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मध्यप्रदेश सरकार ने गेहूं खरीदी में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। इस बार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदने का जिम्मा महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) और ग्राम संगठनों को सौंपा जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य गांवों की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा और महिलाओं को रोजगार के नए अवसर प्रदान करेगा।
कौन से महिला समूह आवेदन कर सकते हैं?
केवल वे महिला स्वयं सहायता समूह इस योजना के तहत भाग ले सकते हैं जो राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत 1 जनवरी 2025 से पहले पंजीकृत हुए हों।
इसके अलावा, कुछ अन्य शर्तें भी होंगी:
✔ बैंक खाते में कम से कम ₹2 लाख की जमा राशि हो।
✔ पिछले एक साल से नियमित बैठकें हो रही हों।
✔ समूह का पूरा प्रबंधन महिलाओं के हाथ में हो।
✔ पहले किसी भी सरकारी योजना में गड़बड़ी का रिकॉर्ड न हो।
किन दस्तावेजों की होगी जरूरत?
✔ समूह का पंजीकरण प्रमाण पत्र।
✔ पिछले 6 महीनों का बैंक स्टेटमेंट।
✔ पिछले 3 महीनों की बैठकों का रिकॉर्ड।
✔ बैंक खाते में न्यूनतम राशि होने का प्रमाण।
महिला समूहों को क्या लाभ मिलेगा?
✔ गेहूं खरीदी में शामिल महिला समूहों को कंप्यूटर ऑपरेटर का मानदेय मिलेगा।
✔ सरकार द्वारा निर्धारित कमीशन और अन्य खर्चे दिए जाएंगे।
✔ महिला समूहों को सरकारी योजनाओं में प्राथमिकता दी जाएगी।
महिलाओं के लिए नए अवसर
इस योजना के जरिए सरकार ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा मंच दे रही है। यह कदम न केवल महिला उद्यमिता को बढ़ावा देगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी मजबूती लाएगा।