September 30, 2026 12:39 am

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शुगर लेवल 70 से नीचे गिरने पर क्या करें, डायबिटीज रोगियों के लिए ’15-15 का अचूक नियम’ और इसके बड़े खतरे

भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली और गलत खान-पान के बीच डायबिटीज (मधुमेह) आज एक बेहद आम स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। शरीर में ब्लड ग्लूकोज का स्तर किस तरह मैनेज होता है, यह काफी हद तक हमारी रोजमर्रा की आदतों, खान-पान और शारीरिक गतिविधियों पर निर्भर करता है। देश के जाने-माने एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. अंबरीश मित्थल (चेयरमैन, एंडोक्राइनोलॉजी एंड डायबिटीज, मैक्स हेल्थकेयर, दिल्ली) के अनुसार, केवल ब्लड शुगर को कम करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे एक निश्चित और सुरक्षित सीमा के भीतर नियंत्रित बनाए रखना सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।

ब्लड शुगर का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाना यानी ‘हाइपरग्लाइसीमिया’ (Hyperglycemia) या फिर बहुत अधिक कम हो जाना यानी ‘हाइपोग्लाइसीमिया’ (Hypoglycemia), दोनों ही स्थितियां डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक और जानलेवा साबित हो सकती हैं। आमतौर पर जब किसी व्यक्ति का ब्लड शुगर स्तर 70 mg/dL या उससे नीचे चला जाता है, तो उसे हाइपोग्लाइसीमिया की स्थिति कहा जाता है। इसके पीछे कई मुख्य कारण हो सकते हैं, जैसे जरूरत से ज्यादा इंसुलिन की खुराक ले लेना, दो भोजन के बीच बहुत लंबा अंतराल होना, या फिर सामान्य से अधिक कठिन व्यायाम कर लेना।

यदि किसी डायबिटीज के मरीज को अचानक घबराहट, अत्यधिक बेचैनी, ठंडा पसीना आना या शरीर में कंपकंपी महसूस हो और जांच करने पर ब्लड शुगर 70 mg/dL से कम मिले, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। ऐसी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए डॉक्टरों द्वारा ’15-15 का नियम’ (Rule of 15-15) अपनाने की सलाह दी जाती है:

  • पहला कदम (15 ग्राम कार्ब्स): शुगर लेवल कम होने पर तुरंत 15 ग्राम तेजी से पचने वाले कार्बोहाइड्रेट का सेवन करें। इसके लिए आप 100 से 150 मिलीलीटर कोई नियमित मीठा पेय (जूस या शुगर सिरप) या ग्लूकोज की गोली ले सकते हैं।

  • दूसरा कदम (15 मिनट इंतजार): कार्बोहाइड्रेट लेने के बाद ठीक 15 मिनट तक शांत बैठें और दोबारा अपने ब्लड शुगर की जांच करें।

  • तीसरा कदम: यदि 15 मिनट बाद भी आपका शुगर लेवल 70 mg/dL से कम बना हुआ है, तो 15 ग्राम कार्बोहाइड्रेट की एक खुराक फिर से लें। यह प्रक्रिया तब तक दोहराएं जब तक शुगर सामान्य स्तर पर न आ जाए।

इसके अलावा, यदि आप व्यायाम (Exercise) करने जा रहे हैं और उससे पहले आपका शुगर स्तर कम है, तो वर्कआउट से पहले एक छोटा फल या एक कप दूध जैसी हल्की चीज जरूर ले लें। व्यायाम के तुरंत बाद भोजन करने से बचें, खासकर वे लोग जो इंसुलिन लेते हैं।

कई बार दवा या इंसुलिन की निर्धारित खुराक समय पर न लेने, अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट का सेवन करने, अत्यधिक मानसिक तनाव में रहने या पर्याप्त नींद न मिलने के कारण ब्लड शुगर अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। यदि आपका ब्लड शुगर स्तर 250 mg/dL या उससे अधिक पहुंच जाए और साथ ही बहुत ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, उल्टी होना, सांस लेने में तकलीफ या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण महसूस हों, तो बिना देर किए तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही अपनी दवाइयों या इंसुलिन की मात्रा में बदलाव करना सुरक्षित होता है।

इस स्थिति से बचने के लिए अपने दैनिक आहार में अधिक मात्रा में फाइबर और पर्याप्त प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों को शामिल करें। तनाव और खराब जीवनशैली को सुधारकर भी शुगर के स्तर को नियंत्रित रखा जा सकता है।

डायबिटीज को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए केवल दवाइयां खा लेना ही काफी नहीं है, बल्कि इसके लिए एक अनुशासनबद्ध दिनचर्या की आवश्यकता होती है। नीचे दिए गए बिंदुओं पर विशेष ध्यान दें:

  • खान-पान में सतर्कता: भोजन की मात्रा, गुणवत्ता और दो मील्स के बीच का अंतराल आपके ब्लड ग्लूकोज को सीधा प्रभावित करता है। रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट से बचें और साबुत अनाज, कांप्लेक्स कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और हेल्दी फैट्स को अपने भोजन का हिस्सा बनाएं।

  • दवाइयों और इंसुलिन का सही इस्तेमाल: बिना ब्लड शुगर की रीडिंग देखे खुद से इंसुलिन की डोज में बदलाव न करें। इंसुलिन लगाने की सही तकनीक, उसकी सही स्टोरेज और इंजेक्शन की जगह बदलते रहना बेहद जरूरी है।

  • तनाव और नींद का प्रबंधन: अत्यधिक मानसिक तनाव के कारण शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे हॉर्मोन बढ़ते हैं, जो ब्लड शुगर को अचानक बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा, रोजाना 7-8 घंटे की पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद लेना भी डायबिटीज मैनेजमेंट का एक अहम हिस्सा है।

  • नियमित ब्लड शुगर मॉनिटरिंग: केवल एक-दो बार रीडिंग देखने के बजाय अपने पूरे दिन के पैटर्न को समझें। यह देखें कि किस समय शुगर बढ़ती है और किस गतिविधि का उस पर क्या असर पड़ता है। नियमित निगरानी आपको सही समय पर सही कदम उठाने का अवसर देती है।

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