एम्बुलेंस अवरुद्ध: सतना में मरीजों को कीचड़ में 1.5 किमी तक ले जाया गया

यह तस्वीर सतना जिले की कोठी तहसील की है। यहां न सिर्फ मरीज बीमार हैं, बल्कि व्यवस्था भी चरमरा गयी है. गोरैया ग्राम पंचायत के रामपुरा गांव में 20 साल पहले सड़क बनाई गई थी, जो धीरे-धीरे खराब हो गई. अब इसका कोई पता नहीं है.

बरसात के मौसम में हालात और भी खराब हो जाते हैं। 11 जुलाई को एक घटना सामने आई। गांव की एक बुजुर्ग लकवाग्रस्त महिला की अचानक तबीयत खराब हो गई। एम्बुलेंस को बुलाया गया, लेकिन कीचड़ भरी सड़क के कारण वह प्रवेश नहीं कर सकी। इसके बाद ग्रामीणों ने मरीज को खाट पर लिटाया और करीब डेढ़ किलोमीटर कीचड़ में चलकर मुख्य सड़क से एंबुलेंस तक पहुंचे. इसके बाद उसे अस्पताल ले जाया जा सका.

यह गांव शहरी विकास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के विधानसभा क्षेत्र में आता है।

गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने वाली सड़क बारिश के बाद खराब हो जाती है।

गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने वाली सड़क बारिश के बाद खराब हो जाती है।

सड़क की हालत इतनी खराब है कि वहां एंबुलेंस भी नहीं जा सकती.

सड़क की हालत इतनी खराब है कि वहां एंबुलेंस भी नहीं जा सकती.

यह गांव राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के विधानसभा क्षेत्र में आता है.

यह गांव राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के विधानसभा क्षेत्र में आता है.

बरसात के दिनों में गांव तक वाहन नहीं पहुंच पाते

ग्रामीणों के मुताबिक करीब 100 घरों वाले रामपुरा गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने वाली डेढ़ किलोमीटर लंबी सड़क पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है. बरसात के मौसम में सड़क पर कीचड़ और फिसलन इतनी बढ़ जाती है कि एंबुलेंस और अन्य वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते.

ऐसे में बीमार, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को खाट के सहारे या कंधे पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना ग्रामीणों की मजबूरी बन जाती है.

20 साल पहले बनी थी सड़क, तब से कभी नहीं हुई मरम्मत

ग्रामीण दुर्गेश त्रिवेदी ने बताया कि करीब 20 साल पहले लोक निर्माण विभाग ने यहां डब्ल्यूबीएम (वाटर बाउंड मैकेडम) सड़क बनाई थी। उसके बाद सड़क की कभी मरम्मत नहीं करायी गयी. समय के साथ सड़क पूरी तरह से खराब हो गई और अब कच्चे रास्ते में तब्दील हो गई है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने कई बार सरपंच, सचिव और जनप्रतिनिधियों से सड़क निर्माण की मांग की है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है.

हर मानसून में कनेक्टिविटी बाधित हो जाती है

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात शुरू होते ही गांव का मुख्य सड़क से संपर्क प्रभावित हो जाता है. आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही पक्की सड़क नहीं बनाई गई तो भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता।

घटना का वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से रामपुरा गांव तक पक्की सड़क का निर्माण जल्द शुरू कराने की मांग की है.

सरपंच का कहना है कि टेंडर जारी नहीं किया गया

महिला सरपंच गोलू दोहर के मुताबिक एक साल पहले इस सड़क का नाम प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में शामिल करने का प्रयास किया गया था, लेकिन अब तक इसका टेंडर जारी नहीं हुआ है.

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