Rewa,MP :
रीवा। श्याम शाह मेडिकल कॉलेज, रीवा में उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया जब बीएससी नर्सिंग की 80 छात्राओं ने ENT विभाग के डॉक्टर अशरफ पर शारीरिक हाव-भाव और व्यवहार के जरिए मानसिक प्रताड़ना और अशोभनीय बर्ताव के आरोप लगाए। छात्राओं ने मंगलवार को डीन कार्यालय के बाहर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के साथ मिलकर प्रदर्शन किया और डॉक्टर को निलंबित कर निष्पक्ष जांच की मांग की।
👩⚕️ छात्राओं ने बताया – असहज व्यवहार, मानसिक दबाव
द्वितीय और तृतीय वर्ष की छात्राओं ने शिकायत में कहा कि डॉ. अशरफ के साथ ड्यूटी करना भय और तनाव से भरा होता है। ऑपरेशन थिएटर में ड्यूटी के दौरान उनका व्यवहार बेहद असहज और अपमानजनक होता है, जिससे छात्राओं को मानसिक रूप से काफी प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। छात्राओं ने डॉक्टर के हाव-भाव और इशारों को अनुचित बताया और कहा कि वे अब उनके अधीन कार्य नहीं करना चाहतीं।
🏢 डीन को सौंपा गया ज्ञापन, ड्यूटी से हटाई गईं छात्राएं
छात्राओं ने अपनी शिकायत नर्सिंग कॉलेज के प्राचार्य के माध्यम से मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल को सौंपी। डीन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत नेत्र रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. शशि जैन की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दिया है। समिति को एक सप्ताह में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
डीन ने प्राथमिक सुरक्षा कदम उठाते हुए नर्सिंग छात्राओं की ENT विभाग में ड्यूटी तत्काल प्रभाव से बंद कर दी है, जिससे उन्हें फिलहाल डॉ. अशरफ के साथ काम न करना पड़े।
ABVP ने की डॉक्टर के इस्तीफे की मांग
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने इस प्रकरण को लेकर कॉलेज प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए डॉ. अशरफ को निलंबित कर उनके इस्तीफे की मांग की है। संगठन का कहना है कि छात्राओं की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता, और जब तक डॉक्टर को पद से हटाया नहीं जाता, आंदोलन जारी रहेगा।
सवाल उठे – मेडिकल संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा कितनी मजबूत?
इस घटना ने मेडिकल शिक्षण संस्थानों में महिला छात्रों की सुरक्षा और शिकायत तंत्र की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या छात्राएं बिना डर के शिकायत दर्ज करा सकती हैं? क्या ऐसे मामलों में तेजी से न्याय मिलता है? यह मामला अगली कुछ कार्यवाहियों पर निर्भर करेगा, जहां यह साफ होगा कि कॉलेज प्रशासन छात्राओं के हित में कठोर और निष्पक्ष कार्रवाई करता है या नहीं।
रीवा मेडिकल कॉलेज की यह घटना सिर्फ एक डॉक्टर की जवाबदेही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनशीलता और जवाबदेही की परीक्षा है। छात्राओं ने जिस हिम्मत से आवाज उठाई है, अब बारी प्रशासन की है कि वह इस मामले को दबाने की बजाय उचित कार्रवाई और न्याय सुनिश्चित करे।









