
फिल्म 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर' के प्रमोशन के दौरान अभिनेता मनोज बाजपेयी ने राजनीति और नेतृत्व से जुड़े एक सवाल का संतुलित जवाब दिया. दैनिक भास्कर को दिए एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि अगर उन्हें सलाह देनी पड़ी तो वह प्रधानमंत्री को क्या सलाह देंगे, तो उन्होंने कहा कि वह खुद को प्रधानमंत्री को सलाह देने की स्थिति में नहीं मानते हैं.
मनोज बाजपेयी ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री को क्या सलाह दूंगा? मैं उस पद पर नहीं हूं. मैं इन सब मामलों में नहीं पड़ता हूं.” इससे साफ था कि वह राजनीतिक बहसों और टिप्पणियों से दूरी बनाए रखना ही पसंद करते हैं.
बातचीत के दौरान मनोज ने कहा कि हर व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी और विशेषज्ञता का क्षेत्र होता है. उनका मानना है कि आर्थिक संकट, नीतिगत निर्णय और देश चलाने जैसे मुद्दों पर निर्णय उस क्षेत्र के विशेषज्ञों द्वारा किए जाने चाहिए।
एक इंटरव्यू में जब मनोज से 1991 के आर्थिक संकट और मौजूदा वैश्विक हालात के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में आम आदमी या कलाकार की भूमिका सीमित होती है। अर्थव्यवस्था को संभालना और उसे संकट से बाहर निकालना विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं का काम है।

मनोज बाजपेयी की फिल्म 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर' 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
मनोज ने कहा, “आप पत्रकार की जिम्मेदारी निभाना जानते हैं, मैं अभिनेता की जिम्मेदारी निभाना जानता हूं. इसके अलावा देश-दुनिया में क्या हो रहा है, इसे हम सिर्फ पढ़ सकते हैं और समझने की कोशिश कर सकते हैं.”
उन्होंने कहा कि कठिन समय में आम लोग खर्च कम करके और आर्थिक रूप से सतर्क रहकर परिस्थितियों का सामना करते हैं। उनके मुताबिक, कई लोग भविष्य की अनिश्चितताओं को देखते हुए बड़े खर्चों से बच रहे हैं और अपनी बचत को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं।
मनोज बाजपेयी का मानना है कि किसी भी क्षेत्र में विशेषज्ञता का सम्मान किया जाना चाहिए। इसलिए, वह राजनीतिक या आर्थिक निर्णयों पर सार्वजनिक रूप से सलाह देने से बचते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने हमेशा अपने काम पर फोकस किया है और यही उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
वर्कफ्रंट की बात करें तो मनोज बाजपेयी जल्द ही फिल्म 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर' में नजर आएंगे। यह फिल्म 1991 के आर्थिक संकट की पृष्ठभूमि पर आधारित है और आरबीआई गवर्नर के सामने आने वाली चुनौतियों को दर्शाती है। मनोज कहते हैं कि यह सिर्फ अर्थव्यवस्था के बारे में नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी, दबाव और कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने की कहानी भी है।









