Mauganj News In Hindi:

मऊगंज। जिले में एक बार फिर पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में है।
थाना मऊगंज प्रभारी संदीप भारती की भूमिका एक मारपीट प्रकरण में संदिग्ध बताई जा रही है।
मामला पन्नी निवासी एक युवक से जुड़ा है, जिसके साथ कुछ दिन पहले पन्नी बाजार में मारपीट की घटना हुई थी।
जानकारी के अनुसार, युवक बाजार में अंडा खाने गया था, तभी कुछ लोगों ने उसके साथ मारपीट की।
पीड़ित युवक जब न्याय की उम्मीद में मऊगंज थाने रिपोर्ट दर्ज कराने पहुँचा,
तो आरोप है कि थाना प्रभारी ने रिपोर्ट दर्ज करने में टालमटोल की और फरियादी को थाने में ही कई दिनों तक बिठाए रखा।
सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान एफआरवी (FRV) के दो चालकों द्वारा फरियादी के साथ जमकर मारपीट की गई।
मामले की जानकारी सामने आने पर मऊगंज पुलिस अधीक्षक दिलीप सोनी ने दोनों चालकों को सेवा से पृथक करने के निर्देश देते हुए पत्र जारी किया है।
हालांकि, बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि मऊगंज थाना प्रभारी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
बताया जा रहा है कि फरियादी को 23 अक्टूबर को थाने लाया गया था और 26 से 27 अक्टूबर के बीच छोड़ा गया।
इतने लंबे समय तक एक फरियादी को थाने में रखना खुद पुलिस नियमों का उल्लंघन है।
इस पर पुलिस अधीक्षक ने यह तक जांच नहीं की कि आखिर
फरियादी को आरोपी की तरह थाने में क्यों रखा गया?
इस संबंध में जब थाना प्रभारी मऊगंज का पक्ष जानने के लिए पेट्रोल न्यूज़ द्वारा फोन पर उनसे संपर्क साधने की कोशिश की तो कॉल रिसीव नहीं हुआ।
सूत्रों का कहना है कि थाना प्रभारी संदीप भारती ने खुद को बचाने के लिए एफआरवी चालकों पर एफआईआर दर्ज कर दी,
ताकि मामला शांत हो जाए, लेकिन पूरे घटनाक्रम में उनकी भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहला मामला नहीं है, जब संदीप भारती विवादों में घिरे हों।
पूर्व में भी उन पर पैसों के लेनदेन और अनुचित व्यवहार के आरोप लग चुके हैं।
गौरतलब है कि जब वे थाना शाहपुर में पदस्थ थे, उस समय गडरा कांड जैसी बड़ी घटना हुई थी —
जिसे लेकर ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय पर कार्रवाई होती और संदीप भारती की लापरवाही ना होती तो शायद वह गडरा कांड टल सकता था।
फिलहाल इस पूरे मामले ने मऊगंज पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
जनता अब पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग कर रही है, ताकि थाने में बैठे फरियादियों को न्याय मिले, न कि प्रताड़ना।









