
जाति प्रमाण पत्र विवाद में मध्य प्रदेश सरकार की मंत्री प्रतिमा बागरी को बड़ी राहत मिली है. उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति ने विस्तृत जांच के बाद उनके अनुसूचित जाति (बागड़ी) प्रमाण पत्र को वैध माना है। समिति ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड में परिवार के राजपूत होने का कोई सबूत नहीं मिला, जबकि कई दशक पुराने सरकारी दस्तावेज़ लगातार उन्हें बागड़ी समुदाय से संबंधित बताते हैं।
समिति की रिपोर्ट के मुताबिक शिकायतकर्ता अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सके. इसके विपरीत, 1950 से लेकर आज तक के राजस्व रिकॉर्ड, वंशावली, शैक्षिक रिकॉर्ड, जाति प्रमाण पत्र, चुनाव रिकॉर्ड और अन्य सरकारी दस्तावेज़ इस एक तथ्य की पुष्टि करते हैं कि परिवार बागरी समुदाय से है।
1950 के रिकॉर्ड सबसे महत्वपूर्ण सबूत बन गए
समिति ने कहा कि आजादी के बाद के शुरुआती राजस्व रिकॉर्ड सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं। इन अभिलेखों में परिवार की जाति बागरी बताई गई है। ऐसे अभिलेखों में बाद में परिवर्तन की संभावना कम मानी जाती है, इसीलिए इन्हें विशेष महत्व दिया गया।
परिवार के अन्य दस्तावेजों से भी पुष्टि
जांच के दौरान परिवार के अन्य सदस्यों के जाति प्रमाण पत्र, शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड और विभिन्न सरकारी विभागों के दस्तावेजों का भी मिलान किया गया। सभी अभिलेखों में परिवार की जाति बागरी पाई गई। किसी भी दस्तावेज़ में परिवार की पहचान राजपूत के रूप में नहीं की गई।
शिकायतकर्ता के आरोपों को क्यों खारिज कर दिया गया?
समिति ने कहा कि शिकायतकर्ता यह साबित नहीं कर सका कि प्रतिमा बागरी या उनके पूर्वज राजपूत समुदाय से थे। आरोपों के समर्थन में कोई राजस्व रिकॉर्ड, वंशावली, शैक्षिक दस्तावेज़, जन्म रिकॉर्ड या अन्य सरकारी रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किए गए। समिति ने केवल मौखिक दावों को पर्याप्त साक्ष्य नहीं माना।
हाईकोर्ट के निर्देश पर हुई जांच
मामले में हाई कोर्ट के निर्देश के बाद उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति ने विस्तृत जांच की. समिति ने विभिन्न विभागों से रिकॉर्ड प्राप्त किए और वंशावली और सरकारी रिकॉर्ड का सत्यापन किया। जांच पूरी होने के बाद समिति ने निष्कर्ष निकाला कि प्रतिमा बागरी का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र वैध है और इसे रद्द करने का कोई आधार नहीं है.









