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भोपाल। मध्यप्रदेश में दो वर्ष पूर्व गठित किए गए तीन नए जिलों मऊगंज, मैहर और पांढुर्णा को अब आखिरकार चुनाव आयोग की औपचारिक मान्यता मिल गई है।इस निर्णय के साथ ही इन जिलों के कलेक्टर अब अपने-अपने क्षेत्र की विधानसभा सीटों के लिए अपीलीय अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे।
इससे पहले तक इन नए जिलों को निर्वाचन अधिकार नहीं मिले थे, जिससे चुनाव से जुड़ी समस्त प्रशासनि गतिविधियां रीवा, सतना और छिंदवाड़ा के कलेक्टरों की निगरानी में संचालित हो रही थीं।
चुनाव आयोग के सचिव सुमन कुमार दास द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार:
मऊगंज के कलेक्टर अब मऊगंज और देवतालाब विधानसभा क्षेत्रों के लिए अपीलीय अधिकारी होंगे।
पांढुर्णा कलेक्टर को पांढुर्णा और सौंसर विधानसभा क्षेत्र का प्रभार सौंपा गया है।
वहीं, मैहर के कलेक्टर अब मैहर और अमरपाटन सीटों के लिए अपीलीय अधिकारी रहेंगे।
पुराने जिलों के कलेक्टरों से वापस लिए गए अधिकार-:
इसके साथ ही, जिन पुराने जिलों की सीमाओं से ये तीन नए जिले बने हैं, उनके कलेक्टरों से अपील अधिकार वापस ले लिए गए हैं।
अब रीवा कलेक्टर को मऊगंज और देवतालाब से
सतना कलेक्टर को मैहर और अमरपाटन से
और छिंदवाड़ा कलेक्टर को पांढुर्णा और सौंसर से अपीलीय अधिकारी की जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया है।
पहले नहीं थे निर्वाचन अधिकार-:
हालांकि विधानसभा चुनाव से पहले ही इन नए जिलों की घोषणा हो चुकी थी और कलेक्टरों की नियुक्ति भी हो गई थी लेकिन चुनाव आयोग की अनुमति के अभावमें उन्हें निर्वाचन संबंधी अधिकार नहीं दिए गए थे।
परिणामस्वरूप, चुनावी कार्यवाहियां होने के बावजूद वे केवल रिपोर्टिंग एजेंसी बनकर रह गए थे और हर निर्णय रीवा, सतना व छिंदवाड़ा के जिला निर्वाचन अधिकारियों से अनुमोदन के बाद ही लिया जाता था। अब आयोग की मान्यता मिलने के बाद ये जिले स्वतंत्र निर्वाचन प्रशासन के अंतर्गत आ गए हैं और आगामी चुनावों में इनका संचालन और निर्णय स्वयं के स्तर पर हो सकेगा।









