
मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर बीजेपी की मंशा पर सवाल उठाए हैं.
उन्होंने सरकार से पूछा कि यूसीसी की जरूरत क्यों है और इस मामले पर राज्य के विभिन्न जिलों में जनता की क्या राय सामने आयी है.
सिंघार ने शनिवार को बैतूल में कांग्रेस के संगठन सृजन प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान मीडिया से बात की. उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर विधानसभा में सरकार का पक्ष सुनने और विस्तृत चर्चा करने के बाद अपनी रणनीति तय करेगी.
सिंघार ने तर्क दिया कि सरकार को जवाब देना चाहिए कि देश की आजादी के दशकों बाद अब यूसीसी की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही है। उन्होंने भाजपा पर समाज के विभिन्न वर्गों को बांटने वाली राजनीति करने का आरोप लगाया।
मांग- सुझावों को सार्वजनिक करे सरकार नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि सरकार यूसीसी को लेकर जिला स्तर पर मिले सुझावों और जनता की वास्तविक राय को सार्वजनिक करे.
उन्होंने दोहराया कि विधानसभा में इस विषय पर विस्तृत चर्चा के बाद ही कांग्रेस अपना रुख स्पष्ट करेगी.
कांग्रेस के संगठन सृजन प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्देश्य के बारे में बोलते हुए सिंघार ने कहा कि इसका लक्ष्य कार्यकर्ताओं को जमीनी स्तर के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने के लिए तैयार करना है. उन्होंने बीजेपी पर मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए नकारात्मक और झूठा प्रचार करने का आरोप लगाया.
प्रशिक्षण के दौरान कार्यकर्ताओं को सिखाया जा रहा है कि ऐसे दुष्प्रचार का तथ्यों के आधार पर कैसे जवाब दिया जाए। सिंघार ने कहा कि कांग्रेस की रणनीति है कि हर व्यक्ति को न्याय मिले और हर कार्यकर्ता को सम्मान मिले.
आरोप- सरकार ने कई वादे पूरे नहीं किए किसानों के मुद्दों पर सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार ने उनसे किए कई वादे पूरे नहीं किए हैं. उन्होंने सोयाबीन और मूंग की खरीद और धान और इथेनॉल से संबंधित मामलों सहित कई विषयों पर सरकार द्वारा किसानों से किए गए वादों के उल्लंघन का उल्लेख किया।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि किसान लगातार परेशान हैं और सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करने में विफल रही है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस विधायक दल की बैठक में इन सभी मुद्दों पर रणनीति तैयार की जाएगी.
युवाओं के रोजगार को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार रोजगार देने के बजाय रोजगार के अवसर कम कर रही है. उन्होंने ओबीसी आरक्षण का मुद्दा भी उठाया और आरोप लगाया कि सरकार इस वर्ग को उसका अधिकार देने के प्रति गंभीर नहीं है.
कहा- सरकार पर 5 लाख करोड़ का कर्ज है प्रदेश पर बढ़ते कर्ज को लेकर सिंघार ने कहा कि सरकार पर करीब 5 लाख करोड़ का कर्ज है, लेकिन इसे चुकाने की कोई स्पष्ट योजना नहीं है.
इसका बोझ महंगाई, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें और बिजली बिल के रूप में आम जनता पर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार के पास आर्थिक प्रबंधन का कोई ठोस रोडमैप नहीं है और वह बिना योजना के कर्ज लेकर काम चला रही है.
उन्होंने अवैध वसूली, रॉयल्टी, अवैध शराब कारोबार और भ्रष्टाचार के मामलों का भी जिक्र किया. उनका आरोप था कि सबूत सामने आने के बावजूद जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती. उन्होंने परिवहन और नर्सिंग घोटालों का जिक्र करते हुए मंत्रियों पर कार्रवाई न होने पर भी सवाल उठाए.
सरकार लोकतंत्र की आवाज को दबाना चाहती है लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के मुद्दे पर सिंघार ने कहा कि बीजेपी लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने की कोशिश कर रही है.
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मीडिया की आजादी पर दबाव बनाना चाहती है और सिर्फ अपनी बात जनता तक पहुंचाना चाहती है. उन्होंने कहा कि जनता अब सब समझ रही है. पेपर लीक जैसी घटनाओं से युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है, लेकिन सरकार उनके दर्द को गंभीरता से नहीं सुन रही है।
बारिश की कम संभावना के बारे में पूछे जाने पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अगर राज्य में सूखे जैसी स्थिति की आशंका है तो सरकार को अभी से आकस्मिक कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए, ताकि किसानों को समय पर राहत और आवश्यक सहायता मिल सके.








