September 23, 2026 8:46 am

National Film Awards Cash Prize: सिर्फ मेडल या लाखों का इनाम? जानिए नेशनल अवॉर्ड जीतने पर किसे मिलती है कितनी रकम

भारतीय सिनेमा का सबसे प्रतिष्ठित मंच जब सजता है, तो देश भर की निगाहें राष्ट्रपति भवन और विज्ञान भवन में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों पर टिक जाती हैं। बड़े पर्दे पर अभिनय का जादू बिखेरने वाले कलाकारों, पर्दे के पीछे कहानी गढ़ने वाले निर्देशकों और तकनीकी जान फूंकने वाले तकनीशियनों के लिए यह पुरस्कार सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। जब किसी अभिनेता या निर्माता के हाथ में राष्ट्रपति द्वारा ‘स्वर्ण कमल’ या ‘रजत कमल’ मेडल थमाया जाता है, तो हर दर्शक के जेहन में यह सवाल जरूर कौंधता है कि इस मान-सम्मान और चमचमाती ट्रॉफी के साथ सरकार विजेताओं को बैंक खाते में कितना पैसा भेजती है।

सिनेमा जगत के जानकारों और दर्शकों के बीच अक्सर यह धारणा रहती है कि इन प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कारों में सिर्फ मेडल और प्रशस्ति पत्र ही दिया जाता है। हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। भारत सरकार का सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय हर साल विजेताओं को एक तयशुदा नकद पुरस्कार भी देता है। हाल के वर्षों में सरकार ने दशकों पुराने नियमों और पुरस्कार राशियों में संशोधन कर इन्हें वर्तमान समय के अनुरूप काफी बढ़ा दिया है, जिससे यह सम्मान आर्थिक रूप से भी और अधिक आकर्षक बन गया है।

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों को मुख्य रूप से दो प्रमुख पदक श्रेणियों में बांटा गया है—स्वर्ण कमल (Golden Lotus) और रजत कमल (Silver Lotus)। संशोधित नियमों के तहत अब स्वर्ण कमल जीतने वाले विजेताओं को 3 लाख रुपये की नकद राशि प्रदान की जाती है। यह सम्मान सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म, सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, सर्वश्रेष्ठ डेब्यू फिल्म निर्देशक और संपूर्ण मनोरंजन प्रदान करने वाली सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म जैसी शीर्ष श्रेणियों में दिया जाता है। इसमें निर्माता और निर्देशक दोनों को समान रूप से यह सम्मान और पुरस्कार राशि दी जाती है।

दूसरी तरफ, रजत कमल श्रेणी के तहत आने वाले विजेताओं को 2 लाख रुपये की सम्मान राशि दी जाती है। इस दायरे में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री, सर्वश्रेष्ठ सहायक कलाकार, सर्वश्रेष्ठ पटकथा, छायांकन, संगीत निर्देशन, पार्श्व गायन और संपादन जैसी लगभग सभी प्रमुख तकनीकी और कलात्मक श्रेणियां शामिल हैं। उदाहरण के तौर पर, जब कोई अभिनेता या अभिनेत्री सर्वश्रेष्ठ अभिनय का राष्ट्रीय पुरस्कार जीतते हैं, तो उन्हें रजत कमल पदक, प्रमाणपत्र और 2 लाख रुपये का नकद पुरस्कार सरकार की ओर से दिया जाता है।

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का सर्वोच्च शिखर ‘दादा साहेब फाल्के पुरस्कार’ होता है, जो भारतीय सिनेमा के विकास और संवर्धन में आजीवन अप्रतिम योगदान देने वाली हस्तियों को दिया जाता है। इस सर्वोच्च सम्मान के तहत दी जाने वाली राशि बाकी सभी श्रेणियों से कहीं अधिक है। सरकार द्वारा किए गए नए संशोधनों के तहत दादा साहेब फाल्के पुरस्कार विजेता को स्वर्ण कमल पदक और पारंपरिक शॉल के साथ 15 लाख रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया जाता है।

यह राशि किसी भी भारतीय कलाकार के लिए जीवन भर की कला साधना का आधिकारिक सरकारी सम्मान मानी जाती है। देविका रानी से लेकर सत्यजीत रे, अमिताभ बच्चन, रजनीकांत, आशा पारेख और वहीदा रहमान जैसी महान विभूतियां इस ऐतिहासिक मंच से सम्मानित हो चुकी हैं। सिनेमाई दुनिया में इसे भारत का ‘ऑस्कर लाइफटाइम अचीवमेंट’ माना जाता है, जहां मिलने वाला सम्मान किसी भी मौद्रिक मूल्य से परे होता है।

अक्सर राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा के दौरान देखा जाता है कि एक ही श्रेणी में दो कलाकारों या दो फिल्मों को संयुक्त विजेता घोषित कर दिया जाता है। ऐसे में कैश प्राइज के बंटवारे को लेकर बहुत सख्त और स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। यदि सर्वश्रेष्ठ अभिनेता या किसी अन्य व्यक्तिगत श्रेणी में दो कलाकारों को संयुक्त रूप से विजेता चुना जाता है, तो तयशुदा 2 लाख रुपये की राशि दोनों के बीच आधी-आधी यानी 1-1 लाख रुपये बांट दी जाती है।

हालांकि, सम्मान के रूप में मिलने वाला रजत कमल पदक और प्रशस्ति पत्र दोनों कलाकारों को अलग-अलग पूरा दिया जाता है। वहीं, अगर किसी फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार मिलता है, तो नियमानुसार उसके निर्माता और निर्देशक दोनों को स्वर्ण कमल के साथ 3-3 लाख रुपये की पूरी राशि अलग से दी जाती है। बाल कलाकारों के मामले में यदि कई बच्चों को एक साथ चुना जाता है, तो भी पुरस्कार राशि को उनके बीच समान रूप से विभाजित किया जाता है।

भारतीय सिनेमा सिर्फ मुख्यधारा के सितारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नॉन-फीचर (डॉक्यूमेंट्री व लघु फिल्में) और सिनेमाई साहित्य का भी बड़ा योगदान होता है। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में नॉन-फीचर फिल्मों की विभिन्न श्रेणियों में भी रजत कमल के साथ 2 लाख रुपये और सर्वश्रेष्ठ गैर-फीचर फिल्म के लिए स्वर्ण कमल के साथ 3 लाख रुपये दिए जाते हैं। इसके अलावा सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ पुस्तक लेखन और सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक के लिए भी स्वर्ण कमल और नकद पुरस्कार की विशेष व्यवस्था है।

ध्वनि संयोजन (साउंड डिजाइन), वीएफएक्स, कॉस्ट्यूम डिजाइन और मेकअप जैसी पर्दे के पीछे की विधाओं को भी सरकार ने बराबर का दर्जा दिया है। इन श्रेणियों के विजेताओं को भी रजत कमल और 2 लाख रुपये की पूरी राशि से नवाजा जाता है। यह व्यवस्था यह साबित करती है कि भारतीय राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार किसी व्यावसायिक शो की तरह सिर्फ टीआरपी पर नहीं, बल्कि सिनेमाई कला, तकनीकी बारीकियों और सांस्कृतिक धरोहर के वास्तविक संरक्षण पर आधारित हैं।

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