
LOC पर किशनगंगा नदी तट पर लगे सैकड़ों टेंट.
एलओसी (नियंत्रण रेखा) पर स्थित 3770 की आबादी वाले केरन गांव में रोजाना 3000 पर्यटक पहुंच रहे हैं। गुरेज, तंगधार, टीटवाल, उरी और तुलैल घाटी के गांवों में खोले गए होमस्टे भर गए हैं और किशनगंगा नदी के किनारे लगाए गए टेंटों में कोई जगह नहीं बची है। एलओसी कश्मीर का नया पर्यटन केंद्र बन गया है।
यहां 7 साल में पर्यटकों की संख्या 51 गुना बढ़ गई है. जहां 2020 में यहां सिर्फ 7900 पर्यटक आए थे, वहीं इस साल अब तक 4 लाख पर्यटक आ चुके हैं. उम्मीद है कि साल के अंत तक यह संख्या 7 लाख को पार कर जाएगी.
वहीं, अब तक यहां पर्यटकों की सबसे ज्यादा संख्या का रिकॉर्ड 2024 का था, जब 3.43 लाख पर्यटक आए थे। जहां कभी गोलियां चलती थीं, वहां यह बदलाव फरवरी 2021 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम समझौते के बाद शुरू हुआ। पीओके के गांवों को देखने के लिए एलओसी पर आ रहे हैं पर्यटक
गुलमर्ग-पहलगाम जैसे पर्यटन स्थलों को छोड़कर लोग भारतीय धरती से LOC पर PoK के गांवों को देखने आ रहे हैं. वे झेलम-किशनगंगा के खूबसूरत नजारों के बीच सेल्फी ले रहे हैं और रील बना रहे हैं।
वे स्थानीय कश्मीरियों के आतिथ्य और उनके भोजन का आनंद ले रहे हैं। नून चाय की चुस्कियों के बीच वे स्थानीय दृश्यों को अपने कैमरे में कैद कर रहे हैं।

सालों से बंद नियंत्रण रेखा पर कई इलाके धीरे-धीरे पर्यटकों के लिए खुल रहे हैं।
लोग पुश्तैनी घरों को होमस्टे में बदल रहे हैं
स्थानीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह से बदल गई है। जो परिवार रोज़गार की तलाश में अपने गाँव छोड़कर शहरों में चले गए थे, वे वापस लौट रहे हैं और अपने पुश्तैनी घरों को होमस्टे में बदल रहे हैं। 2021 के युद्धविराम के बाद नियंत्रण रेखा पर सालों से बंद कई इलाके धीरे-धीरे पर्यटकों के लिए खोल दिए गए.
पाकिस्तान की सीमा से लगे इलाकों में भी कारोबार बढ़ा
न केवल एलओसी के भारतीय हिस्से में बल्कि पाकिस्तानी हिस्से में भी पर्यटन तेजी से बढ़ा है। पर्यटकों के कारण व्यापार भी बढ़ा है। होमस्टे और दुकानें खुल रही हैं। सीमा के इस पार स्थानीय निवासी बशीर अहमद कहते हैं, “पर्यटक दोनों तरफ से आते हैं. कोई डर नहीं दिखता.”








