
Bihar Flood: भागलपुर में बाढ़ के पानी में डूबने से 6 मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत से पसरा मातम, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जताया गहरा शोक; उफनती लहरों के बीच सहमा पूरा इलाका
बिहार के एक तरफ जहां बाढ़ और उफनती नदियों का कहर लगातार आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ भागलपुर जिले से एक ऐसी हृदयविदारक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है जिसने पूरे राज्य को गमगीन कर दिया है। भागलपुर जिले के विभिन्न इलाकों में बाढ़ के खतरनाक रूप ले चुके पानी में डूबने से एक साथ 6 मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई है। बच्चों की इस आकस्मिक और अकाल मृत्यु के बाद पीड़ित परिवारों में कोहराम मच गया है और पूरे गांव में चूल्हे तक नहीं जले हैं। स्थानीय प्रशासन और राहत दलों के भारी-भरकम दावों के बावजूद ग्रामीण इलाकों में जलभराव और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण यह बड़ा हादसा घटित हुआ है। इस মর্মান্তिक घटना के बाद सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत कई बड़े नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है, जबकि प्रशासन की कार्यशैली को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ केवल खेतों और घरों को ही अपने आगोश में नहीं लेती, बल्कि अपने पीछे बर्बादी और अपनों को खोने का ऐसा दर्द छोड़ जाती है जो बरसों तक नहीं भूलता। भागलपुर की यह घटना इस बात की सबसे डरावनी और कड़वी सच्चाई है कि कैसे बाढ़ के दिनों में बच्चे अनजाने में पानी के तेज बहाव या गहरे गड्डों की चपेट में आ जाते हैं। जैसे ही यह खबर फैली, गांव में चीख-पुकार मच गई और देखते ही देखते सैकड़ों लोगों की भीड़ घटनास्थल पर जमा हो गई। आइए इस दिल दहला देने वाली पूरी दुर्घटना, इसके प्रशासनिक पहलुओं और मृतकों के परिजनों के दर्द को बेहद विस्तार से जानते हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भागलपुर जिले के अलग-अलग ग्रामीण इलाकों में पिछले कुछ दिनों से गंगा और अन्य सहायक नदियों का पानी लगातार उफान पर है, जिसके कारण निचले इलाकों और गांवों की गलियों तथा खेतों में भारी जलभराव हो चुका है। ग्रामीण बच्चे अक्सर स्कूल बंद होने या छुट्टियों के दिनों में इस पानी के आसपास खेलने चले जाते हैं, और इस बार भी ऐसा ही हुआ। बच्चे खेलते-खेलते पानी की गहराई का अंदाजा नहीं लगा पाए और अचानक गहरे पानी में चले गए। जब तक आसपास के लोग या परिजन कुछ समझ पाते और उन्हें बचाने के लिए दौड़ते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पानी में डूबने से एक-एक करके छह अलग-अलग परिवारों के चिराग बुझ गए, जिससे पूरे इलाके में मातम पसर गया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन की तरफ से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चेतावनी के बोर्ड या सुरक्षा के लिए कोई खास बैरिकेडिंग नहीं की गई थी, जिसके कारण बच्चों को खतरे का आभास नहीं हुआ। अभिभावकों का रो-रोकर बुरा हाल है और उनका कहना है कि अगर समय रहते प्रशासन ने जलभराव वाले खतरनाक स्थानों पर सुरक्षा गार्ड्स तैनात किए होते या बच्चों के जाने पर पाबंदी लगाई होती, तो शायद उनके जिगर के टुकड़े आज उनके बीच जिंदा होते। इस घटना ने एक बार फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बच्चों और कमजोर वर्ग की सुरक्षा के लिए हमारे पास जमीनी स्तर पर कितने पुख्ता इंतजाम हैं।
भागलपुर में हुई इस दर्दनाक दुर्घटना की खबर जैसे ही पटना स्थित राज्य मुख्यालय तक पहुंची, प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस घटना पर अत्यधिक दुख और संवेदना व्यक्त करते हुए इसे एक अपूर्णीय क्षति बताया है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सरकार इस दुख की घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ पूरी मजबूती के साथ खड़ी है। इसके साथ ही, जिला प्रशासन को यह निर्देश दिए गए हैं कि सभी छह मृतक बच्चों के परिजनों को आपदा प्रबंधन योजना के तहत तुरंत सरकारी सहायता राशि और अनुग्रह अनुदान (Ex-gratia) प्रदान किया जाए ताकि उन्हें इस आर्थिक और मानसिक संकट से कुछ राहत मिल सके।
भागलपुर के जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने भी तुरंत मौके का दौरा किया और पीड़ित परिवारों से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया। प्रशासन की ओर से यह आश्वासन दिया गया है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अब विशेष निगरानी दल तैनात किए जाएंगे जो यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी बच्चा या ग्रामीण खतरनाक पानी के करीब न जाए। इसके अलावा, गोताखोरों और एनडीआरएफ (NDRF) की टीमों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी अन्य संभावित अनहोनी को तुरंत टाला जा सके। हालांकि, परिजनों का कहना है कि मुआवजे के पैसे उनके बच्चों को वापस नहीं ला सकते, इसलिए सरकार को बाढ़ के दौरान सुरक्षा के ठोस और स्थायी उपाय करने चाहिए।
बिहार के लिए बाढ़ कोई नई समस्या नहीं है, हर साल राज्य के उत्तरी और पूर्वी जिले जैसे भागलपुर, कटिहार, पूर्णिया, दरभंगा और मुजफ्फरपुर पानी की चपेट में आ जाते हैं। लेकिन हर साल आने वाली इस आपदा के बावजूद प्रशासन और स्थानीय निकायों की तैयारियां अक्सर कागजी साबित होती हैं। बाढ़ के पानी में डूबने से बच्चों की मौत होने के मामले हर साल सैकड़ों की संख्या में दर्ज किए जाते हैं, जो हमारी व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाते हैं। जब गांव के चारों तरफ पानी भर जाता है, तो बच्चों की हर गतिविधि पर नजर रखना माता-पिता के लिए भी बहुत कठिन हो जाता है, क्योंकि स्कूल बंद रहते हैं और बच्चे घरों के बाहर पानी में तैरने या खेलने निकल जाते हैं।
बाल अधिकार कार्यकर्ताओं और समाजसेवियों का मानना है कि सरकार को बाढ़ आने से पहले ही गांवों में मुनादी करवा देनी चाहिए और लोगों को जागरूक करना चाहिए कि वे अपने बच्चों को पानी के पास बिल्कुल न जाने दें। इसके अलावा, स्कूलों और पंचायतों के माध्यम से बच्चों को तैराकी और जल सुरक्षा के प्रति बेसिक प्रशिक्षण देने की भी आवश्यकता है ताकि आपात स्थिति में वे अपनी जान बचा सकें। भागलपुर की इस घटना ने एक बार फिर पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है और यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हम प्रकृति के इस तांडव के आगे हमेशा ऐसे ही बेबस रहकर अपने मासूमों को खोते रहेंगे?
इस মর্মান্তिक हादसे के बाद राज्य की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्षी दलों के नेताओं ने सरकार और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि बाढ़ सुरक्षा के दावे केवल कागजों तक सीमित हैं और धरातल पर कोई काम नहीं हो रहा है। विपक्ष ने मांग की है कि भागलपुर हादसे की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, पीड़ित परिवारों को सरकारी नौकरी और उचित मुआवजा देने की भी मांग जोर-शोर से उठाई जा रही है। सत्ता पक्ष के प्रवक्ताओं ने विपक्ष के इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि यह राजनीति करने का समय नहीं है, बल्कि इस दुख की घड़ी में सभी को मिलकर पीड़ित परिवारों की मदद करनी चाहिए और राहत कार्यों को पूरी पारदर्शिता के साथ चलाना चाहिए।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी प्रभावित गांवों का दौरा किया है और लोगों को हरसंभव मदद दिलाने का भरोसा दिलाया है। प्रशासन अब यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि बाढ़ प्रभावित हर एक परिवार तक सूखा राशन, शुद्ध पेयजल और चिकित्सीय सहायता समय पर पहुंचे ताकि किसी अन्य प्रकार की बीमारी या संकट का सामना न करना पड़े। बाढ़ के इस पानी के उतरने में अभी कुछ हफ्तों का समय और लग सकता है, ऐसे में लोगों की मुश्किलें अभी और बढ़ने की आशंका है।









