October 3, 2026 3:54 pm

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हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी का लापरवाह अधिकारियों पर फूटा गुस्सा

हरियाणा की प्रशासनिक व्यवस्था और जनता की शिकायतों के निपटारे को लेकर राज्य सरकार ने अब पूरी तरह से सख्त रुख अपना लिया है, जिससे लापरवाह अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया है। हाल ही में गुरुग्राम में आयोजित एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी (Nayab Singh Saini) ने भ्रष्टाचार और प्रशासनिक कोताही के खिलाफ एक बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने उन तमाम सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़ी चेतावनी जारी की है जो जनता की गंभीर शिकायतों का मौके पर वास्तविक समाधान किए बिना ही कागजों में खानापूर्ति करके फाइलें बंद कर देते हैं। सीएम नायब सिंह सैनी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि सरकार की इस लापरवाही को अब बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जनता के साथ खिलवाड़ करने वालों पर सीधी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी शिकायत का समाधान तब तक पूरा नहीं माना जाएगा जब तक कि खुद शिकायतकर्ता (Complainant) फोन या मौके पर आकर इस बात की संतुष्टि और पुष्टि न कर दे कि उसकी समस्या का पूरी तरह से समाधान हो चुका है। इस बड़े और ऐतिहासिक प्रशासनिक फैसले से राज्यभर के आम नागरिकों में सरकार की कार्यप्रणाली के प्रति विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है, क्योंकि अब अधिकारी जनता के कामों को लटकाने से पहले सौ बार सोचेंगे।

गुरुग्राम में आयोजित इस उच्च-स्तरीय प्रशासनिक बैठक के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विभिन्न विभागों के कामकाज, विकास कार्यों की प्रगति और जनता से मिलने वाली शिकायतों के निवारण पोर्टलों की गहन समीक्षा की। समीक्षा के दौरान जब मुख्यमंत्री के सामने यह बात आई कि कई अधिकारी जमीनी स्तर पर बिना किसी ठोस कार्रवाई के केवल ऑनलाइन पोर्टल्स पर अपनी रिपोर्ट लगाकर फाइलें बंद कर रहे हैं, तो उनका पारा चढ़ गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य आम जनता के जीवन को आसान बनाना और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करना है, न कि कागजी आंकड़ेबाजी बढ़ाना। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जनता अपनी उम्मीदों के साथ सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाती है, और यदि ऐसे में अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ेंगे तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई करने में सरकार जरा भी संकोच नहीं करेगी। इस सख्त तेवर ने बैठक में मौजूद तमाम बड़े अधिकारियों को यह अहसास करा दिया है कि सुशासन और पारदर्शिता अब सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बन चुकी है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा लिए गए इस नए और क्रांतिकारी निर्णय के तहत अब व्यवस्था में एक बहुत बड़ा बदलाव किया गया है। अभी तक यह देखा जाता था कि अधिकारी अपनी सुविधानुसार किसी भी शिकायत पर ‘फाइल क्लोज्ड’ का स्टेटस डालकर इतिश्री कर लेते थे, भले ही पीड़ित नागरिक की समस्या जस की तस बनी रहती हो। लेकिन अब मुख्यमंत्री के आदेश के अनुसार, किसी भी जनशिकायत की फाइल को तब तक आधिकारिक रूप से बंद नहीं माना जाएगा जब तक कि संबंधित शिकायतकर्ता खुद इस बात की पुष्टि (Verification) न कर दे कि उसकी समस्या का संतोषजनक समाधान हो चुका है। यदि शिकायतकर्ता असंतुष्ट रहता है या यह साबित करता है कि उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है, तो उस फाइल को दोबारा खोलकर तुरंत प्रभाव से उस पर उचित कार्रवाई करनी होगी। इस पारदर्शी व्यवस्था से फर्जी रिपोर्ट लगाने वाले लापरवाह बाबूओं और अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी और भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगेगा।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा सरकार लगातार ऐसे नीतिगत फैसले ले रही है जिनका सीधा लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। प्रशासनिक सुधारों की इस कड़ी में जनता की शिकायतों के प्रति संवेदनशीलता दिखाना इस बात का प्रमाण है कि सरकार आम आदमी की परेशानियों को लेकर कितनी गंभीर है। राज्य के सभी जिलों के उपायुक्तों और विभागाध्यक्षों को यह निर्देश दे दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम (Grievance Redressal System) की खुद निगरानी करें और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी नागरिक अपनी समस्या के समाधान के लिए दर-दर न भटके। जनता की ओर से इस कदम की जमकर सराहना की जा रही है और लोगों का यह मानना है कि मुख्यमंत्री की इस सख्ती से सरकारी दफ्तरों में सुस्ती और लालफीताशाही की संस्कृति पर लगाम लगेगी।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का यह कड़ा संदेश केवल गुरुग्राम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हरियाणा के सभी 22 जिलों के प्रशासनिक अमले के लिए एक स्पष्ट और अंतिम चेतावनी है। सरकार ने यह जता दिया है कि जनता के हितों के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही या ढिलाई को माफ नहीं किया जाएगा और काम न करने वाले अधिकारियों को अपनी नौकरी में गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। आने वाले दिनों में इस व्यवस्था के लागू होने से सरकारी कामकाज में तेजी आएगी, शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण होगा और राज्य में सुशासन का एक नया कीर्तिमान स्थापित होगा। मुख्यमंत्री का यह रूप यह साबित करता है कि एक जननेता किस प्रकार अपनी प्रशासनिक मशीनरी को जनता के प्रति जवाबदेह बना सकता है।

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