September 14, 2026 10:46 pm

सीनियर सिटीजन की बल्ले-बल्ले! 5 साल की FD पर मिल रहा 8.5% तक बंपर ब्याज, देखें बैंकों की पूरी लिस्ट

रिटायरमेंट के बाद हर व्यक्ति की पहली प्राथमिकता अपनी जमा पूंजी को पूरी तरह सुरक्षित रखना और उससे नियमित आय प्राप्त करना होती है। शेयर बाजार की अस्थिरता और म्यूचुअल फंड के जोखिम से दूर रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी हमेशा से सबसे भरोसेमंद निवेश माध्यम रहा है। देश के प्रमुख बैंक वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) के लिए विशेष ब्याज दरें पेश कर रहे हैं, जहां 5 साल की लंबी अवधि वाली एफडी पर 8.50 प्रतिशत तक का सालाना ब्याज दिया जा रहा है।

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नियंत्रित बैंकिंग प्रणाली में यह ब्याज दर न केवल महंगाई को मात देने में सक्षम है, बल्कि सुरक्षित भविष्य की गारंटी भी देती है। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान सहित पूरे देश के रिटायर्ड कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और बुजुर्ग नागरिकों के लिए यह अपनी बचत पर अधिकतम मुनाफा कमाने का बेहतरीन अवसर बनकर सामने आया है।

स्मॉल फाइनेंस बैंक और कुछ निजी क्षेत्र के बैंक पारंपरिक सरकारी बैंकों के मुकाबले फिक्स्ड डिपॉजिट पर ज्यादा रिटर्न की पेशकश कर रहे हैं। 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के नागरिकों को सामान्य जमाकर्ताओं की तुलना में 50 से 75 बेसिस प्वाइंट्स यानी 0.50% से 0.75% तक का अतिरिक्त ब्याज दिया जाता है।

सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक इस समय वरिष्ठ नागरिकों को 5 साल की अवधि की एफडी पर 8.50% की सर्वाधिक ब्याज दर उपलब्ध करा रहा है, जबकि इसी अवधि के लिए सामान्य नागरिकों को लगभग 8.25% ब्याज दिया जा रहा है। जना स्मॉल फाइनेंस बैंक 5 साल की जमा योजना पर 8.00% तक ब्याज की पेशकश कर रहा है। डीसीबी बैंक जैसे प्रमुख निजी बैंक वरिष्ठ नागरिकों को लंबी अवधि की एफडी पर 7.75% से 8.00% तक का ब्याज दे रहे हैं।

उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक में यह दर लगभग 7.50% बैठती है। यस बैंक में 5 साल की एफडी पर वरिष्ठ नागरिकों को 7.50% और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में 7.25% का ब्याज मिल रहा है। दूसरी ओर, देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) अपनी स्पेशल वीकेयर और सामान्य एफडी योजनाओं के जरिए 7.05% से 7.50% तक ब्याज दे रहा है। एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे बड़े निजी ऋणदाता 7.00% से 7.10% की दर से ब्याज प्रदान कर रहे हैं।

यदि कोई वरिष्ठ नागरिक 8.50 प्रतिशत सालाना ब्याज दर वाले बैंक में 5 लाख रुपये की एकमुश्त राशि 5 साल के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा करता है, तो चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest) के फार्मूले के अनुसार 5 साल पूरे होने पर उसे लगभग 2.61 लाख रुपये केवल ब्याज के रूप में प्राप्त होंगे। इस प्रकार मैच्योरिटी के समय कुल भुगतान राशि लगभग 7.61 लाख रुपये हो जाएगी।

यदि कोई बुजुर्ग निवेशक मासिक या त्रैमासिक आधार पर ब्याज का भुगतान लेना चाहता है, तो नॉन-क्युमुलेटिव विकल्प चुनकर वह हर महीने अपनी पेंशन जैसी एक निश्चित आय सुनिश्चित कर सकता है। वहीं, जिन निवेशकों को तत्काल पैसे की आवश्यकता नहीं है, वे क्युमुलेटिव विकल्प का चयन कर सकते हैं, जिससे मैच्योरिटी पर मूलधन और संचित ब्याज दोनों एक साथ जुड़कर मोटा फंड तैयार कर देते हैं।

अक्सर अधिक ब्याज दर देखकर निवेशकों के मन में यह संशय पैदा होता है कि क्या स्मॉल फाइनेंस बैंकों में उनका पैसा उतना ही सुरक्षित है जितना बड़े सरकारी या निजी बैंकों में रहता है। इसका सीधा और स्पष्ट उत्तर यह है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) के तहत देश के सभी शेड्यूल्ड कमर्शियल और स्मॉल फाइनेंस बैंक कवर होते हैं।

इस नियम के मुताबिक, यदि किसी दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थिति में बैंक दिवालिया होता है या संकट में पड़ता है, तो प्रत्येक खाताधारक की 5 लाख रुपये तक की मूलधन और ब्याज सहित जमा पूंजी पूरी तरह बीमित और सुरक्षित होती है। वित्तीय विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि आपके पास बड़ी पूंजी है, तो पूरी रकम किसी एक बैंक में लगाने के बजाय अलग-अलग बैंकों में 5-5 लाख रुपये के हिस्सों में बांटकर जमा करना सबसे सुरक्षित और बुद्धिमानी भरा निर्णय होता है।

वरिष्ठ नागरिकों को अपनी एफडी आय पर आयकर नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। आयकर कानून की धारा 80TTB के तहत 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के नागरिकों को बैंक और डाकघर की जमा योजनाओं से एक वित्तीय वर्ष में प्राप्त होने वाले 50,000 रुपये तक के ब्याज पर पूरी टैक्स छूट मिलती है।

यदि किसी वित्तीय वर्ष में कुल ब्याज आय 50,000 रुपये से अधिक हो जाती है, तो बैंक निर्धारित दरों पर स्रोत पर कर कटौती यानी टीडीएस (TDS) काटते हैं। हालांकि, यदि किसी वरिष्ठ नागरिक की पूरे साल की कुल आय आयकर छूट की सीमा से कम है और उन पर कोई टैक्स देनदारी नहीं बनती है, तो वे वित्तीय वर्ष की शुरुआत में बैंक शाखा में फॉर्म 15H जमा कर सकते हैं। फॉर्म 15H जमा करने के बाद बैंक उनके ब्याज भुगतान से टीडीएस की कटौती नहीं करता है। 5 साल की टैक्स सेवर एफडी में आयकर की धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की छूट का लाभ भी लिया जा सकता है, जिसमें 5 साल का लॉक-इन पीरियड अनिवार्य रहता है।

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