
राहुल जांगिड़ की रिपोर्ट पंचायत और निकाय चुनाव की आचार संहिता से पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक ने राजस्थान की राजनीति, प्रशासन, पर्यावरण और कर्मचारियों से जुड़े कई बड़े फैसलों पर मुहर लगा दी। सबसे बड़ा राजनीतिक फैसला राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल-2026 के प्रारूप को मंजूरी देना है। साथ ही राजस्थान ट्रीज (प्रोटेक्शन) बिल-2026 को भी मंजूरी दी गई है। दोनों विधेयक 20 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में पेश किए जाएंगे।
कैबिनेट ने ग्रामीण जलापूर्ति, सैनिक परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति, कर्मचारियों को प्रमोशन में दो साल की सशर्त छूट, मृत सरकारी कर्मचारियों की पुत्रवधू को अनुकंपा नियुक्ति, महिला कर्मचारियों की छुट्टियों, दिव्यांग कर्मचारियों के प्रमोशन लाभ, जनजाति क्षेत्र में नई भर्ती, वन विभाग में पदोन्नति, उद्योग और अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं समेत कई फैसले किए।
UCC पर राजस्थान सरकार का बड़ा दांव
कैबिनेट ने संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप द राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल-2026 के ड्राफ्ट को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियमों को एक समान और व्यवस्थित करना है।यह ड्राफ्ट सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार किया गया है। समिति ने संभाग स्तर पर जनसुनवाई कर आमजन, जनप्रतिनिधियों, धर्मगुरुओं और कानून विशेषज्ञों से राय ली थी। प्रस्तावित UCC के प्रावधान अनुसूचित जनजातियों पर लागू नहीं होंगे।
शादी का 60 दिन में रजिस्ट्रेशन जरूरी
प्रस्तावित कानून के तहत कानून लागू होने के बाद होने वाले विवाह का 60 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। सभी धर्मों और समुदायों को अपनी परंपराओं और रीति-रिवाजों जैसे सप्तपदी, निकाह, आनंद कारज और अन्य मान्य परंपराओं के अनुसार विवाह करने की स्वतंत्रता रहेगी।पंजीकरण न कराने पर ₹10 हजार तक जुर्माने का प्रावधान है। नोटिस के बाद भी अनुपालन नहीं करने पर जुर्माना ₹25 हजार तक हो सकता है। हालांकि सिर्फ पंजीकरण नहीं होने या देरी से विवाह अपने आप अमान्य नहीं होगा।
तलाक और लिव-इन भी कानून के दायरे में
UCC में तलाक के पंजीकरण की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। लिव-इन रिलेशनशिप की शुरुआत और समाप्ति की लिखित सूचना/पंजीकरण का प्रावधान किया गया है, ताकि दोनों पक्षों के अधिकारों की सुरक्षा हो सके।विवाह या तलाक के पंजीकरण का आवेदन मिलने के 15 दिनों में रजिस्ट्रार को प्रमाण पत्र जारी करना होगा या अस्वीकृति का कारण लिखित रूप में बताना होगा। अस्वीकृति के खिलाफ 30 दिनों में रजिस्ट्रार जनरल के सामने अपील की जा सकेगी और उसका निस्तारण 60 दिनों में करना होगा। जानबूझकर पंजीकरण प्रक्रिया में देरी करने वाले रजिस्ट्रार पर भी ₹25 हजार तक जुर्माने का प्रावधान है।
बहुविवाह पर पूर्ण रोक का प्रस्ताव
प्रस्तावित UCC में एक से ज्यादा शादी यानी बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध का प्रावधान है। वहीं पुनर्विवाह की अनुमति रहेगी। विवाह से जुड़े विवाद, जबरन या धोखे से ली गई सहमति तथा अन्य आधारों पर विवाह को शून्य या अकृत घोषित करने के लिए न्यायिक प्रक्रिया भी प्रस्तावित की गई है।
संपत्ति में उत्तराधिकार का नया ढांचा
बिना वसीयत मृत्यु होने की स्थिति में संपत्ति के हस्तांतरण के लिए प्राथमिकता की तीन श्रेणियां तय की गई हैं। पहली श्रेणी में जीवित पति/पत्नी, जीवित बच्चे, मृत बच्चों के पति/पत्नी एवं बच्चे और माता-पिता शामिल हैं। दूसरी श्रेणी में सौतेले माता-पिता, भाई-बहन, दिवंगत भाई-बहनों के पति-पत्नी एवं बच्चे, माता-पिता के भाई-बहन, दादा-दादी और नाना-नानी जैसे रिश्ते रखे गए हैं। इसके बाद अन्य रिश्तेदारों की श्रेणी होगी। किसी श्रेणी में कानूनी उत्तराधिकारी नहीं मिलने पर संपत्ति सरकार के पास जाएगी, लेकिन उससे जुड़े दायित्व भी सरकार पर होंगे। मृत्यु के समय गर्भ में मौजूद और बाद में जीवित जन्म लेने वाले बच्चे को भी उत्तराधिकार का पूरा कानूनी अधिकार मिलेगा।
खेजड़ी-रोहिड़ा समेत 29 पेड़ों पर सख्ती
पर्यावरण के मोर्चे पर भी सरकार ने बड़ा फैसला किया है। द राजस्थान ट्रीज (प्रोटेक्शन) बिल-2026 के प्रारूप को मंजूरी दी गई है। खेजड़ी, रोहिड़ा, बरगद, पीपल, लसोड़ा, तेंदू, महुआ, कैर और चिरोंजी समेत 29 महत्वपूर्ण वृक्ष प्रजातियों के संरक्षण का प्रावधान किया गया है।बिना अधिकृत अनुमति पेड़ काटना, उखाड़ना या गिराना अपराध होगा। ऐसे अपराध को संज्ञेय और जमानती बनाने का प्रस्ताव है। दोष सिद्ध होने पर एक साल तक की सजा या ₹1 लाख तक जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। अपराध में इस्तेमाल वस्तुओं की जब्ती का भी प्रावधान है।
पेड़ काटना है तो पहले अनुमति, फिर भरपाई
विशेष परिस्थिति में अनुमति मिलने पर पेड़ काटा जा सकेगा, लेकिन उसके बदले निर्धारित संख्या में उसी क्षेत्र में पेड़ लगाने होंगे। यानी पेड़ काटने की अनुमति का मतलब पर्यावरणीय जिम्मेदारी से छूट नहीं होगा।
गांवों में नल का पानी… अब 5-स्तरीय सिस्टम
ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के संचालन और संधारण यानी O&M नीति को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी। नीति में जल जीवन मिशन 2.0 के 19 प्रमुख घटकों को शामिल किया गया है। ग्राम पंचायत, क्लस्टर समिति, ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर 5-स्तरीय संस्थागत ढांचा बनाया जाएगा। ग्राम पंचायत और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियां स्थानीय स्तर पर रोजाना संचालन और रखरखाव संभालेंगी। 5 से 6 ग्राम पंचायतों के समूह पर क्लस्टर समिति तकनीकी सहायता देगी। बड़े जल ढांचे और थोक जल आपूर्ति की जिम्मेदारी PHED और राजस्थान जल प्रदाय एवं सीवरेज निगम की होगी।
1971 युद्ध के 35 शहीद परिवारों को अब नौकरी का हक
कैबिनेट ने 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान घायल होकर बाद में शहीद हुए राजस्थान के 35 सैनिकों के परिवारों के लिए बड़ा फैसला किया है। इन सैनिकों को ‘बैटल कैजुअल्टी (फेटल)’ घोषित किया गया है। अब इनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का रास्ता साफ होगा। इसके लिए पात्रता की समयसीमा 31 दिसंबर 1971 से बढ़ाकर 31 अक्टूबर 1972 की गई है।
प्रमोशन में 2 साल की सशर्त छूट
सरकारी कर्मचारियों के लिए कैबिनेट का बड़ा फैसला 2026-27 में प्रमोशन के लिए जरूरी अनुभव में 2 साल की सशर्त छूट दी जाएगी। यह लाभ उन कर्मचारियों को मिलेगा जिन्हें 2023-24, 2024-25 और 2025-26 में यह छूट नहीं मिल सकी थी। सरकार का कहना है कि इससे अनुभव की कमी के कारण खाली रह जाने वाले पद भरे जा सकेंगे और प्रमोशन के अवसर बढ़ेंगे।
मृत सरकारी कर्मचारी की पुत्रवधू भी अनुकंपा नियुक्ति की पात्र
कैबिनेट ने मृत सरकारी कर्मचारी के पात्र आश्रितों में पुत्रवधू को भी शामिल करने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य ऐसे परिवारों को आर्थिक सहारा देना है जहां मृत कर्मचारी के बाद परिवार की जिम्मेदारी पुत्रवधू पर आ गई है।
महिला कर्मचारियों के लिए भी बड़े बदलाव
राजस्थान सेवा नियमों में संशोधन के तहत प्रशिक्षण के दौरान या प्रशिक्षण खत्म होने के दो साल के भीतर राजपत्रित पद छोड़ने पर सामान्य स्थिति में केवल प्रशिक्षण व्यय की वसूली का प्रावधान होगा। राज्य या केंद्र सरकार के विभाग/उपक्रम में नई नियुक्ति के कारण पद छोड़ने पर वेतन-भत्तों और प्रशिक्षण व्यय की वसूली नहीं होगी।एकल महिला कर्मचारियों को Child Care Leave एक कैलेंडर वर्ष में 3 की जगह 6 चरणों में लेने की सुविधा मिलेगी। सरोगेसी से मातृत्व प्राप्त करने पर सरोगेट मदर को 180 दिन और कमीशनिंग मदर को 90 दिन का मातृत्व अवकाश मिलेगा।
जनजाति क्षेत्र में 470 वार्डन पदों की भर्ती का रास्ता साफ
जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग में छात्रावास अधीक्षक के पदों के नियमों में बदलाव को मंजूरी दी गई है। इससे कुल 470 पदों को भरने का रास्ता खुलेगा, जिनमें 254 महिला ग्रेड-II पद शामिल हैं। पहले ये पद शिक्षा विभाग से प्रतिनियुक्ति पर भरे जाते थे, अब पृथक कैडर और सीधी भर्ती का प्रावधान किया जाएगा।
वन विभाग में प्रमोशन के नए रास्ते
राजस्थान वन अधीनस्थ सेवा नियमों में संशोधन से वनरक्षक से सहायक वनपाल, सहायक वनपाल से वनपाल और सर्वेयर से कनिष्ठ अभियंता पद पर पदोन्नति का रास्ता खुलेगा।महिला एवं बाल विकास विभाग में संयुक्त निदेशक और कार्यक्रम निदेशक/अतिरिक्त निदेशक के पदनाम सेवा नियमों में शामिल किए जाएंगे, जिससे विभागीय पदोन्नति के अवसर बढ़ेंगे।
दिव्यांग कर्मचारियों को 30 जून 2016 से प्रमोशन का काल्पनिक लाभ
राजस्थान दिव्यांगजन अधिकार संशोधन नियम-2026 के प्रारूप को मंजूरी दी गई है। सरकारी सेवा में कार्यरत पात्र दिव्यांग कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण का Notional Benefit 30 जून 2016 से देने का प्रावधान किया गया है। राज्य में दिव्यांग कर्मचारियों के लिए प्रमोशन में 4 प्रतिशत आरक्षण के तहत यह लाभ वरिष्ठता और पदोन्नति के अवसरों में सुधार करेगा।
जैसलमेर में UltraTech को 306 हेक्टेयर जमीन
औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए UltraTech Cement Limited को जैसलमेर के ग्राम पारेवर में करीब 306 हेक्टेयर औद्योगिक भूमि आवंटित करने की मंजूरी दी गई है। सरकार के मुताबिक इससे निवेश और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
सोलर-विंड परियोजनाओं के लिए सैकड़ों हेक्टेयर जमीन
चार अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन को भी मंजूरी मिली। बीकानेर के बरजू में करीब 228 हेक्टेयर, जैसलमेर के रामगढ़ बारानी दक्षिण में करीब 485 हेक्टेयर, जैसलमेर के तोगा और नीम्बा में 178 हेक्टेयर तथा बाड़मेर के लीकड़ी में करीब 51 हेक्टेयर भूमि सौर और सोलर-विंड हाइब्रिड परियोजनाओं के लिए आवंटित करने का फैसला किया गया।
जोधपुर के पेयजल प्रोजेक्ट में 21 काश्तकारों का पुराना विवाद सुलझेगा
जैसलमेर के चिन्नू गांव में एस्केप जलाशय निर्माण से प्रभावित 21 गैर-खातेदार काश्तकारों को उसी गांव में समकक्ष भूमि आवंटित करने को मंजूरी दी गई। वर्ष 1999 में इंदिरा गांधी मुख्य नहर के एस्केप चैनल के लिए करीब 722.65 बीघा भूमि ली गई थी। अब भूमि विवाद सुलझने से जलाशय निर्माण में तेजी आएगी।यह प्रोजेक्ट जोधपुर शहर की पेयजल जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है। मानसून में नहर से मिलने वाले अतिरिक्त पानी को जलाशय में संग्रहित कर नियमित जलापूर्ति में मदद मिलेगी।
एक कैबिनेट बैठक… फैसलों की लंबी फेहरिस्त
एक तरफ सरकार ने UCC के जरिए विवाह, तलाक, लिव-इन और उत्तराधिकार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर कानून लाने की तैयारी कर दी है। दूसरी तरफ 29 पेड़ प्रजातियों पर सख्ती और पेड़ काटने पर जेल-जुर्माने का प्रावधान पर्यावरण के मोर्चे पर बड़ा कदम है।सरकारी कर्मचारियों को प्रमोशन में राहत, शहीद परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति, पुत्रवधू को नौकरी का रास्ता, दिव्यांग कर्मचारियों को पुराना प्रमोशन लाभ, 470 वार्डन पदों की भर्ती, वन विभाग में पदोन्नति, ग्रामीण जलापूर्ति का नया ढांचा और जैसलमेर-बाड़मेर-बीकानेर में बड़े औद्योगिक एवं ऊर्जा प्रोजेक्ट—कैबिनेट के फैसलों का असर कई वर्गों पर पड़ने वाला है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद UCC और Tree Protection Bill का अगला पड़ाव विधानसभा है। 20 अगस्त से शुरू होने वाले सत्र में इन विधेयकों पर बहस होगी। अब नजर रहेगी कि UCC के बहुविवाह, लिव-इन, विवाह पंजीकरण और उत्तराधिकार संबंधी प्रावधानों पर सदन में क्या बहस होती है। साथ ही निजी भूमि पर पेड़ काटने की अनुमति, 29 संरक्षित प्रजातियों और सजा-जुर्माने के प्रावधानों पर भी सवाल उठ सकते हैं। कैबिनेट ने फैसले कर दिए हैं… अब इन फैसलों को कानून का रूप देने की असली परीक्षा विधानसभा में होगी।
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