
साइबर ठगों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब वे देश और राज्यों के वीवीआईपी (VVIP) लोगों को भी अपना निशाना बनाने से नहीं चूक रहे हैं। ताजा मामला हरियाणा से सामने आया है, जहां राज्य विधानसभा के डिप्टी स्पीकर के नाम और तस्वीर का दुरुपयोग करके एक फर्जी फेसबुक आईडी तैयार की गई। इस फर्जी अकाउंट के जरिए साइबर अपराधियों ने उनके परिचितों, रिश्तेदारों और आम लोगों को मैसेज भेजकर पैसे की मांग करनी शुरू कर दी। ठगों ने झांसा दिया कि घर का कुछ घरेलू सामान बेचना है, इसलिए जिसे भी जरूरत हो वह तुरंत खरीद ले और पैसे सीधे गूगल पे (Google Pay) या अन्य डिजिटल वॉलेट के जरिए ट्रांसफर कर दे। जैसे ही इस धोखाधड़ी का यह मामला सामने आया, प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया और तुरंत पुलिस को इसकी आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई गई।
आजकल साइबर अपराधियों द्वारा फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाना और उसके जरिए ठगी करना एक बेहद आम अपराध बन गया है, लेकिन जब निशाना किसी राज्य के संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति पर साधा जाए तो यह मामला बेहद गंभीर हो जाता है। ठगों ने बहुत ही चालाकी से हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर की असली प्रोफाइल से तस्वीरें और जानकारियां चुराकर एक हूबहू मिलती-जुलती फर्जी फेसबुक आईडी (Fake Facebook ID) तैयार की। इसके बाद उन्होंने डिप्टी स्पीकर की फ्रेंड लिस्ट में जुड़े लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजनी शुरू कर दी और जब लोग इसे असली अकाउंट समझकर स्वीकार कर लेते थे, तो चैटिंग के माध्यम से पैसों का खेल शुरू किया जाता था। इस तरह की वारदातों से न केवल राजनेताओं की छवि धूमिल होती है, बल्कि आम जनता में भी एक गलत संदेश जाता है कि इंटरनेट पर कोई भी सुरक्षित नहीं है।
फर्जी आईडी के जरिए ठगी करने वाले शातिर अपराधियों ने लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए एक बहुत ही शातिर कहानी गढ़ी। उन्होंने पीड़ितों को मैसेज भेजा कि वे अपने घर का कुछ पुराना या नया घरेलू सामान (Household Items) जैसे कि फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स या अन्य उपयोग की वस्तुएं बहुत सस्ते दामों में बेचना चाहते हैं। चूंकि मैसेज भेजने वाला अकाउंट किसी बड़े पद पर बैठे व्यक्ति का था, इसलिए लोग आसानी से उस पर भरोसा कर बैठे। ठगों ने बातचीत के दौरान यह भी कहा कि सामान तुरंत डिलीवर कर दिया जाएगा, लेकिन उसके पहले भुगतान ऑनलाइन यानी गूगल पे या फोनपे के जरिए करना होगा। कई लोग जब तक इसकी सच्चाई समझ पाते, तब तक ठगों ने अपने यूपीआई (UPI) हैंडल के जरिए पैसे ऐंठने की पूरी तैयारी कर ली थी।
शुक्र है कि समय रहते इस फर्जीवाड़े की भनक असली अधिकारियों और डिप्टी स्पीकर के सोशल मीडिया प्रबंधकों को लग गई, जिससे एक बड़ा वित्तीय नुकसान होने से बच गया। तुरंत ही इस बात की सूचना हरियाणा पुलिस के साइबर क्राइम विंग (Cyber Crime Wing) को दी गई। पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने तुरंत हरकत में आते हुए उस फर्जी फेसबुक आईडी को ब्लॉक या रिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही आईपी एड्रेस और उन यूपीआई आईडी (UPI IDs) की भी गहनता से जांच की जा रही है, जिनका इस्तेमाल पैसे मंगवाने के लिए किया जा रहा था। साइबर पुलिस ने इस मामले में एक औपचारिक प्राथमिकी दर्ज कर ली है और अपराधियों को जल्द से जल्द दबोचने के लिए तकनीकी सर्विलांस की मदद ली जा रही है।
इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय कितनी सावधानी बरतने की जरूरत है। यदि आपके पास भी किसी जाने-माने राजनेता, अधिकारी या परिचित के नाम से ऐसी कोई फेक प्रोफाइल से पैसे मांगने या सामान बेचने का मैसेज आता है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। बिना पुष्टि किए कभी भी किसी ऑनलाइन लिंक पर क्लिक न करें और न ही गूगल पे या पेटीएम के जरिए पैसे भेजें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत अपने नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर दें। डिजिटल युग में तकनीक जितनी मददगार है, उतनी ही खतरनाक भी हो सकती है, इसलिए जागरूकता ही इस प्रकार के साइबर अपराधियों से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।


















