शाहपुर थाने का सरकारी आवास बना ‘मोह की माया’! लाइन अटैच होने के बाद भी नहीं छूटा ठिकाना? नए थाना प्रभारी को वाहन में रात गुजारने की नौबत
मऊगंज में पुलिस महकमे का अजीब मामला: थाना बदला, प्रभारी बदले, लेकिन सरकारी आवास पर कब्जा किसका? एसपी के आदेश के बावजूद आवास खाली न होने की चर्चा

पेट्रोल न्यूज़ 🔥 | मऊगंज
मऊगंज जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र से पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला शाहपुर थाना प्रभारी रहे अजय खोबरागड़े से जुड़ा बताया जा रहा है, जिनका लाइन अटैच होने के बाद भी शाहपुर थाने से कथित तौर पर मोह खत्म नहीं हो रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, मऊगंज पुलिस अधीक्षक द्वारा अजय खोबरागड़े को शाहपुर थाना प्रभारी के पद से हटाकर लाइन अटैच किया गया था। इसके बाद शाहपुर थाने की जिम्मेदारी नए अधिकारियों को सौंपी गई। लेकिन आरोप है कि थाना बदलने के बावजूद शाहपुर में थाना प्रभारी के लिए निर्धारित सरकारी आवास को खाली नहीं किया गया।
पहले ऋषि द्विवेदी ने बताई थी समस्या, फिर भी नहीं बदले हालात?
जानकारी के मुताबिक, अजय खोबरागड़े के बाद ऋषि कुमार द्विवेदी को शाहपुर थाना प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई थी। उस दौरान भी कथित रूप से थाना प्रभारी के लिए बने आवास को लेकर समस्या सामने आई थी।
बताया जा रहा है कि ऋषि कुमार द्विवेदी ने इस संबंध में पुलिस अधीक्षक को पत्राचार के माध्यम से स्थिति से अवगत कराया था। अब सवाल यह है कि यदि सरकारी आवास को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित रूप से जानकारी दी गई थी, तो उस समय इस समस्या का समाधान क्यों नहीं हुआ?
अब रामदीन सिंह की बारी… लेकिन आवास अब भी खाली नहीं?
वर्तमान में रामदीन सिंह को शाहपुर थाना प्रभारी की कमान सौंपी गई है। लेकिन स्थानीय स्तर पर सामने आ रही जानकारी के अनुसार, थाना प्रभारी के लिए निर्धारित सरकारी आवास को लेकर समस्या अभी भी बरकरार है।
सबसे गंभीर बात यह बताई जा रही है कि आपात स्थिति में थाना प्रभारी रामदीन सिंह को कभी-कभी अपने वाहन में ही रात बिताने की नौबत आ जाती है। वहीं, वह फिलहाल रोजाना हनुमना से शाहपुर आना-जाना कर रहे हैं।
शाहपुर और हनुमना के बीच की दूरी करीब 20 किलोमीटर बताई जा रही है। ऐसे में कानून-व्यवस्था से जुड़ी संवेदनशील जिम्मेदारी संभालने वाले थाना प्रभारी का रोजाना लंबी दूरी से आवागमन करना अपने आप में गंभीर सवाल खड़ा करता है।
सरकारी आवास आखिर किसके लिए?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि थाना प्रभारी के लिए बनाए गए सरकारी आवास का इस्तेमाल आखिर वर्तमान थाना प्रभारी क्यों नहीं कर पा रहे हैं?
अगर पूर्व थाना प्रभारी का स्थानांतरण हो चुका है, तो क्या नियमानुसार उन्हें आवंटित सरकारी आवास खाली नहीं करना चाहिए?
और यदि आवास खाली नहीं हुआ है, तो जिम्मेदारी किस अधिकारी की है?
क्या पुलिस विभाग में सरकारी आवासों के आवंटन और खाली कराने को लेकर कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है?
16 किलोमीटर दूर मऊगंज… फिर भी शाहपुर का मोह क्यों?
इस पूरे मामले में एक और दिलचस्प पहलू सामने आता है। जानकारी के मुताबिक अजय खोबरागड़े के लिए मऊगंज से शाहपुर की दूरी करीब 16 किलोमीटर है, जबकि वर्तमान थाना प्रभारी रामदीन सिंह को हनुमना से शाहपुर करीब 20 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ रहा है।
यानी सवाल सिर्फ दूरी का नहीं, बल्कि सरकारी आवास के उपयोग और उसकी उपलब्धता का है।
अगर आवास वर्तमान थाना प्रभारी के उपयोग के लिए निर्धारित है, तो उसे उपलब्ध कराने में आखिर अड़चन कहां है?
थाना प्रभारी वाहन में रात बिताए और सरकारी आवास पर सवाल!
कानून-व्यवस्था संभालने वाले थाना प्रभारी के लिए थाने के नजदीक आवास की व्यवस्था इसलिए होती है ताकि किसी भी आपात स्थिति में अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंच सके।
लेकिन यदि किसी थाना प्रभारी को आवास उपलब्ध न होने के कारण रोजाना दूर से आना-जाना पड़े या कभी-कभी वाहन में रात बिताने की स्थिति बने, तो यह महज आवास का मामला नहीं रह जाता—यह सीधे तौर पर पुलिस व्यवस्था और प्रशासनिक प्रबंधन पर सवाल बन जाता है।
एसपी के आदेश और विभागीय व्यवस्था पर भी उठे सवाल
अब निगाहें मऊगंज पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर हैं।
यदि वास्तव में पूर्व थाना प्रभारी द्वारा सरकारी आवास खाली नहीं किया गया है, तो क्या पुलिस विभाग ने उन्हें आवास खाली करने का निर्देश दिया?
यदि निर्देश दिया गया तो उसका पालन क्यों नहीं हुआ?
और यदि अभी तक कोई आदेश नहीं हुआ, तो वर्तमान थाना प्रभारी को आवास उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी किसकी है?
इन सवालों का जवाब पुलिस विभाग की ओर से दिया जाना जरूरी है।
मामला सिर्फ एक कमरे का नहीं, व्यवस्था की गरिमा का है
शाहपुर में थाना प्रभारी बदल गए, जिम्मेदारी बदल गई, लेकिन अगर सरकारी आवास का मामला अब भी जस का तस है तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल है।
अब देखना यह होगा कि मऊगंज पुलिस अधीक्षक इस मामले में क्या संज्ञान लेते हैं और क्या वर्तमान थाना प्रभारी रामदीन सिंह को उनका निर्धारित सरकारी आवास उपलब्ध कराया जाता है या नहीं ?








