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मऊगंज में अफसरशाही का दुस्साहस! चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को बचाने में दांव पर सरकार की साख, भ्रष्टाचार के आरोपों से हिला जिला प्रशासन
मध्यप्रदेश में अब तक यह देखा जाता रहा है कि भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे मंत्री या विधायक को बचाने के लिए सरकारें पूरी ताकत झोंक देती हैं, लेकिन मऊगंज में हालात इससे भी आगे निकलते दिखाई दे रहे हैं। यहां एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पर लगे गंभीर रिश्वतखोरी के आरोपों को दबाने और उसे बचाने के लिए अफसरों ने जिस तरह से मोर्चा संभाला है, उसने पूरे सिस्टम की नीयत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि अफसरों ने न केवल आरोपी कर्मचारी को संरक्षण दिया, बल्कि सरकार की प्रतिष्ठा को भी दांव पर लगाने से पीछे नहीं हटे।
लगभग एक सप्ताह पहले कलेक्टर मऊगंज के निज सचिव, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पंकज श्रीवास्तव को कलेक्ट्रेट से हटाने की मांग जोर पकड़ने लगी थी। आरोप था कि वह खुलेआम रिश्वतखोरी में लिप्त है और खुद को प्रशासन से ऊपर समझता है। लेकिन प्रशासन की प्रतिक्रिया कार्रवाई की बजाय आंदोलन को कुचलने की रही। अनशन पर बैठे लोगों से टेंट की सामग्री जब्त कर ली गई, प्रदर्शनकारियों को खुले आसमान के नीचे जमीन पर बैठने के लिए मजबूर किया गया, और आवाज उठाने वालों पर दबाव बनाने की पूरी कोशिश की गई।
अगस्त क्रांति मंच ने साफ आरोप लगाया कि पंकज श्रीवास्तव अकेला नहीं है, बल्कि उसके साथ भ्रष्टाचारियों का एक संगठित गिरोह खड़ा है, जिसे प्रशासनिक संरक्षण हासिल है। आंदोलनकारियों का कहना है कि एसडीएम और पुलिस बल के साथ मिलकर जबरन गिरफ्तारी कर आंदोलन को कुचलने की नापाक कोशिश की गई, ताकि भ्रष्टाचार के आरोप दबाए जा सकें और सच्चाई बाहर न आए।
यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है जब मऊगंज जिले में अपर कलेक्टर को रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद प्रशासन पहले ही सवालों के घेरे में है। इसके बावजूद अब एक बार फिर मध्यप्रदेश शासन लिखी गाड़ी, हूटर और विशेष सुविधाओं के साथ कलेक्ट्रेट में आने-जाने वाला एक निज सहायक चर्चा में है, जो व्यवहार और रुतबे में कलेक्टर से भी बड़ा दिखाई देता है। उसी पर अब रिश्वत लेने के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिले में पहले से ही भ्रष्टाचार के मामले उजागर हो चुके हैं, तब भी एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई से प्रशासन क्यों कतरा रहा है। क्या अफसरों का डर इतना गहरा है या फिर भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी मजबूत हो चुकी हैं कि सिस्टम खुद ही अपने लोगों को बचाने में जुट गया है।
मऊगंज में उठती यह आवाज अब सिर्फ एक कर्मचारी तक सीमित नहीं रह गई है। यह पूरे प्रशासनिक तंत्र, उसकी जवाबदेही और सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ कथित जीरो टॉलरेंस नीति पर सीधा हमला बन चुकी है। अगर समय रहते निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला न केवल मऊगंज बल्कि पूरे प्रदेश में सरकार की छवि को गहरा नुकसान पहुंचा सकता है।









