October 24, 2026 1:53 am

गिरावट की आंधी’ के बाद आज कैसी है शेयर बाजार की चाल? जानिए सेंसेक्स पर बड़ा अपडेट

भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ सत्रों से जारी भारी उतार-चढ़ाव और बिकवाली के बाद निवेशकों की धड़कनें तेज हो गई हैं। बाजार के जानकारों का कहना है कि वैश्विक संकेतों और घरेलू संस्थागत गतिविधियों के बीच दलाल स्ट्रीट पर सुस्ती का माहौल छाया हुआ है। निवेशकों के मन में अब यह बड़ा सवाल है कि क्या इस मंदी के दौर से उबरने के बाद बाजार में फिर से तेजी लौटेगी या सतर्क रहने की जरूरत है। इस विशेष रिपोर्ट में हम सेंसेक्स और निफ्टी के ताजा रुझानों और बाजार के रुख का विश्लेषण कर रहे हैं।

सप्ताह के आखिरी कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों ने सुस्त शुरुआत की। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स (Sensex) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 (Nifty 50) मामूली उतार-चढ़ाव के साथ कारोबार करते नजर आए। पिछले सत्रों में आई भारी बिकवाली के कारण बाजार के दिग्गजों में भी सतर्कता का रुख साफ देखा जा रहा है। हालांकि, कुछ चुनिंदा सेक्टरों में निचले स्तर पर खरीदारी लौटने से बाजार को थोड़ा बहुत संबल जरूर मिला है, लेकिन निवेशकों का भरोसा पूरी तरह बहाल होने में अभी वक्त लग सकता है।

भारतीय इक्विटी मार्केट में इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार के घटनाक्रमों का सीधा असर देखने को मिल रहा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, बॉन्ड यील्ड में लगातार हो रहे बदलाव और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने वैश्विक निवेशकों को असमंजस में डाल रखा है। विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) अपनी रणनीतियों को नए सिरे से आंक रहे हैं, जिसका असर भारतीय बाजारों मेंि बिकवाली या सीमित दायरे में कारोबार के रूप में सामने आ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ग्लोबल मार्केट से कोई मजबूत सकारात्मक संकेत नहीं मिलता, तब तक घरेलू बाजार एक सीमित दायरे में ही घूमता नजर आएगा।

तकनीकी मोर्चे पर बात करें तो बाजार के वरिष्ठ विश्लेषकों का कहना है कि निफ्टी और सेंसेक्स के लिए महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस जोन बेहद अहम हो गए हैं। निफ्टी के लिए निचले स्तरों पर मजबूत सपोर्ट जोन बना हुआ है, जबकि ऊपर की तरफ जाने पर हर उछाल पर बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है। जानकारों का सुझाव है कि खुदरा निवेशकों को इस अस्थिरता के माहौल में किसी भी तरह की जल्दबाजी में खरीदारी करने से बचना चाहिए और केवल मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ही फोकस करना चाहिए।

आने वाले हफ्तों में कॉरपोरेट आय के आंकड़े, मैक्रो-इकोनॉमिक डेटा और भू-राजनीतिक परिस्थितियां शेयर बाजार की दिशा तय करेंगी। लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह समय धैर्य रखने और अपने पोर्टफोलियो को संतुलित करने का है। यदि आप बाजार में नई पोजीशन बनाने की सोच रहे हैं, तो तकनीकी संकेतकों और एक्सपर्ट्स की सलाह को पूरी तरह ध्यान में रखें ताकि जोखिम को न्यूनतम किया जा सके।

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