MP News :
भोपाल। पटौदी परिवार और अभिनेता सैफ अली खान को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने भोपाल स्थित करीब 15,000 करोड़ रुपये मूल्य की पैतृक संपत्तियों को ‘शत्रु संपत्ति’ घोषित कर दिया है। इसके साथ ही साल 2000 में ट्रायल कोर्ट द्वारा सैफ की दादी साजिदा सुल्तान को संपत्ति की वैध वारिस मानने वाला फैसला भी रद्द कर दिया गया है।

🔍 क्या है मामला?
भोपाल के अंतिम नवाब हमीदुल्लाह खान की तीन बेटियों में सबसे बड़ी थीं आबिदा सुल्तान, जो 1950 में पाकिस्तान चली गईं और वहीं की नागरिकता ले ली।
भारत सरकार के शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968 के अनुसार, जो नागरिक विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गए, उनकी संपत्तियों को भारत में “शत्रु संपत्ति” घोषित किया जा सकता है।
सरकार ने दावा किया कि आबिदा ही नवाब की वैधानिक वारिस थीं। ऐसे में उनके पाकिस्तान चले जाने के कारण यह पूरी संपत्ति शत्रु संपत्ति की श्रेणी में आती है।
🏰 कौन-कौन सी संपत्तियां विवाद में?
- फ्लैग स्टाफ हाउस (सैफ अली खान का बचपन का घर)
- नूर-उस-सबा पैलेस
- दार-उस-सलाम
- हबीबी का बंगला
- अहमदाबाद पैलेस
- कोहेफिजा स्थित कीमती ज़मीनें और भवन
⚖️ कोर्ट का फैसला क्यों अहम?
सैफ अली खान के परिवार की ओर से उनकी दादी साजिदा सुल्तान को कानूनी उत्तराधिकारी बताते हुए इन संपत्तियों पर हक जताया गया था। लेकिन हाईकोर्ट ने माना कि जिनकी संपत्ति थी, वो पाकिस्तान की नागरिक बन चुकी थीं, इसलिए उनका कोई उत्तराधिकारी भारत में संपत्ति का अधिकार नहीं रखता।
📌 अब क्या होगा?
इस फैसले के बाद:
- पूरी संपत्ति भारत सरकार के कस्टोडियन ऑफ शत्रु प्रॉपर्टी के अधिकार में आ जाएगी।
- सैफ अली खान और उनके परिवार के पास सुप्रीम कोर्ट में अपील का विकल्प बचा है।
- यह फैसला शत्रु संपत्ति विवादों की दिशा और अन्य मामलों पर भी असर डाल सकता है।
यह निर्णय पटौदी खानदान की सामंती विरासत पर एक बड़ी कानूनी चोट माना जा रहा है, जिससे ना सिर्फ मूल्यवान संपत्ति हाथ से चली गई, बल्कि भविष्य की कानूनी लड़ाई भी कठिन हो गई है।









