
रायपुर, 29 जुलाई 2026
कभी बढ़ती उर्वरक लागत और अनिश्चित उत्पादन से चिंतित रहने वाली मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम कछौड़ की महिला कृषक श्रीमती शकुन्तला आज आधुनिक खेती की एक सफल पहचान बन चुकी हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि यदि किसान समय के साथ नई तकनीकों को अपनाएं और वैज्ञानिक सलाह पर भरोसा करें, तो सीमित संसाधनों में भी बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
खेती उनके परिवार की आजीविका का प्रमुख आधार रही है, लेकिन हर वर्ष बढ़ती लागत और उत्पादन को लेकर बनी रहने वाली चिंता उन्हें परेशान करती थी। इसी दौरान कृषि विभाग एवं आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित कछौड़, शाखा मनेन्द्रगढ़ के माध्यम से उन्हें इफको नैनो डीएपी की जानकारी मिली। कृषि विशेषज्ञों ने उन्हें इसके वैज्ञानिक उपयोग, कम मात्रा में अधिक प्रभाव तथा संतुलित पोषण के बारे में विस्तार से समझाया।
नई तकनीक पर विश्वास करते हुए श्रीमती शकुन्तला ने अपनी फसल में नैनो डीएपी का प्रयोग किया। कुछ ही समय बाद खेतों में सकारात्मक बदलाव स्पष्ट दिखाई देने लगे। पौधों की बढ़वार पहले की तुलना में अधिक तेज हुई, फसल का रंग गहरा हरा और पौधे अधिक मजबूत नजर आने लगे। इससे उन्हें बेहतर उत्पादन की उम्मीद जगी और खेती के प्रति उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा।
नैनो डीएपी के उपयोग से पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में लागत में कमी आई। कम खर्च में बेहतर पोषण मिलने से खेती अधिक लाभकारी बनने लगी। यही अनुभव उनके लिए एक नई शुरुआत साबित हुआ। अब वे पूरे विश्वास के साथ कहती हैं कि आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। श्रीमती शकुन्तला बताती हैं कि शुरुआत में उन्हें इस तकनीक को लेकर संदेह था, लेकिन परिणाम देखने के बाद उनकी सोच पूरी तरह बदल गई। अब वे अपने गांव और आसपास की महिला किसानों को भी वैज्ञानिक खेती, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा नैनो डीएपी के उपयोग के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनका मानना है कि यदि किसान सही समय पर सही तकनीक अपनाएं तो कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करना संभव है।
उनकी सफलता केवल एक किसान की उपलब्धि नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि कृषि विभाग द्वारा किसानों तक पहुंचाई जा रही आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक मार्गदर्शन का प्रभावी उपयोग खेती की दिशा बदल सकता है। आज श्रीमती शकुन्तला अपने क्षेत्र में आत्मनिर्भर, जागरूक और प्रगतिशील महिला कृषक के रूप में नई पहचान बना चुकी हैं। उनकी प्रेरक यात्रा यह विश्वास जगाती है कि आधुनिक तकनीक, सही जानकारी और दृढ़ संकल्प के साथ खेती को अधिक समृद्ध, टिकाऊ और लाभकारी बनाया जा सकता है।







