
चीन के हुलुनबुइर स्थित मोकी ट्रेनिंग बेस के खचाखच भरे मैदान पर भारतीय बेटियों ने एक बार फिर तिरंगा पूरी शान से लहरा दिया है। बेहद कड़े और सांसें रोक देने वाले फाइनल मुकाबले में भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम ने मेजबान चीन को 1-0 से धूल चटाकर महिला जूनियर एशिया कप 2026 की चमचमाती ट्रॉफी अपने नाम कर ली। यह खिताबी जीत साधारण नहीं है, बल्कि भारत ने इस टूर्नामेंट में लगातार तीसरा खिताब जीतकर अपनी स्वर्णिम ‘गोल्डन हैट्रिक’ पूरी कर ली है। इससे पहले भारतीय टीम ने साल 2023 और 2024 में भी महाद्वीपीय चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया था। इस धमाकेदार खिताबी जीत के साथ ही भारतीय टीम ने आगामी एफआईएच जूनियर महिला हॉकी वर्ल्ड कप के लिए भी अपना टिकट पूरी शान से पक्का कर लिया है।
फाइनल मुकाबले के पहले क्वार्टर में दोनों ही टीमों ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया, लेकिन चीन की मजबूत घरेलू दर्शकों की भीड़ के बीच भारत ने अपना संयम बनाए रखा। दूसरे क्वार्टर की शुरुआत होते ही 17वें मिनट में फॉरवर्ड सानिका चंद्रकांत माने ने बिजली जैसी तेजी दिखाते हुए चीनी गोलकीपर को छकाकर शानदार फील्ड गोल दाग दिया। गेंद के गोलपोस्ट में समाते ही भारतीय खेमे में जश्न की लहर दौड़ गई। इस एकलौती बढ़त के बाद मैच की रणनीति पूरी तरह बदल गई, जहां चीनी टीम ने बराबरी करने के लिए लगातार हमले बोले, वहीं भारतीय डिफेंस ने चट्टान की तरह खड़े होकर हर खतरे को नाकाम कर दिया। गोलकीपर और बैकलाइन के शानदार तालमेल ने अंतिम सीटी बजने तक चीन को बराबरी का कोई मौका नहीं दिया और यह एक गोल भारत को इतिहास की किताबों में अमर करने के लिए काफी साबित हुआ।
भारतीय टीम का इस पूरे टूर्नामेंट में प्रदर्शन ऐसा रहा जिसने विपक्षी टीमों के हौसले पस्त कर दिए। अभियान की धमाकेदार शुरुआत में भारत ने दक्षिण कोरिया को 4-1 से एकतरफा अंदाज में पराजित किया। इसके बाद मलेशियाई डिफेंस की धज्जियां उड़ाते हुए भारतीय फॉरवर्ड्स ने 11-1 के भारी अंतर से जीत दर्ज की, जबकि अगले मुकाबले में एशियाई दिग्गज जापान को 7-0 से रौंद डाला। लीग स्टेज के एलीट पूल में चीन के खिलाफ खेला गया मैच गोलरहित 0-0 की बराबरी पर छूटा था, जिससे भारत ने 10 अंकों के साथ पूल में नंबर-1 स्थान हासिल किया। टूर्नामेंट का सबसे बड़ा धमाका क्वार्टर-फाइनल में देखने को मिला, जहां भारत ने अपने पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 19-0 के शर्मनाक स्कोर से धूल चटाई, जिसमें सानिका माने ने दो दर्शनीय गोल दागे थे।
क्वार्टर फाइनल के तूफान के बाद सेमीफाइनल में एक बार फिर भारत का सामना एशियाई महारथी दक्षिण कोरिया से हुआ। इस दबाव भरे नॉकआउट मैच में भारत की स्टार ड्रैग-फ्लिक स्पेशलिस्ट सुप्रिया ने अपनी स्टिक का असली जादू दिखाया। सुप्रिया ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में तब्दील करने की अपनी अचूक कला का प्रदर्शन करते हुए शानदार हैट्रिक जमाई और तीन बेहतरीन गोल दागे। इसके अलावा मधु सिदार और सुखवीर कौर ने भी आक्रामक हमलों को गोल में बदलकर भारत को 5-1 की विशाल जीत दिला दी। इस विशालकाय जीत के साथ गत विजेता भारतीय टीम ने रिकॉर्ड अंतर से खिताबी मुकाबले में प्रवेश किया था, जहां उनका सामना जापान को 6-0 से हराने वाली चीनी टीम से हुआ।
घरेलू मैदान पर खेल रही ताकतवर चीनी टीम को उसके ही घर में पटकनी देकर खिताबी हैट्रिक पूरी करने की इस अभूतपूर्व उपलब्धि पर पूरा देश गर्व कर रहा है। ऐतिहासिक खिताबी जीत के फौरन बाद राष्ट्रीय हॉकी महासंघ ‘हॉकी इंडिया’ ने टीम के लिए अपने खजाने का मुंह खोल दिया। हॉकी इंडिया की आधिकारिक घोषणा के अनुसार, चैंपियन टीम की प्रत्येक खिलाड़ी को 3-3 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। इसके साथ ही पर्दे के पीछे रहकर टीम को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने वाले सपोर्ट स्टाफ के प्रत्येक सदस्य को 1.5-1.5 लाख रुपये के नकद इनाम से सम्मानित किया जाएगा। यह जीत भारतीय जमीनी हॉकी के स्वर्णिम दौर और आने वाले एफआईएच जूनियर वर्ल्ड कप में देश की मजबूत दावेदारी का खुला ऐलान है।









