November 2, 2026 1:56 am

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रेडी-टू-ईट ने बदली महिलाओं की जिंदगी, सरस्वती समूह हर महीने कमा रहा 50 हजार रुपये

रायपुर, 1 नवम्बर 2026

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से ग्रामीण महिलाओं को मिला रोजगार और आत्मनिर्भरता का आधार

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से ग्रामीण महिलाओं को मिला रोजगार और आत्मनिर्भरता का आधार

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से ग्रामीण महिलाओं को मिला रोजगार और आत्मनिर्भरता का आधार

महिला सशक्तिकरण केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न रहे, बल्कि महिलाएं अपने हुनर और मेहनत से आजीविका अर्जित कर आत्मनिर्भर बनें, इसी सोच के साथ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित कर रही है। शासन की इस पहल से रायगढ़ जिले के डूमरमुड़ा गांव की 10 महिलाओं की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आया है। बिहान योजना से जुड़ी सरस्वती स्व-सहायता समूह की महिलाएं अब रेडी-टू-ईट पोषण आहार का निर्माण कर न केवल बच्चों और महिलाओं तक पोषण पहुंचा रही हैं, बल्कि हर महीने करीब 50 हजार रुपये का मुनाफा भी अर्जित कर रही हैं।

कभी घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली ये महिलाएं आज उत्पादन, गुणवत्ता, पैकेजिंग और वितरण जैसे कार्यों की जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं। अप्रैल 2026 से समूह को रेडी-टू-ईट निर्माण का काम मिलने के बाद उनकी आजीविका को नियमित आधार मिला है। समूह की सदस्य चम्पा चौहान बताती हैं कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उनके लिए रोजगार के नए रास्ते खुले। रेडी-टू-ईट निर्माण का काम मिलने से समूह की सभी महिलाओं को नियमित रूप से काम करने और अपनी आमदनी बढ़ाने का अवसर मिला है।

समूह की महिलाएं पूरी व्यवस्थित प्रक्रिया के तहत पौष्टिक आहार तैयार करती हैं। इसके लिए सबसे पहले गेहूं, चना, सोयाबीन सहित अन्य सामग्री की मशीनों से सफाई की जाती है। इसके बाद भुनाई, पिसाई और छनाई की प्रक्रिया पूरी होती है। फिर सभी सामग्री को निर्धारित अनुपात में मिक्सिंग मशीन में मिलाकर तैयार मिश्रण की पैकिंग की जाती है। आंगनबाड़ी केंद्रों से प्राप्त मांगपत्र के अनुसार इस पोषण आहार का वितरण किया जाता है। इस तरह समूह की महिलाएं उत्पादन से लेकर वितरण तक की पूरी जिम्मेदारी स्वयं संभाल रही हैं।

चम्पा चौहान के अनुसार, इस काम से समूह को हर महीने करीब 50 हजार रुपये का मुनाफा हो रहा है। इससे महिलाओं को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। वे अपनी कमाई से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ ही घर के महत्वपूर्ण फैसलों में भी अपनी भागीदारी बढ़ा रही हैं। नियमित आमदनी ने उनके आत्मविश्वास को नई मजबूती दी है।

रायगढ़ जिले में महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से पोषण आहार निर्माण की यह पहल व्यापक स्तर पर आगे बढ़ रही है। जिले के कुल 2,709 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 10 महिला स्व-सहायता समूहों का चयन किया गया है। इन समूहों को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के अंतर्गत पूंजीगत सब्सिडी भी प्रदान की जा रही है, जिससे उनके काम को आवश्यक संसाधन और आर्थिक संबल मिल रहा है।

राज्य सरकार की इस पहल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ महिला स्व-सहायता समूहों की भूमिका भी सशक्त हो रही है। एक ओर महिलाओं को गांव में ही सम्मानजनक रोजगार और नियमित आय का अवसर मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और महिलाओं तक पूरक पोषण आहार पहुंचाने की व्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। डूमरमुड़ा की सरस्वती समूह की महिलाएं आज इस बात की मिसाल बन रही हैं कि जब महिलाओं को अवसर, संसाधन और काम करने का मंच मिलता है, तो वे आत्मनिर्भरता के साथ समाज के पोषण और विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

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