November 2, 2026 12:05 pm

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मेडिकल कॉलेजों के विस्तार से चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञ उपचार को मिली नई दिशा

भोपाल 

मध्यप्रदेश में पिछले दो दशकों में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक विस्तार हुआ है। वर्ष 2002 में प्रदेश में जहां केवल 5 मेडिकल कॉलेज थे, वहीं वर्ष 2026 में इनकी संख्या बढ़कर 33 हो गई है। चिकित्सा शिक्षा की कुल सीटें भी 620 से बढ़कर 8,675 हो गई हैं। वर्ष 2023 के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार को स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता बढ़ाने का महत्वपूर्ण आधार मानते हुए नए मेडिकल कॉलेज, विशेषज्ञ विभाग, आवश्यक मानव संसाधन और आधुनिक उपचार सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर दिया गया है। इसका प्रभाव प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के अवसरों के साथ-साथ विशेषज्ञ एवं उच्च स्तरीय उपचार की उपलब्धता बढ़ने के रूप में भी दिखाई दे रहा है।

मेडिकल कॉलेजों के विस्तार से बढ़ी चिकित्सा शिक्षा की क्षमता

प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों के विस्तार के साथ चिकित्सा शिक्षा की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2002 में 5 मेडिकल कॉलेजों से शुरू हुआ यह नेटवर्क वर्ष 2026 में 33 मेडिकल कॉलेजों तक पहुंच गया है। इसी अवधि में चिकित्सा शिक्षा की कुल सीटें 620 से बढ़कर 8,675 हो गई हैं। वर्ष 2023 के बाद चिकित्सा शिक्षा को स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का महत्वपूर्ण आधार मानते हुए नए मेडिकल कॉलेजों, विशेषज्ञ विभागों और आवश्यक मानव संसाधन के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में चिकित्सा शिक्षा के अवसरों के विस्तार के साथ नागरिकों को बेहतर उपचार सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में कार्यों को प्राथमिकता दी है।

विशेषज्ञ एवं सुपर स्पेशियलिटी उपचार का विस्तार

मेडिकल कॉलेजों के विस्तार के साथ प्रदेश में उच्च स्तरीय उपचार सुविधाओं का दायरा भी बढ़ा है। वर्ष 2002 में सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों की संख्या शून्य थी, जो वर्ष 2026 में बढ़कर 4 हो गई है। पैथोलॉजी सेवाओं की उपलब्धता भी 45 से बढ़कर 134 हुई है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार करने तथा आधुनिक जांच एवं उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में वर्ष 2023–26 के दौरान विशेष प्रयास किए गए हैं। प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में ऑन्को सर्जरी विभाग और कैथ लैब जैसी सुविधाओं के विस्तार की कार्ययोजना पर भी जोर दिया गया है।

 स्वास्थ्य अधोसंरचना का हुआ व्यापक विस्तार

वर्ष 2002 की तुलना में वर्ष 2026 में प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थाओं के नेटवर्क का भी विस्तार हुआ है। जिला अस्पतालों की संख्या 36 से बढ़कर 55, सिविल अस्पताल 58 से बढ़कर 158, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र 229 से बढ़कर 348 और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र 1,194 से बढ़कर 1,442 हो गए हैं। उप स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या भी 8,835 से बढ़कर 10,256 हुई है। सामान्य बेड की संख्या 21,234 से बढ़कर 61,817 तथा आईसीयू बेड 277 से बढ़कर 3,395 हो गए हैं।

2023 के बाद मानव संसाधन का हुआ सशक्तीकरण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यकाल में स्वास्थ्य अधोसंरचना के साथ मानव संसाधन को भी प्राथमिकता दी गई है। वर्ष 2024 में स्वास्थ्य संस्थाओं में 46,491 नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति दी गई। इनमें नियमित, संविदा और आउटसोर्स पद शामिल हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पदों को भरने की दिशा में भी निर्णय लिए गए। नर्सिंग संवर्ग की भर्ती, मेडिकल कॉलेजों में आवश्यक मैनपावर और विशेषज्ञ सेवाओं को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में लगातार सुधार

स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का प्रभाव मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण संकेतकों में भी दिखाई देता है। वर्ष 2002 में मातृ मृत्यु अनुपात 379 था, जो वर्ष 2026 में घटकर 135 रह गया है। इसी अवधि में शिशु मृत्यु दर 82 से घटकर 35 हुई है। संस्थागत प्रसव की दर वर्ष 2002 के 35 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2026 में 98 प्रतिशत तक पहुंच गई है। गर्भवती महिलाओं के समय पर पंजीयन, प्रसव पूर्व जांच, संस्थागत प्रसव और उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान जैसी सेवाओं पर निरंतर जोर दिया जा रहा है।

दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंची स्वास्थ्य सेवाएं

प्रदेश के दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री जनमन अभियान के अंतर्गत 66 मोबाइल मेडिकल यूनिट शुरू की गईं। ये यूनिट 21 जिलों के 87 विकासखंडों के 1,268 गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए संचालित की गईं। इनमें चिकित्सकीय परामर्श, जांच, दवाएं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं तथा विभिन्न रोगों की स्क्रीनिंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

आपातकालीन सेवाओं को मिली मजबूती

आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और परिवहन व्यवस्था का भी विस्तार हुआ है। प्रदेश में एम्बुलेंस सेवाओं की संख्या वर्ष 2002 के 256 से बढ़कर वर्ष 2026 में 2,052 हो गई है। पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर उच्च स्तरीय उपचार तक पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूती मिली है। आवश्यक दवाओं की उपलब्धता वाले संस्थानों की संख्या भी वर्ष 2002 के 214 से बढ़कर 2026 में 650 हो गई है।

 आयुष्मान भारत से उपचार की आर्थिक पहुंच

स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के साथ उपचार की आर्थिक पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। वर्ष 2023–26 के दौरान अधिकाधिक अस्पतालों और चिकित्सकों को योजना से जोड़ने, इसकी पहुंच बढ़ाने और पात्र हितग्राहियों को उपचार सुविधा उपलब्ध कराने पर लगातार जोर दिया गया है।

प्राथमिक स्वास्थ्य से मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पेशियलिटी तक विकसित हुआ नेटवर्क

मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र का विस्तार अब प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और उप स्वास्थ्य केन्द्र से लेकर जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल तक एक व्यापक व्यवस्था के रूप में दिखाई देता है। वर्ष 2002 से 2026 के बीच मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा शिक्षा की क्षमता में हुई वृद्धि ने प्रदेश में विशेषज्ञ चिकित्सकों और उच्च स्तरीय उपचार सुविधाओं के विस्तार का आधार तैयार किया है। वहीं वर्ष 2023 के बाद स्वास्थ्य अधोसंरचना, मानव संसाधन, आधुनिक तकनीक, मोबाइल स्वास्थ्य सेवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तक उपचार की पहुंच को मजबूत करने पर विशेष फोकस किया गया है। 

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