राजेश शर्मा | भोपाल2 घंटे पहले

इंदौर, भोपाल और जबलपुर में पीएम ई-बस सेवा की शुरुआत के साथ जुलाई से मध्य प्रदेश में शहरी परिवहन एक बड़े उन्नयन के लिए तैयार है। आधुनिक यात्री सुविधाओं से सुसज्जित पर्यावरण-अनुकूल, वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों का पहला बेड़ा इंदौर में परिचालन शुरू करेगा। पहले चरण में इंदौर में आठ रूटों पर 150 ई-बसें, भोपाल में 10 रूटों पर 100 बसें और जबलपुर में 100 बसें चलेंगी।
केंद्र सरकार की पीएम ई-बस सेवा योजना के तहत, मध्य प्रदेश के छह शहरों में कुल 582 इलेक्ट्रिक बसें शुरू की जाएंगी। संचालन और रखरखाव का जिम्मा ग्रीन सेल मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा गया है, जबकि टिकटिंग का प्रबंधन डिजिटल 'चलो ऐप' के जरिए किया जाएगा। इंदौर, भोपाल और जबलपुर में पहले चरण के बाद इस सेवा का विस्तार ग्वालियर, सागर और उज्जैन तक किया जाएगा। इस मंडे स्टोरी में जानें कि 25 सीटों वाली वातानुकूलित ई-बसें कैसे संचालित होंगी, उनके रूट, अपेक्षित किराया और यात्रियों के लिए उपलब्ध सुविधाएं क्या होंगी।
ई-बसें सकल लागत अनुबंध मॉडल पर संचालित की जाएंगी
- ऑपरेटर की भूमिका: ग्रीन सेल मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड ड्राइवर, कंडक्टर और रखरखाव कर्मचारी प्रदान करेगा।
- भुगतान दर: परिचालन के लिए कंपनी को प्रति किलोमीटर 58.14 रुपये का भुगतान मिलेगा। इसमें केंद्र सरकार प्रति किमी 22 रुपये की सब्सिडी देगी, जबकि राज्य सरकार प्रति किमी 36.14 रुपये का वहन करेगी.
- न्यूनतम दूरी की शर्त: प्रत्येक बस को प्रतिदिन कम से कम 180 किलोमीटर चलना आवश्यक होगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर: छह शहरों में 9 डिपो बनाए जाएंगे
ई-बसों के संचालन और रखरखाव के लिए छह शहरों में नौ अत्याधुनिक डिपो बनाए जा रहे हैं। भोपाल में 14 करोड़ रुपये की लागत से बैरागढ़ और कस्तूरबा नगर में दो डिपो बनाये जायेंगे। इंदौर में 6 करोड़ रुपए की लागत से नायता मुंडला और चंदन नगर में दो डिपो तैयार किए जाएंगे।
दो डिपो ग्वालियर में, जबकि एक-एक डिपो उज्जैन, सागर और जबलपुर में बनाए जाएंगे। डिपो निर्माण लागत का 60% केंद्र सरकार और 40% राज्य सरकार वहन करेगी। राज्य सरकार अपने हिस्से के करीब 24 करोड़ रुपये खर्च करेगी.
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार किया जाएगा
डिपो के साथ ई-बसों के लिए चार्जिंग स्टेशन भी बनाए जाएंगे। इंदौर, भोपाल और ग्वालियर में दो-दो और जबलपुर, सागर और उज्जैन में एक-एक केंद्र स्थापित किया जाएगा। करीब 60 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इन नौ स्टेशनों को निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए 41 किमी लंबी हाईटेंशन लाइन बिछायी जायेगी. केंद्र सरकार की मदद से इसके लिए विशेष सब-स्टेशन भी बनाए जाएंगे।
रूट प्लानिंग: 20 साल की जरूरतों के हिसाब से तैयारी
हर शहर के लिए एक व्यापक गतिशीलता योजना तैयार की गई है, ताकि अगले 20 वर्षों के लिए शहरी आबादी की परिवहन जरूरतों को पूरा किया जा सके।
इंदौर: 8 रूटों पर 150 ई-बसें अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (एआईसीटीएसएल) के सीईओ अर्थ जैन के मुताबिक, इंदौर के लिए आठ रूट फाइनल किए गए हैं।
- सबसे लंबा मार्ग: रंगवासा-देपालपुर (52.30 किमी) मार्ग रहेगा, जहां 12 बसें संचालित होंगी।
- सबसे छोटा मार्ग: महू नाका-बेस्ट प्राइज (17.22 किमी) मार्ग होगा, जिस पर 10 बसें संचालित होंगी।
- व्यस्ततम मार्ग: महू नाका से सांवेर तक होगा। यहां 50 बसें चलेंगी, जिससे यात्रियों को कम अंतराल पर बसें उपलब्ध होंगी।
भोपाल: 10 रूटों पर 100 ई-बसें
राजधानी भोपाल में यह सेवा जुलाई के दूसरे या तीसरे सप्ताह से शुरू होने की संभावना है। यहां 10 रूटों पर 100 बसें चलेंगी. सबसे लंबा मार्ग सीहोर से रातापानी (68.5 किमी) होगा, जबकि सबसे छोटा मार्ग अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र से बीडीए कॉलोनी (32 किमी) होगा।
लंबा मार्ग: सीहोर, फंदा, चिरायु अस्पताल, बैरागढ़, कलेक्टोरेट, हमीदिया अस्पताल, रोशनपुरा, वल्लभ भवन, बोर्ड ऑफिस, चूना भट्टी, मंदाकिनी चौराहा, बीमा कुंज और कजलीखेड़ा से गुजरेगी।
छोटा मार्ग: अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र, लांबाखेड़ा, करोंद, आरिफ नगर, संगम टॉकीज, रेलवे स्टेशन, सुभाष नगर, वल्लभ भवन, बोर्ड ऑफिस, आरकेएमपी स्टेशन से बीडीए कॉलोनी तक जाएगी।
किराया: फिलहाल 1.5 रुपये प्रति किमी
एआईसीटीएसएल के सीईओ अर्थ जैन के मुताबिक शुरुआत में यात्रियों से 1.5 रुपए प्रति किलोमीटर की दर से किराया लिया जाएगा। इस दर से 5 किलोमीटर की यात्रा का किराया 7.5 रुपये होगा. हालांकि किराया संशोधन पर फैसला एक उच्च स्तरीय समिति करेगी. इसे बढ़ाकर 2 रुपये प्रति किमी करने का प्रस्ताव है.
अगर ऐसा हुआ तो 5 किमी के लिए किराया 10 रुपये होगा, जबकि 10-15 किमी की यात्रा के लिए अधिकतम 3 रुपये प्रति किमी की दर लागू हो सकती है. टिकट बुकिंग और पास की सुविधा 'चलो ऐप' पर उपलब्ध होगी।
सीईओ का दावा: तकनीक आधारित और विश्वसनीय होगा सिस्टम
ग्रीन सेल मोबिलिटी के सीईओ देवेन्द्र चावला ने कहा कि मध्य प्रदेश में यह इलेक्ट्रिक बस परियोजना पायलट चरण से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर टिकाऊ सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार, मजबूत सरकारी नीतियों और प्रभावी कार्यान्वयन से स्वच्छ परिवहन में तेजी आएगी।









