September 29, 2026 6:38 pm

लॉरेंस बिश्नोई गैंग का काला जाल और शूटर्स को मिलने वाली भारी रकम

देश के आपराधिक इतिहास में पिछले कुछ वर्षों के दौरान यदि किसी गिरोह ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं और सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ाई है, तो वह कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का सिंडिकेट है। जुर्म की दुनिया में कदम रख चुके इस खतरनाक गिरोह ने वसूली, धमकी और सनसनीखेज वारदातों को अंजाम देने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों से युवा शूटर्स को अपने नेटवर्क में शामिल करना शुरू कर दिया है। हाल ही में जांच एजेंसियों और पुलिस के हाथ एक ऐसा चौंकाने वाला और सनसनीखेज सुराग लगा है, जिसने इस गैंग के काम करने के तरीके की पोल खोलकर रख दी है। पुलिस की पूछताछ और खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, लॉरेंस बिश्नोई गैंग अपने गुर्गों और शूटर्स को केवल एकमुश्त सुपारी की रकम ही नहीं देता था, बल्कि उन्हें बाकायदा प्रोफेशनल कॉर्पोरेट कर्मचारियों की तरह हर महीने मोटी सैलरी और भत्ते दिए जाते थे, ताकि वे बिना किसी वित्तीय चिंता के केवल वारदातों को अंजाम देने पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर सकें।

इस संगठित अपराध नेटवर्क की गहराई से छानबीन करने पर सामने आया कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने किसी बड़ी और सोची-समझी साजिश के तहत एक प्रमुख राजनीतिक हस्ती यानी एक पूर्व विधायक को अपना मुख्य निशाना (Target) बना रखा था। इस हाई-प्रोफाइल मर्डर को अंजाम देने के लिए गैंग के आकाओं ने अपने सबसे भरोसेमंद और पेशेवर शूटर्स को मैदान में उतारा था। इन शार्पशूटर्स को आधुनिक हथियारों की ट्रेनिंग, सुरक्षित ठिकाने (Safe Houses) और आने-जाने के लिए गाड़ियां मुहैया कराई जा रही थीं। योजना यह थी कि जैसे ही ऊपर से अंतिम आदेश मिलेगा, ये शूटर पूर्व विधायक को उनके गृह क्षेत्र या आवाजाही के दौरान मौत के घाट उतार देंगे। इस खौफनाक साजिश का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक गलियारों में खौफ पैदा करना और इलाके में अपनी दहशत का सिक्का जमाना था, लेकिन अपराधी शायद यह नहीं जानते थे कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं और सुरक्षा एजेंसियां उनकी हर एक गतिविधि पर बहुत बारीकी से नजर रखे हुए हैं।

जांच एजेंसियों के अनुसार, इस गैंग के शूटर्स को मिलने वाला वित्तीय पैकेज सुनकर अच्छे-अच्छों के होश उड़ जाएंगे। इन शार्पशूटर्स को ऑपरेशन के दौरान हर महीने नियमित रूप से 1.5 लाख रुपये (डेढ़ लाख रुपये) की फिक्स सैलरी दी जाती थी। इसके अलावा किराए के मकान का खर्च, खाने-पीने और महंगे शौक पूरा करने के लिए अलग से फंड मुहैया कराया जाता था। गिरोह के आकाओं का यह मॉडल पूरी तरह से एक कॉर्पोरेट कंपनी जैसा था, जहां काम के बदले मोटी रकम दी जाती थी ताकि कोई भी शूटर पैसों की तंगी के कारण बीच रास्ते में धोखा न दे या पुलिस के सामने गद्दारी न करे। यही वजह है कि देश के बेरोजगार और कम उम्र के युवा थोड़े से लालच और अपराध की चमक-धमक के चक्कर में इन कुख्यात गैंग्स के जाल में आसानी से फंस जाते हैं और अपने जीवन को अंधकार में धकेल देते हैं।

हालांकि अपराधियों की कितनी भी शातिर योजना क्यों न हो, एक न एक दिन कानून की गिरफ्त से बचना नामुमकिन हो जाता है। इस मामले में भी जब शूटर्स अपनी इस खौफनाक साजिश को अंजाम देने के लिए आखिरी चरण की रेकी कर रहे थे, तभी पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के मुस्तैद तंत्र को इसकी भनक लग गई। पुलिस ने जाल बिछाकर इन सभी पेशेवर शूटर्स को धर दबोचा और उनके पास से भारी मात्रा में अवैध हथियार तथा कारतूस बरामद किए। जैसे ही इन शूटर्स से कड़ाई से पूछताछ की गई, तो लॉरेंस बिश्नोई गैंग का यह पूरा का पूरा मंथली सैलरी वाला राज दुनिया के सामने आ गया। पुलिस की इस त्वरित और साहसिक कार्रवाई ने एक संभावित बड़े राजनीतिक हत्याकांड को समय रहते टाल दिया और यह साबित कर दिया कि कानून का शिकंजा अपराध और अपराधियों से हमेशा एक कदम आगे रहता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

R . 1

Advertisement Carousel

Your Opinion

Will Donald Trump's re-election as US President be beneficial for India?
error: Content is protected !!