MP:श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में घमासान: डॉक्टरों की लड़ाई से बिखरा प्रसूति विभाग, निजी अस्पतालों में सेवाएं दे रहे चिकित्सकों पर उठे सवाल
रीवा। श्याम शाह मेडिकल कॉलेज से संबद्ध संजय गांधी अस्पताल का प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग (Gynecology Department) इस वक्त विवादों के भंवर में फंसा हुआ है। विभाग के अंदर डॉक्टरों के बीच गुटबाजी, इस्तीफों की बाढ़ और निजी अस्पतालों में डॉक्टरों की संलिप्तता ने पूरे चिकित्सा तंत्र को हिला कर रख दिया है।
मामला उस समय और गंभीर हो गया जब डॉ बीनू सिंह, विभाग की एचओडी (HOD), पर कई आरोप लगे। मिली जानकारी के अनुसार वे सरकारी सेवा के साथ-साथ एक निजी अस्पताल में भी सक्रिय रूप से कार्यरत हैं, जहाँ उनकी भागीदारी (Partnership) भी बताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, यह निजी अस्पताल शहर के बीचोंबीच संचालित है, जहां डॉ बीनू सिंह मरीजों को देखने जाती हैं। यह न केवल सरकारी नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी सेवा में रहते हुए निजी प्रैक्टिस करने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई भी संभव है।
इधर, विभाग में कार्यरत डॉ पूजा गंगवार ने एचओडी पर मानसिक प्रताड़ना (Mental Harassment) का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया है। डॉ बीनू सिंह ने इन आरोपों को निराधार बताया है और उल्टे डॉ पूजा पर ही निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि डॉ पूजा ने चार साल की नौकरी में 228 दिन संतान पालक अवकाश और 180 दिन मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) लिया।
एचओडी के मुताबिक, हाल ही में एक मातृ मृत्यु के मामले में डॉ पूजा की लापरवाही सामने आई थी, जिसके बाद उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया था। इसी के बाद उन्होंने डीन को इस्तीफा सौंप दिया।
वहीं, सूत्रों के अनुसार डॉ पूजा गंगवार भी एक निजी अस्पताल में सेवा देती हैं।जो उनका खुद का अस्पताल बताया जा रहा है। यानी विभाग की दो प्रमुख डॉक्टर — एचओडी और शिकायतकर्ता — दोनों ही निजी संस्थानों से जुड़ी रही हैं, जिससे सरकारी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विभाग में यह विवाद तब और बढ़ गया जब सात डॉक्टरों ने मिलकर डिप्टी सीएम से शिकायत की। इन डॉक्टरों ने एचओडी के खिलाफ 11 बिंदुओं पर आरोप लगाए, जिनमें पक्षपात, अनुचित व्यवहार और अव्यवस्थित कार्य प्रणाली जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं।
एचओडी डॉ बीनू सिंह ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उन्होंने सभी बिंदुओं पर जवाब डीन डॉ सुनील अग्रवाल को दे दिया है और मांगा है कि शिकायतकर्ताओं से प्रमाण प्रस्तुत किए जाएं।
वहीं, डीन डॉ सुनील अग्रवाल की चुप्पी और कार्रवाई न करने की नीति ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। डॉक्टरों का आरोप है कि डीन ने समय रहते विभागीय विवादों को सुलझाने का प्रयास नहीं किया, जिससे विभाग पूरी तरह से बिखर गया है।
फिलहाल विभाग में हालात इतने गंभीर हैं कि कई डॉक्टर इस्तीफे की तैयारी में हैं, दो पहले ही नौकरी छोड़ चुके हैं, और मरीजों की देखभाल पीजी छात्रों के भरोसे चल रही है।
जानकारी के अनुसार, मातृ मृत्यु मामले की आंतरिक जांच में डॉक्टरों की लापरवाही का जिक्र स्पष्ट रूप से सामने आया, जिससे यह साबित होता है कि विभागीय कुप्रबंधन की वजह से मरीजों की जान जा रही है।
विभाग की गिरती स्थिति, निजी अस्पतालों में डॉक्टरों की संलिप्तता और प्रशासन की उदासीनता ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर मरीजों की जान की कीमत पर ये ‘निजी हित’ कब तक जारी रहेंगे।
— रीवा ब्यूरो रिपोर्ट









