June 14, 2026 11:19 am

नैनो उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग से बढ़ेगा उत्पादन, मिट्टी की उर्वरता भी रहेगी सुरक्षित

रायपुर, 13 जून 2026

कृषि क्षेत्र में नवाचार आधारित तकनीकों का उपयोग किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने की दिशा में नई संभावनाएं प्रदान कर रहा है। नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी जैसे उन्नत उर्वरक न केवल फसलों को आवश्यक पोषक तत्व अधिक प्रभावी ढंग से उपलब्ध करा रहे हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

कृषि विज्ञान केन्द्र के विषय वस्तु विशेषज्ञ (मृदा विज्ञान) डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों, विशेषकर यूरिया के अत्यधिक एवं असंतुलित उपयोग से दीर्घकाल में मिट्टी की गुणवत्ता और उसमें मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में नैनो उर्वरक आधुनिक कृषि के लिए एक प्रभावी विकल्प के रूप में उभर रहे हैं, जो पोषक तत्वों की उपयोग दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ फसलों को बेहतर पोषण उपलब्ध कराते हैं।

उन्होंने बताया कि नैनो यूरिया का उपयोग पर्णीय छिड़काव (फोलियर स्प्रे) के माध्यम से किया जाता है। पौधे इसकी पत्तियों द्वारा पोषक तत्वों को सीधे अवशोषित करते हैं, जिससे इसकी उपयोग दक्षता पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में अधिक होती है। वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार नैनो यूरिया का उपयोग 4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से किया जाना चाहिए तथा 500 मिलीलीटर की एक बोतल एक एकड़ क्षेत्र के लिए पर्याप्त होती है।

डॉ. कुमार ने बताया कि बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए नैनो यूरिया का पहला छिड़काव फसल की 30 से 35 दिन की अवस्था में तथा दूसरा छिड़काव 55 से 60 दिन की अवस्था में किया जाना चाहिए। इससे फसलों की वृद्धि, विकास और उत्पादन क्षमता में सकारात्मक सुधार देखा गया है।

नैनो डीएपी के संबंध में उन्होंने बताया कि यह फसलों को फास्फोरस उपलब्ध कराने का एक प्रभावी माध्यम है। इसका उपयोग बीजोपचार और पर्णीय छिड़काव दोनों रूपों में किया जा सकता है। बीजोपचार के लिए 5 मिलीलीटर प्रति किलोग्राम बीज तथा छिड़काव के लिए 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से उपयोग करने की अनुशंसा की गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार नैनो उर्वरकों का सबसे बड़ा लाभ यह है कि पोषक तत्व सीधे पौधों तक पहुंचते हैं, जिससे उर्वरकों की बर्बादी कम होती है और फसलों को अधिक लाभ मिलता है। साथ ही मिट्टी पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता, जिससे उसकी उर्वरता और उत्पादक क्षमता लंबे समय तक बनी रहती है।
राज्य सरकार और कृषि विभाग किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। प्रशिक्षण, प्रदर्शन एवं तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से किसानों को नैनो उर्वरकों के लाभ और उनके वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी दी जा रही है।

डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने किसानों से अपील की है कि वे नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का उपयोग निर्धारित मात्रा और वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार करें, ताकि कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के साथ-साथ मिट्टी के स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सके।

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