई की जा सके।
मानव तस्करी और अनैतिक व्यापार के एंगल से भी हो रही है गहन जांच
जांच एजेंसियों को इस बात की भी आशंका है कि इस सेक्स रैकेट के पीछे कोई बड़ा मानव तस्करी (Human Trafficking) का सिंडिकेट भी सक्रिय हो सकता है। कई बार गरीब और मजबूर परिवार की युवतियों को अच्छी नौकरी या ऊंचे वेतन का झांसा देकर बड़े शहरों में लाया जाता है और फिर उन्हें जबरन इस तरह के अनैतिक कार्यों में धकेल दिया जाता है। पुलिस इस एंगल से भी मामले की गहराई से पड़ताल कर रही है कि पकड़ी गई महिलाओं की पृष्ठभूमि क्या है और उन्हें इस दलदल में किसने फंसाया था। यदि इस मामले में किसी बड़े संगठित गिरोह का हाथ पाया जाता है, तो पुलिस अन्य राज्यों में भी छापेमारी कर सकती है और इस अवैध कारोबार से जुड़े हर एक अपराधी को कानून के कटघरे में खड़ा करेगी।
आने वाले दिनों में गुरुग्राम पुलिस इस तरह के मामलों में और अधिक सख्ती बरतने के संकेत दे रही है। शहर के सभी पुलिस स्टेशनों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने इलाकों में चलने वाले पीजी, गेस्ट हाउस और होटल-लॉज की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखें। नागरिकों से भी अपील की गई है कि यदि उनके आसपास किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या अनजान लोगों का अत्यधिक आना-जाना दिखाई दे, तो वे तुरंत पुलिस को सूचना दें ताकि समय रहते ऐसे अपराधों को रोका जा सके। यह घटना एक बार फिर से यह याद दिलाती है कि समाज में सुरक्षा केवल पुलिस की ही जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके प्रति हर नागरिक को भी जागरूक और सतर्क रहना बेहद आवश्यक है।









