September 29, 2026 10:20 pm

संतान की लंबी उम्र के लिए बच्चों को जरूर दें ये 5 पवित्र चीजें, टल जाएगी हर बला और मिलेगा जीमूतवाहन का आशीर्वाद

सनातन हिंदू धर्म में माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य, सुरक्षा और उज्जवल भविष्य के लिए सालभर में कई कठिन उपवास रखती हैं, जिनमें ‘जितिया’ या ‘जीवित्पुत्रिका व्रत’ (Jivitputrika Vrat 2026) का स्थान सबसे सर्वोच्च माना जाता है। इस साल जितिया का यह अत्यंत पावन और निर्जला व्रत 03 अक्टूबर 2026, मंगलवार के दिन रखा जाएगा। इस दिन माताएं बिना अन्न और जल के करीब 24 से 36 घंटे का कठिन उपवास रखकर भगवान जीमूतवाहन और महाकाल की आराधना करती हैं।

धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं के अनुसार, जितिया का व्रत केवल व्रत रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि व्रत संपन्न होने या पारण के समय माताएं अपनी संतानों को कुछ विशेष पवित्र प्रतीक, प्रसाद और वस्तुएं भेंट करती हैं। ऐसा माना जाता है कि पूजा के बाद बच्चों को ये चीजें देने से भगवान जीमूतवाहन की असीम कृपा और आशीर्वाद सदैव उन पर बना रहता है, जिससे उनकी हर मनोकामना पूरी होती है और जीवन में आने वाली समस्त बाधाएं टल जाती हैं। आइए जानते हैं कि जितिया के दिन बच्चों को कौन सी 5 चीजें अवश्य देनी चाहिए।

जितिया व्रत के दिन बच्चों की रक्षा और उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए उनकी कलाई या गले में पवित्र रक्षा सूत्र बांधना अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। पूजा समाप्त होने के बाद माताएं भगवान जीमूतवाहन का स्मरण करते हुए लाल या पीले रंग का सूती धागा अपने बच्चों को धारण कराती हैं। धार्मिक मान्यता है कि यह पवित्र धागा बच्चों को किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा, बुरी नजर और अकाल कष्टों से सुरक्षित रखता है तथा उन्हें जीवनभर आरोग्य का वरदान दिलाता है।

जितिया के पावन अवसर पर माताएं अपनी क्षमता के अनुसार बच्चों को नए कपड़े भी भेंट कर सकती हैं। सनातन संस्कृति में नए वस्त्रों को हमेशा शुभता, नए उत्साह और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। व्रत का पारण करने और भगवान जीमूतवाहन की विधिवत पूजा करने के बाद बच्चों को नए वस्त्र पहनाना और उसके पश्चात उन्हें घर के बड़े-बुजुर्गों का चरण स्पर्श करवाकर आशीर्वाद दिलाना बहुत फलदायी माना जाता है। इससे बच्चों के जीवन में सकारात्मकता और उन्नति के मार्ग खुलते हैं।

जितिया व्रत की पूजा और कथा में छोटे-छोटे कच्चे खीरे का विशेष और अनिवार्य महत्व होता है। इसे वंश वृद्धि, पारिवारिक विस्तार और संतान के सुदीर्घ जीवन का प्रतीक माना जाता है। पूजा संपन्न होने के बाद माताएं यह खीरा और अन्य ताजे मौसमी फल अपने बच्चों को प्रसाद के रूप में अवश्य देती हैं। खीरे और फलों का यह भोग बच्चों को शारीरिक रूप से ऊर्जावान बनाने के साथ-साथ उनके बौद्धिक विकास में भी सहायक माना जाता है।

यदि आपकी संतान छोटी उम्र की है, तो जितिया के दिन उनकी खुशी और मुस्कान का ध्यान रखते हुए उन्हें उनकी पसंद का कोई छोटा खिलौना या उपहार अवश्य देना चाहिए। ज्योतिषीय और धार्मिक दृष्टिकोण से बच्चों को प्रसन्न करना साक्षात ईश्वर को प्रसन्न करने के समान माना जाता है। बच्चों को उपहार देने से उनका मन प्रफुल्लित होता है और घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा तथा पारिवारिक सुख-शांति का वास होता है।

जितिया के पर्व पर बनने वाला ठेकुआ और भुने हुए चने का प्रसाद भगवान जीमूतवाहन को सबसे प्रिय भोग माना जाता है। पूजा के दौरान अर्पित किए गए इस पवित्र प्रसाद को जब माताएं अपने बच्चों को अपने हाथों से खिलाती हैं, तो इसे बहुत ही शुभ माना जाता है। शुद्ध घी और गुड़ से बना ठेकुआ बच्चों को शारीरिक शक्ति और स्फूर्ति प्रदान करता है। जितिया के दिन इस प्रसाद को ग्रहण करने से बच्चों का स्वास्थ्य उत्तम रहता है और उन्हें दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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