सिद्धखोल जलप्रपात में ईको-टूरिज्म प्रबंधन से संवर रही स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका

रायपुर,12 जुलाई 2026

सिद्धखोल जलप्रपात में ईको-टूरिज्म प्रबंधन से संवर रही स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका

सिद्धखोल जलप्रपात में ईको-टूरिज्म प्रबंधन से संवर रही स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका

बलौदाबाजार जिले  का प्रसिद्ध सिद्धखोल जलप्रपात इन दिनों पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है। वन विभाग के मार्गदर्शन में स्थानीय संयुक्त वन प्रबंधन समिति कुकरीकोना द्वारा यहां संचालित किए जा रहे  ईको-टूरिज्म प्रबंधन ने न केवल वनों और पर्यावरण के संरक्षण की एक नई मिसाल पेश की है, बल्कि स्थानीय आदिवासी व ग्रामीण परिवारों के लिए आजीविका का एक सशक्त माध्यम भी बनकर उभरा है।

*स्थानीय समिति के युवाओं को मिल रहा रोजगार*-
कुकरीकोना समिति द्वारा स्थानीय ग्रामीण युवाओं को जोड़कर एक ‘पर्यटन समूह’ का गठन किया गया है। ये प्रशिक्षित युवा जलप्रपात क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों का मार्गदर्शन करते हैं तथा मानसून के दौरान जलप्रपात के समीप चिन्हित संवेदनशील एवं खतरनाक स्थलों पर मुस्तैद रहकर सैलानियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं। आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए समिति के काउंटर पर प्राथमिक चिकित्सा किट की भी पुख्ता व्यवस्था की गई है।

*प्लास्टिक मुक्त’ और ईको-फ्रेंडली पर्यटन प्रतिमान*-
सिद्धखोल के संवेदनशील वनक्षेत्र को पूरी तरह स्वच्छ और प्लास्टिक-मुक्त बनाए रखने के लिए कुकरीकोना समिति द्वारा  कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। प्रवेश द्वार पर पानी की प्लास्टिक बोतलों के लिए ₹50 का रिफंडेबल चार्ज लिया जाएगा, जिसे पर्यटकों द्वारा बोतल सुरक्षित वापस लाने पर तुरंत लौटा दिया जाएगा। पूरे परिसर में स्थानीय बांस से बने कूड़ेदान स्थापित करने का निर्णय लिया गया हैं। साथ ही, समिति की महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा पर्यटकों को रियायती दरों पर जूट,कपड़े के थैले और दोना-पत्तल उपलब्ध कराए जाएँगे ।प्रत्येक सोमवार को वन अमले और समिति के सदस्यों द्वारा संयुक्त रूप से पूरे पर्यटन मार्ग में “स्वच्छता श्रमदान” चलाकर संपूर्ण कचरे का सुरक्षित निपटान किया जाएगा।

*पर्यटकों की सुविधा हेतु शुल्क प्रणाली का सरलीकरण*- समिति द्वारा पर्यटकों को सुगम और किफायती अनुभव देने के लिए प्रवेश शुल्क प्रणाली में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। पूर्व में ली जाने वाली ₹20 (दोपहिया) एवं ₹30 (चार पहिया) वाहन-आधारित पृथक पार्किंग फीस को पूर्णतः समाप्त कर दिया गया है। अब इसके स्थान पर केवल ₹10 प्रति व्यक्ति का एकल प्रवेश शुल्क लागू किया गया है।

*आजीविका संवर्धन और स्थानीय रोजगार*-
ईको-टूरिज्म के इस सफल मॉडल से कुकरीकोना गाँव के दर्जनों परिवारों को सीधे तौर पर रोजगार मिला है। इको  पर्यटन से समिति के लाभांश और ग्रामीणों की दैनिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे ग्रामीणों का वनों के प्रति जुड़ाव और बढ़ा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

R No. 13843/ 75

Advertisement Carousel

Your Opinion

Will Donald Trump's re-election as US President be beneficial for India?
error: Content is protected !!