सूखते हैंडपंपों के बीच फूटी अमृत धारा

 

रायपुर, 08 जुलाई 2026

सूखते हैंडपंपों के बीच फूटी अमृत धारा

धमतरी जिले का कुरूद विकासखंड,वह इलाका जो अपनी उपजाऊ जमीनों के लिए तो जाना जाता है, लेकिन गर्मियों के आते ही यहाँ की धरती पानी के लिए हांफने लगती थी। भूजल का अत्यधिक दोहन होने के कारण इसे ‘सेमी-क्रिटिकल जोन’ (भूजल संकट क्षेत्र) घोषित कर दिया गया था। हैंडपंप सूख रहे थे और घर की महिलाओं का आधा दिन दूर-दराज से पानी ढोने में ही बीत जाता था।

​        अब, जल जीवन मिशन के तहत इस समस्या का एक बेहद आधुनिक और दूरदर्शी समाधान ढूंढ लिया गया है। 130.40 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रही सिर्री मल्टी विलेज स्कीम (MVS) इस क्षेत्र के लिए एक नई जीवनदायिनी बनकर उभर रही है।

पाताल जाता पानी और महिलाओं का संघर्ष

​कुरूद के ग्रामीण इलाकों में वर्षों से पानी का संकट एक कड़वी सच्चाई रहा है। जलस्तर लगातार नीचे गिरने की वजह से पारंपरिक स्रोत दम तोड़ रहे थे। पानी की इस किल्लत का सबसे बड़ा बोझ घर की महिलाओं और बच्चों पर पड़ता था। भीषण गर्मी में सिर पर घड़े रखे पानी की तलाश में मीलों चलना यहाँ की नियति बन चुकी थी। इसके साथ ही, दूषित भूजल के कारण जलजनित बीमारियों का खतरा भी हमेशा मंडराता रहता था।

जमीन के बजाय अब ‘नहर के पानी’ से बुझेगी प्यास

​इस परियोजना की सबसे खूबसूरत बात यह है कि यह भूजल (Groundwater) पर निर्भर नहीं है। चूंकि कुरूद पहले से ही सेमी-क्रिटिकल जोन में है, इसलिए वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने एक बड़ा फैसला लिया—यहाँ पानी जमीन से नहीं, बल्कि नहर के सतही जल से लिया जाएगा। इससे न सिर्फ ग्रामीणों को शुद्ध पानी मिलेगा, बल्कि क्षेत्र का भूजल स्तर भी रीचार्ज हो सकेगा। पानी की इस पूरी आधुनिक यात्रा की शुरुआत नहर से होती है, जहाँ से कच्चा पानी सीधे डांडेसरा स्थित सम्पवेल में लाकर इकट्ठा किया जाता है। इसके बाद, इस पानी को आधुनिक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP) में भेजा जाता है, जहाँ वैज्ञानिक तकनीकों से इसका पूरी तरह शुद्धीकरण होता है। साफ होने के बाद इस पानी को मास्टर बैलेंसिंग रिजर्वायर (MBR) में सुरक्षित रूप से संग्रहित किया जाता है, जहाँ से मजबूत वितरण पाइपलाइन के नेटवर्क के जरिए यह सीधे आपके घर के नल तक पूरी शुद्धता और प्रेशर के साथ पहुँचता है।

​जल वितरण की इस पूरी व्यवस्था में गुरुत्वाकर्षण (Gravity) और पंपिंग प्रणाली का ऐसा तालमेल बिठाया गया है कि अंतिम छोर पर मौजूद घर में भी पानी पूरे प्रेशर के साथ पहुंचेगा।

​समान वितरण के लिए ‘फोर-जोन’ फॉर्मूला

​इतने बड़े क्षेत्र में हर घर तक बिना किसी भेदभाव के पानी पहुंचाने के लिए पूरी योजना को चार अलग-अलग जोन में बांटा गया है। डांडेसरा में बनने वाले अत्याधुनिक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से पानी शुद्ध होकर इन चार मुख्य केंद्रों (MBR) तक पहुंचेगा। इस योजना के सुचारू संचालन और सभी क्षेत्रों में समान रूप से पानी पहुंचाने के लिए पूरे तंत्र को चार प्रमुख जोनों में बांटा गया है। इसमें सबसे पहला नाम डांडेसरा का आता है, जिसके अंतर्गत 23 गांवों के सभी पंजीकृत परिवारों को शुद्ध पेयजल मिलेगा। इसी तरह भटगांव जोन से 19 गांवों और कोड़ेबोड़ जोन से 15 गांवों के हर घर तक पानी की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी। योजना का चौथा और सबसे बड़ा हिस्सा सिर्री जोन है, जो अकेले 27 गांवों के परिवारों की प्यास बुझाएगा। इस प्रकार, इन चारों जोनों (मास्टर बैलेंसिंग रिजर्वायर) के तालमेल से कुल 84 गांवों के 29,793 परिवारों को सीधा और स्थायी लाभ मिलेगा।

सेहत, समय और पर्यावरण की सुरक्षा

​यह सिर्फ पानी की पाइपलाइन बिछाने का काम नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण जीवन के स्तर को उठाने का एक महा-अभियान है। घर-घर नल लग जाने से महिलाओं और बच्चों का जो समय पानी भरने में बर्बाद होता था, वह अब पढ़ाई और अन्य रचनात्मक कार्यों में लगेगा।वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में वैज्ञानिक तरीके से साफ किया गया पानी मिलने से डायरिया और पीलिया जैसी जलजनित बीमारियों पर पूरी तरह लगाम लगेगी। इस योजना का डिजाइन भविष्य की आबादी और पानी की बढ़ती मांग को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, यानी आने वाले कई दशकों तक यहाँ पानी की कोई किल्लत नहीं होगी। योजना को टिकाऊ बनाने के लिए ग्राम पंचायतों और ‘ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों’ (VWSC) को जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। गाँव के लोग खुद पानी की बर्बादी रोकने और इसके रखरखाव की निगरानी करेंगे।

​मगरलोड में भी जल्द शुरू होगी ‘मेघा योजना’

​धमतरी जिले को पूरी तरह जल-सुरक्षित बनाने के लिए जल जीवन मिशन का यह कारवां यहीं नहीं रुकने वाला है। कुरूद की ‘सिर्री योजना’ के साथ-साथ अब मगरलोड विकासखंड के लिए ‘मेघा मल्टी विलेज स्कीम’ भी अपने अंतिम चरणों में है। इस योजना से आगे चलकर 59 और गांवों को जोड़ा जाएगा, जिसके लिए पारसाबुड़ा में एक नया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तैयार किया जा रहा है।

​जब सिर्री और मेघा दोनों योजनाएं पूरी तरह जमीन पर उतर जाएंगी, तब धमतरी का यह अंचल पूरे छत्तीसगढ़ के लिए ग्रामीण पेयजल प्रबंधन का एक उत्कृष्ट और आधुनिक मॉडल बनकर चमकेगा। अब कुरूद के 84 गांवों के आंगन में जब ‘हर घर जल’ का संकल्प साकार होगा, तो वह सिर्फ पानी की बूंदें नहीं, बल्कि खुशहाली की एक नई इबारत लिखेगा।

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