MP News: 2011 के बाद बड़ा बदलाव
भोपाल। मध्य प्रदेश में पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में 13 साल बाद बड़ा बदलाव किया गया है। अब नए भर्ती होने वाले आरक्षकों और उप निरीक्षकों को ट्रांसजेंडर, वरिष्ठ नागरिक, महिलाएं, बच्चे और दिव्यांगजन के अधिकारों से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी जाएगी। साथ ही उन्हें इन वर्गों के प्रति संवेदनशीलता के साथ व्यवहार करना भी सिखाया जाएगा।
पुलिस मुख्यालय ने यह निर्णय बदलते सामाजिक ताने-बाने और अपराध के आधुनिक तरीकों को देखते हुए लिया है। साल 2024 में चयनित 4500 आरक्षकों का प्रशिक्षण जल्द शुरू होने वाला है और यहीं से यह नया पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा।
2011 के बाद पहला बड़ा बदलाव
प्रदेश में 2011 के बाद पहली बार प्रशिक्षण पाठ्यक्रम को अपडेट किया गया है। अब इसमें केवल परंपरागत कानून व्यवस्था या फिजिकल ट्रेनिंग ही नहीं, बल्कि साइबर क्राइम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक, सोशल मीडिया के ज़रिए हो रहे अपराध और डिजिटल साक्ष्य एकत्रित करने जैसे विषय भी शामिल किए गए हैं।
ट्रांसजेंडर और दिव्यांगजनों को लेकर विशेष पाठ
एडीजी प्रशिक्षण राजाबाबू सिंह के मुताबिक, पुलिसकर्मियों को अब ट्रांसजेंडरों से जुड़े अपराधों और उनकी पहचान के प्रति सम्मानजनक और संवेदनशील रवैया अपनाने की ट्रेनिंग दी जाएगी।
इसी तरह दिव्यांगजनों से जुड़े अपराधों और उनके अधिकारों पर भी विस्तृत जानकारी दी जाएगी, जिससे विवेचना और पूछताछ के समय किसी तरह का भेदभाव न हो।
महिला और बाल अपराधों पर रहेगा खास फोकस
प्रदेश में महिला और बाल अपराधों की दर को देखते हुए पुलिसकर्मियों को इनके अधिकार, पुलिस की सीमाएं, और सही विवेचना के तरीके सिखाए जाएंगे। उन्हें यह भी बताया जाएगा कि अपराधों में साक्ष्य कैसे जुटाएं जिससे सजा की दर को बेहतर किया जा सके।
नौ महीने का विशेष प्रशिक्षण
प्रदेश के 7 पुलिस प्रशिक्षण स्कूलों में नए आरक्षकों को 9 माह का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस दौरान तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी ट्रेनिंग भी दी जाएगी ताकि कानून के साथ-साथ सामाजिक न्याय भी सुनिश्चित हो सके।
यह बदलाव न सिर्फ पुलिसिंग की सोच को आधुनिक बनाएगा, बल्कि पुलिस और समाज के बीच सकारात्मक संवाद और विश्वास भी मजबूत करेगा।








