

श्रावण मास की अमावस्या से एक दिन पहले ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है। झांसी, हमीरपुर, महोबा, उरई, छतरपुर, बांदा और नरैनी से पैदल चलकर आए श्रद्धालु भजन कीर्तन गाते हुए कामदगिरि परिक्रमा पथ पर पहुंच रहे हैं।
श्रावण अमावस्या की तिथि और महत्व
श्रावण अमावस्या 24 जुलाई 2025 को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा से सभी पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन पितृ श्राद्ध, दान और वृक्षारोपण करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन की तैयारी
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन द्वारा विशेष इंतजाम किए गए हैं। परिक्रमा पथ पर श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।
श्रावण अमावस्या की पूजा विधि
श्रावण अमावस्या की पूजा विधि इस प्रकार है :
– सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
– पूजा स्थल को साफ-सुथरा करके गंगाजल से छिड़कें।
– भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग को स्थापित करें।
– शिवलिंग को गंगाजल और दूध से अभिषेक करें।
– धूप, दीप, फूल, बेलपत्र, चंदन, रोली, धतूरा और फल अर्पित करें।
– ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें।
– अंत में भगवान शिव की आरती करें।
– पितरों का तर्पण करें और पिंडदान दें।
– गरीबों को दान करें।
इस दिन का विशेष महत्व है और श्रद्धालु इसका पालन बड़ी श्रद्धा से करते हैं।









