
अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में कीमती धातुओं का मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां अमेरिकी बॉन्ड यील्ड (US Treasury Yields) में आई मजबूती और ब्याज दरों पर सतर्कता के चलते सोने (Gold) की कीमतों में हल्का दबाव बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ चांदी (Silver) अपनी मजबूत औद्योगिक मांग के दम पर $67.30 प्रति औंस के अहम स्तर के करीब दृढ़ता से कारोबार कर रही है। फेडरल रिजर्व के नीतिगत रुख और वैश्विक आर्थिक संकेतकों के बीच निवेशक दोनों धातुओं की अलग-अलग चाल पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
सोने की कीमतों का अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स के साथ पारंपरिक रूप से विपरीत संबंध (Inverse Relationship) होता है। जब यूएस ट्रेजरी यील्ड में उछाल आता है, तो निवेशकों के लिए गैर-ब्याज वाली संपत्तियों (Non-yielding assets) जैसे कि सोने को अपने पोर्टफोलियो में बनाए रखने की अवसर लागत (Opportunity Cost) बढ़ जाती है।
हालिया सत्रों में यूएस यील्ड्स के ऊपरी स्तरों पर टिके रहने से संस्थागत निवेशकों ने सोने में आक्रामक खरीदारी के बजाय मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना अपने उच्च स्तरों से थोड़ा फिसलकर कंसोलिडेशन के दायरे में कारोबार करता दिखा है। बाजार प्रतिभागी अब प्रमुख अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, जैसे कि मुद्रास्फीति (CPI) और आगामी नीतिगत बयानों की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि केंद्रीय बैंक दरों में कटौती का अगला कदम कब उठाएगा।
सोने के विपरीत, चांदी में मजबूती की वजह केवल इसका कीमती धातु (Precious Metal) होना नहीं, बल्कि इसका ‘इंडस्ट्रियल मेटल’ (Industrial Metal) के रूप में बढ़ता इस्तेमाल है। वैश्विक स्तर पर ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन, सोलर पैनल्स (Photovoltaic cells), इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) और सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक्स में चांदी की मांग लगातार रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई है।
सप्लाई साइड में खनन उत्पादन सीमित रहने और ग्रीन टेक्नोलॉजी से मजबूत खपत बने रहने के कारण चांदी को लगातार निचले स्तरों पर बाइंग सपोर्ट मिल रहा है। तकनीकी चार्ट्स पर भी चांदी $66.50 के सपोर्ट जोन को पार कर $67.30 के रेजिस्टेंस स्तर को चुनौती दे रही है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि चांदी $67.50 से $68.00 के दायरे को निर्णायक रूप से पार कर बंद होती है, तो इसमें नया ब्रेकआउट देखने को मिल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार की इस चाल का सीधा असर भारतीय वायदा बाजार (MCX) और घरेलू रिटेल सराफा बाजार पर भी देखने को मिल रहा है:
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सोना (MCX Gold): डॉलर-रुपया विनिमय दर और ग्लोबल स्तर पर यील्ड्स के दबाव के चलते भारतीय बाजार में भी सोने में सीमित दायरे में कारोबार हो रहा है। हालांकि आगामी त्योहारी और वैवाहिक सीजन की खुदरा मांग गिरावट को एक सीमित दायरे तक ही थामे रख रही है।
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चांदी (MCX Silver): अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चांदी में $67 से ऊपर की मजबूती के कारण घरेलू बाजार में भी चांदी की चमक बरकरार है। आयात लागत और औद्योगिक खरीदारों की मांग इसे मजबूत सहारा दे रही है।
बाजार जानकारों के अनुसार, मौजूदा समय में ट्रेडर्स और निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए:
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शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स: जब तक यूएस फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं होती, सोने में किसी बड़े एकतरफा उछाल के बजाय सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव (Range-bound trading) रह सकता है।
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चांदी के लिए स्तर: तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि $66.00 का स्तर चांदी के लिए तात्कालिक मजबूत सपोर्ट का काम करेगा। जब तक यह इस स्तर से ऊपर टिकी है, तब तक शॉर्ट-टर्म मोमेंटम तेजड़ियों (Bulls) के पक्ष में बना रहेगा।
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दीर्घकालिक निवेशक: लंबी अवधि के पोर्टफोलियो के लिए सोने में किसी भी तेज गिरावट को चरणबद्ध तरीके से खरीदारी (SIP / बाय ऑन डिप्स) का मौका माना जा सकता है, क्योंकि केंद्रीय बैंकों की सोने की अनवरत खरीदारी और भू-राजनीतिक जोखिम इसे लंबी अवधि में हेजिंग का सबसे सशक्त माध्यम बनाए रखते हैं।









