March 13, 2026 4:27 pm

चित्रकूट जिले के छोटे से गांव रैपुरा में देखने को मिली एक अनोखी और प्रेरणादायक पहल

चित्रकूट  l जहां अब तक शिक्षा और तकनीक की बातें सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित थीं, वहीं अब यह गांव भी एक नई मिसाल कायम कर रहा है। गांव के प्रधान जगदीश पटेल की अगुवाई में यहां एक मुफ्त डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना की गई है, जो ग्रामीण भारत में शिक्षा की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने की कोशिश है।
बच्चों के लिए डिजिटल लाइब्रेरी का सपना हुआ साकार

गांव के प्रधान जगदीश पटेल ने इस डिजिटल लाइब्रेरी की नींव रखी और इसके निर्माण से लेकर संचालन तक की पूरी जिम्मेदारी खुद संभाली। यह केवल एक साधारण लाइब्रेरी नहीं है, बल्कि यहां छात्रों के लिए डिजिटल लर्निंग की हर वह सुविधा मौजूद है जो शहरों में बड़ी फीस देकर मिलती है,लाइब्रेरी में बच्चों के लिए जरूरी पाठ्यक्रम की किताबों के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए गाइड्स, सामान्य ज्ञान, कंप्यूटर शिक्षा और करंट अफेयर्स की डिजिटल सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा फ्री वाई-फाई, एसी युक्त पढ़ाई कक्ष, और बैठने के लिए सुव्यवस्थित इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है।

हर बच्चे को मिले समान अवसर

सबसे खास बात यह है कि यह डिजिटल लाइब्रेरी पूरी तरह नि:शुल्क है। गांव का कोई भी बच्चा चाहे वह किसी भी वर्ग या आर्थिक स्थिति से आता हो, यहां आकर पढ़ाई कर सकता है। इस कदम से उन बच्चों को भी डिजिटल और आधुनिक शिक्षा से जुड़ने का मौका मिल रहा है, जिनके लिए अब तक यह सिर्फ एक सपना था।

गांव के अधिकारी और पूर्व छात्र भी दे रहे योगदान

ग्राम प्रधान जगदीश पटेल ने बताया कि इस पहल में गांव के कई आईएएस, पीसीएस और अन्य सरकारी अधिकारियों ने भी योगदान दिया है। उन्होंने अपनी पुरानी किताबें दान की हैं, जिससे लाइब्रेरी की सामग्री समृद्ध हुई है। साथ ही गांव के वे लोग जो अब शहरों में नौकरी कर रहे हैं, उन्होंने भी स्वेच्छा से आर्थिक सहायता दी है ताकि इस पहल को और आगे बढ़ाया जा सके।

गांव वालों की आंखों में उम्मीद

पेट्रोल न्यूज़ की टीम जब रैपुरा गांव की डिजिटल लाइब्रेरी पहुंची तो वहां का नज़ारा देख हर कोई हैरान रह गया। बच्चे उत्साह से पढ़ाई में जुटे थे, और उनके अभिभावकों की आंखों में अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की चमक साफ दिखाई दे रही थी। एक अभिभावक ने कहा हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारे गांव में भी ऐसी आधुनिक लाइब्रेरी होगी। आज हमारे बच्चे गांव में रहकर भी वही पढ़ाई कर रहे हैं जो बड़े शहरों के बच्चे करते हैं।

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