बालाघाट चावल घोटाले की एफआईआर | पिता-पुत्र फरार; ₹1,160 करोड़ का घोटाला

मध्य प्रदेश के बालाघाट में दैनिक भास्कर की पड़ताल में 1160 करोड़ रुपए के फोर्टिफाइड चावल घोटाले का खुलासा होने के बाद आखिरकार पुलिस ने शनिवार शाम वारासिवनी थाने में एफआईआर दर्ज कर ली।

मामले में 13 से ज्यादा लोगों को आरोपी बनाया गया है. अब तक 4 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि संचेती राइस मिल के मालिक गंभीर संचेती और उनके बेटे सौरभ संचेती के खिलाफ कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया है. दोनों फरार हैं.

भास्कर ने अपनी पड़ताल में खुलासा किया था कि इथेनॉल उत्पादन की आड़ में सरकारी फोर्टिफाइड चावल की खरीद-फरोख्त में करोड़ों रुपये का घोटाला किया जा रहा है।

सरकारी सिस्टम से करीब 2320 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से निकलने वाला चावल करीब 2800 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बिक रहा था. इस पूरे नेटवर्क में कई स्तरों पर मुनाफा बांटा जा रहा था. यह बात भी सामने आई कि जांच में फंसने के डर से काफी समय तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।

3 जून को संचेती मिल के पास पकड़ा गया ट्रक

मामले की शुरुआत 3 जून को हुई, जब वारासिवनी इलाके में संचेती राइस मिल के पास सरकारी फोर्टिफाइड चावल से भरा एक ट्रक पकड़ा गया. यह चावल बालाघाट के एफसीआई गोदाम से छिंदवाड़ा के एवीजे इथेनॉल प्लांट भेजा जाना था।

शुरुआती जांच में एक ट्रक का मामला सामने आया, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, ट्रकों, राइस मिलर्स और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क की परतें खुलने लगीं।

राइस मिलर पिता-पुत्र की तलाश में जुटी टीम

एफआईआर के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में ट्रक ड्राइवर दुर्गेश शेंडे, एवीजे इथेनॉल प्लांट के प्रतिनिधि राहुल प्रताप, प्लांट सुपरवाइजर राकेश श्रीवास्तव और सिवनी के ट्रांसपोर्टर उबेद खान शामिल हैं। इस बीच, संचेती राइस मिल के मालिक गंभीर संचेती और उनका बेटा सौरभ संचेती फरार हैं. दोनों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है.

एसपी ने कहा- मामले की जांच एसआईटी कर रही है

पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने बताया कि पूरे मामले की जांच के लिए 20-25 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया है. टीम ने अब तक 17 ट्रकों को जब्त किया है. 50 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की जा चुकी है, जबकि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर सिवनी के दो राइस मिलर्स समेत 5-6 लोगों को नोटिस जारी कर बयान दर्ज किए गए हैं.

पूर्व सांसद ने की सीबीआई जांच की मांग

हालांकि, जांच को लेकर सवाल अभी भी बने हुए हैं. भास्कर ने अपनी पड़ताल में संकेत दिया था कि सरकारी चावल की सप्लाई सिर्फ एक इथेनॉल प्लांट तक सीमित नहीं है.

इसी आधार पर अब दूसरे प्लांट और बड़े नेटवर्क की भी जांच की मांग उठ रही है. पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने एक पूर्व मंत्री और उनके भाई पर मिलीभगत का आरोप लगाया है और पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है.

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