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प्रमोशन पर फिर संकट!
भोपाल/जबलपुर।
मध्य प्रदेश के शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों के लिए वर्षों से अटकी पड़ी पदोन्नति की उम्मीदें एक बार फिर अदालत की देहरी पर अटक गई हैं। नौ साल से ठंडी फाइलों में बंद प्रमोशन की प्रक्रिया को सरकार ने नए नियमों के जरिए गति देने की कोशिश की थी, लेकिन सामान्य वर्ग के कर्मचारियों द्वारा दायर याचिका के चलते मामला अब फिर उलझ गया है।
12 अगस्त को हाई कोर्ट जबलपुर में इस बहुप्रतीक्षित मुद्दे पर अहम सुनवाई होनी है, जो तय करेगी कि प्रदेश के हजारों अधिकारी-कर्मचारी अपनी बहुप्रतीक्षित पदोन्नति का लाभ ले सकेंगे या नहीं।
🔹 क्या है मामला?
दरअसल, वर्ष 2002 में लागू पदोन्नति नियमों को मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने 2016 में निरस्त कर दिया था। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि इन नियमों के तहत दी गई पदोन्नतियों को भी वापस लिया जाए — यानी आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को पदावनत किया जाए।
राज्य सरकार ने यह आदेश सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को ‘यथास्थिति बनाए रखने’ के निर्देश दिए और तब से लेकर अब तक प्रदेश में प्रमोशन की प्रक्रिया ठप पड़ी है।
🔹 2025 में आए नए नियम, फिर भी नहीं सुलझा मामला
सरकार ने जून 2025 में नए प्रमोशन नियम अधिसूचित कर दिए और इन्हें लागू करने का दावा भी किया। लेकिन न तो सुप्रीम कोर्ट में दायर पुरानी याचिका वापस ली गई, न ही पुराने आदेशों के अनुसार कर्मचारियों को पदावनत किया गया।
इस पर हाई कोर्ट ने सरकार से कड़ा सवाल पूछा है – “जब आपने नए नियम बना दिए, तो फिर सुप्रीम कोर्ट से दायर याचिका वापस क्यों नहीं ली?”
अब इस मामले में एक नई याचिका दायर कर सामान्य वर्ग के कर्मचारियों ने नए नियमों को भी चुनौती दी है, जिससे मामला और पेचीदा हो गया है।
🔹 सरकार की दुविधा और कर्मचारियों की उम्मीदें
सरकार सूत्रों का कहना है कि इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ताओं से राय ली जा रही है। वहीं सामान्य, पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार को अब स्पष्ट रुख अपनाना होगा।
सरकार कोर्ट में यह पक्ष रखने की तैयारी कर रही है कि प्रमोशन ‘सशर्त’ दिए जाएंगे, यानी सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन। इस शर्त को नियमों में भी शामिल किया गया है।
🔹 क्यों है यह मामला संवेदनशील?
अगर सरकार सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस लेती है, तो उसे हाई कोर्ट के 2016 के आदेश का पालन करना होगा – यानी कई पदोन्नत कर्मचारियों को पदावनत करना पड़ सकता है।
वहीं अगर याचिका जारी रहती है, तो नए नियमों पर भी सवाल उठते रहेंगे। इस वजह से हजारों कर्मचारियों का भविष्य फिलहाल न्यायालय की एक सुनवाई पर टिका हुआ है।
🔹 अब क्या होगा?
12 अगस्त 2025 को जबलपुर हाई कोर्ट में प्रस्तावित सुनवाई से यह तय होगा कि मध्य प्रदेश में प्रमोशन का रास्ता खुलेगा या मामला और जटिल हो जाएगा।
यह एक ऐसा फैसला होगा, जिस पर न सिर्फ अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नति बल्कि प्रशासनिक स्थिरता और कार्यक्षमता भी निर्भर करेगी।
🟡 अब देखना है कि सरकार संवैधानिक जटिलताओं के इस जाल से रास्ता निकाल पाती है या नहीं। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट की याचिका, दूसरी तरफ हाई कोर्ट की पूछताछ – और बीच में हैं हज़ारों कर्मचारी, जो वर्षों से सिर्फ एक आदेश का इंतज़ार कर रहे हैं!
रिपोर्ट – पेट्रोल न्यूज़ ब्यूरो |









