July 14, 2026 11:31 am

नारायणपुर में बदलाव का नया सवेरा- राजस्व सर्वेक्षण ने छीना नक्सली साया

​रायपुर,13 जुलाई 2026

राजस्व सर्वेक्षण ने छीना नक्सली साया

राजस्व सर्वेक्षण के माध्यम से भूमि का वैधानिक स्वामित्व स्थापित करने का अर्थ है राज्य सरकार के राजस्व रिकॉर्ड में भूमि की सीमा, क्षेत्रफल और वास्तविक मालिक का कानूनी तौर पर दर्ज होना। इसके लिए ड्रोन तकनीक और आधुनिक मानचित्रण का उपयोग करके सटीक रिकॉर्ड तैयार किए जाते हैं।  जिस ज़मीन पर सदियों से पसीना बहाया, आज उसका असली हक़ मिला है।

नक्सलवाद से मुक्ति के बाद अब नारायणपुर के दूरस्थ गाँवों में विकास का डिजिटल सूरज उग रहा है। विशेष राजस्व सर्वेक्षण के तहत जिले के 246 असर्वेक्षित ग्रामों में भूमि का वैधानिक स्वामित्व प्रदान करना है। जिले के 6 गाँवों का सर्वेक्षण पूर्ण व भुइयां पोर्टल पर लाइव के साथ 3 अन्य गाँवों के रिकॉर्ड अपलोडिंग हेतु तैयार हो चुका है। इसी तरह 8 अन्य दुर्गम गाँवों का सर्वेक्षण भी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।

246 असर्वेक्षित गाँवों में युद्धस्तर पर राजस्व सर्वेक्षण

​      ​छत्तीसगढ़ का नारायणपुर जिला जो कभी अपनी भौगोलिक दुर्गमता और सुरक्षा चुनौतियों के लिए जाना जाता था, आज सुशासन की एक नई इबारत लिख रहा है। 31 मार्च 2026 को नारायणपुर को नक्सल मुक्त घोषित किए जाने के ठीक बाद, प्रशासन ने समय गंवाए बिना विकास की मुख्यधारा से कटे गाँवों की ओर रुख किया। ​वर्षों से जो ग्रामीण अपनी ही ज़मीन पर बिना किसी कानूनी दस्तावेज़ के खेती कर रहे थे, उनके लिए राजस्व अमला देवदूत बनकर पहुँचा। शासन के निर्देश पर जिले के 246 असर्वेक्षित गाँवों में युद्धस्तर पर राजस्व सर्वेक्षण अभियान शुरू किया गया।

​कठिन राहें, बुलंद हौसले- आईआईटी रुड़की की तकनीक का साथ

​प्रशासनिक अधिकारियों और राजस्व अमले ने ग्रामीणों के साथ मिलकर घने जंगलों और पहाड़ों के बीच बसे गाँवों की खाक छानी। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद मसपी, मलमेटा, बड़ेकाल, दोड़गे, गोडाबेड़ा, गोमे, कोंगे और बोगान जैसे आठ बेहद दुर्गम गाँवों में सर्वेक्षण का काम सफलतापूर्वक पूरा किया गया। ​इस अभियान को और अधिक पारदर्शी एवं सटीक बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़ों को नक्शा तैयार करने के लिए आईआईटी (प्प्ज्) रुड़की भेजा गया है। वहां से सैटेलाइट और आधुनिक ग्रिड आधारित नक्शे प्राप्त होते ही अंतिम सत्यापन कर इन्हें भी डिजिटल कर दिया जाएगा।

​डिजिटल हक़- छह गाँवों के किसानों को मिला मालिकाना अधिकार

​इस ऐतिहासिक अभियान के तहत अब तक हुच्चाकोट, गोर्रा, कुमगांव, हितुलवाड़, काडूलबेड़ा और मुरहापदर गाँवों का सर्वेक्षण पूरी तरह संपन्न हो चुका है। इन सभी गाँवों के अंतिम भूमि अभिलेख छत्तीसगढ़ सरकार के भुइयां पोर्टल पर अपलोड कर दिए गए हैं। इसके अलावा कोडोली, कुंदला और चिलपरस के दस्तावेज़ भी जल्द ही ऑनलाइन होने वाले हैं। अब ग्रामीण एक क्लिक पर अपनी ज़मीन का वैधानिक रिकॉर्ड देख सकते हैं।

किसान गर्व से कह सकता है कि माटी का असली मालिक हैं

​ज़मीन का वैधानिक हक मिलने से केवल विवाद ही खत्म नहीं हुए हैं, बल्कि ग्रामीणों के आर्थिक सशक्तिकरण के बंद दरवाज़े खुल गए हैं। अब नारायणपुर के ये किसान गर्व से सिर उठाकर कह सकते हैं कि वे अपनी माटी के असली मालिक हैं। अब किसान बिना किसी अड़चन के सोसायटियों में अपनी फसल बेच सकेंगे। सीधे बैंक खातों में आने वाली सम्मान राशि का रास्ता साफ हुआ।खेती को आधुनिक बनाने के लिए बैंकों से आसान ऋण की सुविधा मिलेगी। ​इसी तरह सहकारी समितियों से सही समय पर रियायती दरों पर इनपुट की उपलब्धता भी अब मिलेगी।

​समावेशी विकास और सुशासन की नई मिसाल

​नारायणपुर का यह राजस्व सर्वेक्षण सिर्फ कागज़ों को दुरुस्त करने का अभियान नहीं है, बल्कि यह ग्रामीणों के खोए हुए आत्मविश्वास को वापस लाने का महायज्ञ है। प्रशासनिक दृढ़ता, आईआईटी जैसी संस्थाओं की आधुनिक तकनीक और जनसहभागिता के त्रिवेणी संगम ने साबित कर दिया है कि अगर नीयत साफ हो, तो दशकों पुरानी समस्याओं को भी पलक झपकते हल किया जा सकता है। ​नारायणपुर अब भयमुक्त ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और डिजिटल सुशासन के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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