September 22, 2026 5:24 am

BREAKING NEWS

पीरियड्स के असहनीय दर्द और ऐंठन से हैं परेशान? न्यूट्रिशनिस्ट की सुझाई यह खास हर्बल ड्रिंक दिलाएगी तुरंत राहत

महिलाओं के लिए मासिक धर्म यानी पीरियड्स का समय हर महीने शारीरिक और मानसिक रूप से काफी संवेदनशील होता है। इस दौरान गर्भाशय की मांसपेशियों में होने वाले संकुचन (Contractions) के कारण पेट के निचले हिस्से, कमर और जांघों में तेज मरोड़ और दर्द की शिकायत आम बात है। कई महिलाओं में यह दर्द (जिसे चिकित्सीय भाषा में डिस्मेनोरिया कहा जाता है) इतना तीव्र हो जाता है कि उनका सामान्य दिनचर्या के काम करना तक दूभर हो जाता है। इस परेशानी से निजात पाने के लिए कई महिलाएं तुरंत पेनकिलर दवाओं का सहारा लेती हैं, लेकिन बार-बार दर्दनिवारक गोलियां खाने से पेट में एसिडिटी, अल्सर और हार्मोनल असंतुलन जैसे साइड इफेक्ट्स का खतरा बना रहता है। ऐसे में पोषण विशेषज्ञों (Nutritionists) ने एक पारंपरिक और बेहद असरदार हर्बल ड्रिंक का नुस्खा साझा किया है, जो बिना किसी दुष्प्रभाव के गर्भाशय की ऐंठन को शांत कर तुरंत सुकून पहुंचाने में सक्षम है।

पोषण विशेषज्ञों और आहार विशेषज्ञों (Dieticians) के अनुसार, पीरियड्स के दर्द से राहत पाने के लिए रसोई में मौजूद प्राकृतिक मसालों से बेहतर कुछ नहीं हो सकता। इस विशेष पीरियड-रिलीफ ड्रिंक को तैयार करने के लिए चार प्रमुख आयुर्वेदिक सामग्रियों की आवश्यकता होती है—अजवाइन (Carom Seeds), सोंठ (सूखा अदरक पाउडर), शुद्ध देसी गुड़ (Jaggery) और एक चुटकी हल्दी।

यह ड्रिंक बनाने की विधि बेहद सरल है। एक बर्तन में डेढ़ गिलास पानी लें। इसमें आधा चम्मच अजवाइन, एक चौथाई चम्मच सोंठ का पाउडर, एक छोटा टुकड़ा गुड़ और चुटकी भर हल्दी डालें। इस मिश्रण को धीमी आंच पर तब तक उबालें जब तक कि पानी घटकर लगभग एक कप न रह जाए। इसके बाद इसे छान लें और हल्का गुनगुना रहने पर घूंट-घूंट करके चाय की तरह पिएं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर पीरियड्स शुरू होने के 1-2 दिन पहले से ही दिन में एक बार इसका सेवन शुरू कर दिया जाए, तो माहवारी के पहले और दूसरे दिन होने वाली असहनीय ऐंठन से काफी हद तक बचा जा सकता है।

यह ड्रिंक केवल एक घरेलू नुस्खा नहीं है, बल्कि इसमें मौजूद सभी घटक वैज्ञानिक और चिकित्सीय रूप से गर्भाशय की मांसपेशियों को आराम पहुंचाने के लिए सिद्ध हैं:

  • अजवाइन में मौजूद थाइमोल: अजवाइन में ‘थाइमोल’ नामक एक शक्तिशाली एंटीस्पास्मोडिक (Antispasmodic) तत्व पाया जाता है। यह गर्भाशय और आंतों की सिकुड़ी हुई मांसपेशियों को शिथिल करने में मदद करता है, जिससे पेट की मरोड़ और गैस की समस्या तुरंत कम हो जाती है।

  • सोंठ के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण: अदरक और सोंठ में ‘जिंजरोल’ और ‘शोगोल’ नामक यौगिक होते हैं। यह शरीर में उन प्रोस्टाग्लैंडिन्स (Prostaglandins) रसायनों के स्तर को घटाते हैं, जो पीरियड्स के दौरान सूजन और दर्द के मुख्य कारण होते हैं। कई अध्ययनों में सोंठ के प्रभाव को इबुप्रोफेन जैसी दवाओं के समकक्ष पाया गया है।

  • देसी गुड़ की गर्माहट और आयरन: गुड़ में प्राकृतिक मिठास के साथ-साथ प्रचुर मात्रा में आयरन और मैग्नीशियम होता है। यह पेल्विक क्षेत्र में रक्त प्रवाह को सुगम बनाता है और पीरियड्स के दौरान होने वाली कमजोरी व थकान को दूर करता है।

  • हल्दी का करक्यूमिन: हल्दी का सक्रिय तत्व ‘करक्यूमिन’ एक बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी एजेंट है, जो हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण होने वाली अंदरूनी सूजन को कम करता है।

न्यूट्रिशनिस्ट्स का कहना है कि सिर्फ ड्रिंक पीने के साथ-साथ पीरियड्स के दिनों में खानपान की कुछ बुनियादी सावधानियां बरतना भी अनिवार्य है:

  • पर्याप्त हाइड्रेशन रखें: कम पानी पीने से पेट में सूजन (Bloating) और ऐंठन बढ़ जाती है। दिनभर गुनगुना पानी, नारियल पानी या कैमोमाइल टी का सेवन करें।

  • कैफीन और चीनी से दूरी बनाएं: कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स और अत्यधिक मीठी चीजों का सेवन न करें, क्योंकि कैफीन रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ता है, जिससे गर्भाशय का दर्द और तेज हो सकता है।

  • हॉट वाटर बैग का इस्तेमाल: हर्बल ड्रिंक के साथ पेट के निचले हिस्से पर हीटिंग पैड या गर्म पानी की थैली से सिकाई करें। गर्मी मांसपेशियों के तनाव को कम कर एंडोर्फिन (फील-गुड हार्मोन) को सक्रिय करती है।

  • हल्का योग और स्ट्रेचिंग: दर्द में भारी वर्कआउट से बचें, लेकिन ‘बालासन’ (चाइल्ड पोज) या ‘बद्ध कोणासन’ जैसे हल्के योगासन पेल्विक मांसपेशियों के खिंचाव को शांत करने में चमत्कारी परिणाम देते हैं।

यदि किसी महिला को घरेलू उपायों और जीवनशैली में बदलाव के बाद भी हर महीने अत्यधिक असहनीय दर्द, अत्यधिक रक्तस्राव या बेहोशी जैसी स्थिति का सामना करना पड़ता है, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis), पीसीओडी (PCOD) या फाइब्रॉएड जैसी अंदरूनी समस्याओं का संकेत हो सकता है, जिसके लिए तुरंत किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से जांच करानी चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

R . 1

Advertisement Carousel

Your Opinion

Will Donald Trump's re-election as US President be beneficial for India?
error: Content is protected !!