
बालाघाट में फोर्टिफाइड चावल घोटाले की जांच तेज हो गई है. 17 ट्रकों को जब्त कर लिया गया है. 50 से ज्यादा लोगों से पूछताछ हो चुकी है, जबकि 13 से ज्यादा लोगों को नामजद किया गया है. जांच एजेंसियों के मुताबिक, कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
दैनिक भास्कर ने खुलासा किया था कि इथेनॉल उत्पादन के नाम पर सरकारी फोर्टिफाइड चावल की खरीद-बिक्री में करोड़ों रुपये का घोटाला चल रहा है। जो चावल 2320 रुपये प्रति क्विंटल की दर से सरकारी व्यवस्था से बाहर हो रहा था, वह 2800 रुपये प्रति क्विंटल पर बेचा जा रहा था। पूरे नेटवर्क में मुनाफ़ा कई स्तरों पर वितरित किया जा रहा था।
मामले की शुरुआत 3 जून को हुई, जब वारासिवनी के संचेती राइस मिल के पास सरकारी फोर्टिफाइड चावल से भरा एक ट्रक पकड़ा गया. यह चावल बालाघाट एफसीआई गोदाम से छिंदवाड़ा के एवीजे इथेनॉल प्लांट को निर्धारित दर पर बेचा गया था।
एफसीआई ने कहा -नीति का उल्लंघन नहीं किया गया
उधर, रविवार की घटना को लेकर खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि कलेक्टर की जांच में एथेनॉल उत्पादन के लिए एफसीआई द्वारा एवीजे एग्रिको प्राइवेट लिमिटेड, बोरगांव को आवंटित 242.55 क्विंटल (490 बोरी) चावल संचेती राइस मिल, वारासिवनी परिसर में पाया गया.
चावल की हेराफेरी की प्रथम दृष्टया पुष्टि होने पर एवीजे एग्रिको के अधिकृत प्रतिनिधि और संचेती राइस मिल के मालिक के खिलाफ वारासिवनी थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। मंत्री ने कहा कि प्रारंभिक जांच में इथेनॉल निर्माता कंपनी और चावल मिलर की भूमिका सामने आई है।
व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने और ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया गया है. उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच एफसीआई ने अपनी जांच रिपोर्ट दिल्ली भेज दी है और कहा है कि चावल आवंटन में नीति का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है, हालांकि पूरे मामले पर नजर रखी जा रही है.









