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भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने चिकित्सा शिक्षा में हिंदी माध्यम को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। एमबीबीएस और बीडीएस की पढ़ाई हिंदी में करने वाले छात्रों को अब न केवल परीक्षा शुल्क में 50% की छूट मिलेगी, बल्कि मेरिट लाने पर नकद पुरस्कार से भी नवाजा जाएगा।
यह घोषणा प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने की। उन्होंने बताया कि यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सर्वसमावेशी शिक्षा विजन और गृह मंत्री अमित शाह के मातृभाषा में शिक्षा के संकल्प से प्रेरित है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने एमबीबीएस की पढ़ाई हिंदी माध्यम में शुरू की है।
क्या-क्या मिलेगा हिंदी माध्यम के छात्रों को?
🔹 परीक्षा शुल्क में 50% की छूट
🔹 हिंदी टॉपर्स को मिलेगा सम्मान और नकद पुरस्कार:
- पूरा कोर्स स्तर पर टॉपर्स को इनाम:
- प्रथम स्थान: ₹2 लाख
- द्वितीय स्थान: ₹1.5 लाख
- तृतीय स्थान: ₹1 लाख
- चतुर्थ स्थान: ₹50 हजार
- हर प्रोफेशन (वर्ष) में टॉपर्स को इनाम:
- प्रथम: ₹1 लाख
- द्वितीय: ₹75 हजार
- तृतीय: ₹50 हजार
- चतुर्थ: ₹25 हजार
सरकार की तैयारी पूरी: विश्वविद्यालयों को दिए निर्देश
प्रदेश के मेडिकल एवं डेंटल कॉलेजों को निर्देश दिया गया है कि हिंदी में परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को हर संभव सुविधा दी जाए। कॉलेज ऐसी छात्रों की सूची विश्वविद्यालय को भेजेंगे। हिंदी परीक्षकों की नियुक्ति, विशेष कक्षाएं, और समाधान सत्रों का भी आयोजन किया जाएगा।
शिक्षकों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
हिंदी माध्यम को और अधिक मजबूत बनाने के लिए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे छात्रों से सहज संवाद कर सकें और गुणवत्ता से समझा सकें।
हिंदी माध्यम को मिला सम्मान
उपमुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि यह सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों का सम्मान और स्वाभिमान है। यह योजना खासतौर पर ग्रामीण और हिंदी भाषी क्षेत्रों के छात्रों को सशक्त मंच देने के लिए शुरू की गई है।
यह पहल न केवल मातृभाषा में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देती है, बल्कि चिकित्सा जैसे तकनीकी क्षेत्र में भी हिंदी को मुख्यधारा में लाकर विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ाती है।








