September 3, 2026 1:56 pm

विशेष आलेख : ​सारंगढ़-बिलाईगढ़ में जल-क्रांति, समृद्ध किसान – सशक्त को कर रहा है साकार

रायपुर,03 सितंबर 2026

पानी को जीवन का पर्याय माना गया है, लेकिन मानसून में यही पानी जब खेतों से बहकर व्यर्थ निकल जाता है, तो किसानों के हाथ केवल सूखी मिट्टी और निराशा ही लगती है। छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले सारंगढ़-बिलाईगढ़ ने इस निराशा को आशा में बदलने की ठानी है। जिला प्रशासन की दूरदर्शिता और ‘विकसित भारत-जी राम जी’ (VBGRJ) योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से अब गाँव-गाँव में पानी सहेजने की एक मौन क्रांति आकार ले रही है। कभी बह जाने वाला वर्षा जल अब डबरियों (कच्चे तालाबों) में सिमटकर किसानों की समृद्धि और आत्मनिर्भरता का नया आधार बन चुका है।

प्रशासनिक प्रतिबद्धता से धरातल पर उतरी योजना

प्रशासनिक सजगता और स्पष्ट कार्ययोजना के बल पर जिले के ग्रामीण अंचलों में जल संरक्षण के साथ-साथ आजीविका संवर्धन के प्रयासों को नई दिशा मिल रही है। प्रशासन के कुशल निर्देशन में ‘डबरी निर्माण’ को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी समन्वित प्रयास का परिणाम है कि जिले में कुल 319 डबरियों की स्वीकृति प्रदान की गई, जिनमें से 200 डबरियों का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है, जबकि शेष 119 डबरियों का कार्य अंतिम चरणों में है। क्षेत्रवार स्थिति पर नज़र डालें तो बिलाईगढ़ में 132, बरमकेला में 103 तथा सारंगढ़ में 84 डबरियाँ स्वीकृत कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जल-संवर्धन को मजबूती दी जा रही है।

​25 करोड़ लीटर वर्षा जल का संचयन और 300 एकड़ भूमि की सिंचाई

​इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है—वर्षा जल का विशाल संचयन। पूर्ण और निर्माणाधीन डबरियों के माध्यम से जिले में लगभग 25 करोड़ लीटर वर्षा जल को सहेजने का लक्ष्य है।​ संचित जल से जिले की लगभग 300 एकड़ कृषि भूमि को प्रत्यक्ष सिंचाई का लाभ मिलेगा। इसके अलावा डबरियों में जल ठहरने से आसपास का भू-जल स्तर (Groundwater level) तेजी से रीचार्ज हो रहा है, जिससे कुओं और हैंडपंपों का जलस्तर भी सुधरा है।

सिंचाई के साथ मछली पालन

​डबरी अब केवल पानी रोकने की संरचना नहीं रह गई है, बल्कि यह किसानों के लिए एक बहुआयामी आजीविका मॉडल बन चुकी है। पर्याप्त पानी उपलब्ध होने से किसान अब केवल खरीफ (धान) की फसल तक सीमित नहीं हैं। वे गर्मी और रबी के मौसम में हरी सब्जियों तथा नकदी फसलों की खेती कर रहे हैं।

​     संचित जल का उपयोग न केवल फसल अपितु मछली पालन के लिए किया जा रहा है। इससे किसान अपनी ही जमीन पर बिना किसी बड़े अतिरिक्त निवेश के हर साल अच्छी-खासी पूरक आय अर्जित कर रहे हैं। ​इस योजना ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दोहरे तरीके से मजबूती प्रदान की है। एक तरफ जहाँ निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय ग्रामीणों को उनके ही गाँव और खेतों में रोजगार प्राप्त हुआ, वहीं दूसरी तरफ उनके पास एक ऐसी टिकाऊ परिसंपत्ति तैयार हो गई, जो आने वाले कई दशकों तक उनकी आजीविका को सुरक्षा कवच प्रदान करेगी।

​      ​सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में विकसित भारत-जी राम जी योजना के तहत हुआ यह जल-संवर्धन कार्य इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि यदि सही नीति और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ काम किया जाए, तो प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करके ग्रामीण जीवन में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। यह जल-क्रांति न केवल जल संकट का स्थायी समाधान प्रस्तुत कर रही है, बल्कि ‘समृद्ध किसान – सशक्त जिला’ की सोच को भी साकार कर रही है।

  • विष्णु प्रसाद वर्मा

     सहायक संचालक

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