
प्रदेश में विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए मुख्यमंत्री ने एक बार फिर पूरी तरह से कड़ा रुख अपना लिया है। आम जनता को बुनियादी सुविधाएं समय पर मिल सकें और विकास परियोजनाओं में किसी भी तरह की हीला-हवाली न हो, इसके लिए प्रशासनिक मशीनरी को पूरी तरह से मुस्तैद कर दिया गया है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री ने सीधे संबंधित जिले के कलेक्टर को फोन करके निर्माणाधीन पुल की प्रगति के बारे में तीखे सवाल किए और यह जानने की कोशिश की कि जनता की सुविधा के लिए बेहद महत्वपूर्ण यह प्रोजेक्ट तय समयसीमा के भीतर क्यों पूरा नहीं हो पाया है। इस औचक फोन कॉल और प्रशासनिक हलचल के बाद से ही महकमे में हड़कंप मच गया है और सुस्त रफ्तार से काम करने वाले अधिकारियों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं।
#सीएम का औचक फोन और विकास कार्यों की जमीनी हकीकत
सुशासन और पारदर्शी कार्यशैली को अपनी सरकार की प्राथमिकता बताते हुए मुख्यमंत्री लगातार यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि हर एक विकास कार्य धरातल पर समयबद्ध तरीके से उतरे। इसी मंशा के तहत जब उन्हें यह फीडबैक मिला कि एक महत्वपूर्ण पुल का निर्माण कार्य काफी समय से तय डेडलाइन चुकने के बावजूद अटका हुआ है, तो उन्होंने बिना किसी देरी के सीधे जिले के जिलाधिकारी यानी कलेक्टर को फोन मिला लिया। बातचीत के दौरान उन्होंने दो टूक शब्दों में यह पूछा कि इस परियोजना के पूरा होने में आखिर क्या तकनीकी या प्रशासनिक अड़चनें आ रही हैं और अब तक काम पूरा क्यों नहीं हो सका। इस तरह की सीधी मॉनिटरिंग से यह साफ हो गया है कि मुख्यमंत्री अब फाइलों में चलने वाले कागजी काम की बजाय सीधे परिणामों पर नजर बनाए हुए हैं और किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त करने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं।
#लापरवाह अधिकारियों पर गिरेगी गाज, सख्त एक्शन के निर्देश
कलेक्टर से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि जनता के टैक्स के पैसों से बनने वाले इन प्रोजेक्ट्स में यदि किसी भी अधिकारी या ठेकेदार की तरफ से अनावश्यक देरी या लापरवाही पाई जाती है, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उन सभी लापरवाह अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए जिनके कारण इस अहम पुल के निर्माण में देरी हुई है। यदि जांच में यह सामने आता है कि प्रशासनिक सुस्ती या आपसी तालमेल की कमी के चलते तय समयसीमा का पालन नहीं हुआ, तो उन पर तुरंत सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इस कड़े निर्देश के बाद जिला प्रशासन और निर्माण कार्य से जुड़ी एजेंसियों के बीच खलबली मच गई है और युद्धस्तर पर फाइलों को खंगालने तथा अटके हुए कार्यों को तेज करने का सिलसिला शुरू हो चुका है।
#आम जनता को हो रही परेशानियों का मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान
यह पुल स्थानीय नागरिकों, आसपास के गांवों और आवागमन करने वाले यात्रियों के लिए एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण जीवनरेखा है। इसके अधूरा रहने की वजह से लोगों को रोजाना भारी ट्रैफिक जाम, लंबे चक्कर और आवागमन में बेहिसाब दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। आम जनता की इन्हीं समस्याओं और लगातार मिल रही शिकायतों का गंभीर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने खुद कमान संभाली और प्रशासनिक अमले को चेतावनी दी कि जनता की सुविधा से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर रियायत नहीं दी जाएगी। स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री के इस त्वरित और सख्त कदम की सराहना करते हुए उम्मीद जताई है कि अब इस हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट का काम बहुत जल्द पूरा हो जाएगा और उन्हें ट्रैफिक जाम से स्थायी राहत मिल सकेगी।
#प्रशासनिक तंत्र में मचा हड़कंप, अब तय समय में पूरा होगा काम
मुख्यमंत्री के इस तीखे रुख और सख्त तेवर के बाद जिले का पूरा प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया है। कलेक्टर ने खुद मौके पर जाकर निर्माणाधीन पुल का औचक निरीक्षण करने का मन बना लिया है और निर्माण एजेंसी के इंजीनियरों को यह चेतावनी दी है कि वे दिन-रात काम करके इसकी रफ्तार को कई गुना बढ़ा दें। परियोजना में आ रही छोटी-मोटी अड़चनों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जा रहा है ताकि तय की गई नई समयसीमा के भीतर इस पुल को जनता के आवागमन के लिए पूरी तरह से समर्पित किया जा सके। जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री के इस तरह के औचक हस्तक्षेप से न सिर्फ इस विशेष परियोजना को गति मिलेगी, बल्कि पूरे प्रदेश के अन्य जिलों में चल रहे विकास कार्यों में भी सुस्ती बरतने वाले अधिकारी अपनी कार्यशैली में सुधार करने के लिए मजबूर होंगे।









