Mauganj News :

मऊगंज।
त्योहारों से पहले थानों में शांति समिति की बैठक करना एक पुरानी परंपरा रही है। इस बैठक का उद्देश्य होता है कि प्रशासन, व्यापारी, समाज के गणमान्य नागरिक और पत्रकार एक साथ बैठकर त्योहार को शांति और सौहार्द के साथ मनाने की रणनीति बनाएं।
लेकिन इस बार मऊगंज थाना में जो हुआ, उसने इस परंपरा को ही नया “आधुनिक” रूप दे दिया।
बताया जा रहा है कि थाना प्रभारी संदीप भारती ने शांति समिति की बैठक आयोजित तो कर ली, लेकिन इसमें ना जनता थी, ना व्यापारी, ना ही पत्रकार। यानी जिन लोगों के साथ मिलकर शांति बनाए रखने की चर्चा होनी चाहिए, वे ही इस बैठक से नदारद रहे।
“शांति” इतनी कि किसी को बुलाने की जरूरत ही नहीं!
स्थानीय लोगों का कहना है कि शायद थाना प्रभारी ने यह मान लिया कि जब सब कुछ पहले से शांत है, तो फिर जनता और व्यापारियों को बुलाने की क्या जरूरत। इसलिए शांति समिति की बैठक भी इतनी “शांत” रही कि उसमें आम लोगों की मौजूदगी ही नहीं दिखी।
सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में केवल कुछ चुनिंदा लोगों के साथ वरिष्ठ अधिकारियों को ही बुलाया गया था। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या होली जैसे बड़े त्योहार के पहले सिर्फ वरिष्ठ अधिकारियों को ही निर्देश देने से व्यवस्था संभल जाएगी?
परंपरा या औपचारिकता?
हर साल होली, दीपावली या अन्य त्योहारों से पहले होने वाली शांति समिति की बैठक का उद्देश्य ही यही होता है कि प्रशासन और समाज के बीच संवाद स्थापित हो। व्यापारी अपनी समस्याएं बताते हैं, नागरिक सुझाव देते हैं और पत्रकार प्रशासन तक जनता की बात पहुंचाते हैं।
लेकिन इस बार की बैठक को देखकर ऐसा लग रहा है कि शायद यह बैठक सिर्फ एक “औपचारिकता” बनकर रह गई।
नया कीर्तिमान?
स्थानीय लोगों के बीच अब चर्चा यह भी है कि बतौर थाना प्रभारी संदीप भारती ने एक नया “कीर्तिमान” स्थापित कर दिया है—
बिना जनता, बिना व्यापारी और बिना पत्रकार के शांति समिति की बैठक आयोजित करने का कीर्तिमान।
अब देखना यह होगा कि आने वाले होली त्योहार में प्रशासन जनता के साथ मिलकर व्यवस्था संभालता है या फिर “शांति” की यही नई परंपरा आगे भी जारी रहती है?








