
रायपुर, 17 जुलाई 2026
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कोण्डागांव जिले में कुपोषण उन्मूलन, पर्यावरण संरक्षण तथा जनसामान्य में पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से ’सुपोषण की ओर एक कदम : मुनगा पौधरोपण जन आंदोलन’ का शुभारंभ किया गया। अभियान के तहत जिले के सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों में मुनगा (सहजन) एवं विभिन्न फलदार पौधों का रोपण कर सुपोषण वाटिकाएं विकसित की जाएंगी।
अभियान का उद्देश्य प्रत्येक आंगनबाड़ी केन्द्र को पोषण वाटिका के रूप में विकसित करना है, जिससे स्थानीय स्तर पर पौष्टिक फल एवं हरी सब्जियां उपलब्ध हों और बच्चों, गर्भवती एवं धात्री माताओं के पोषण स्तर में सुधार हो सके। इसके साथ ही पौधों के संरक्षण एवं नियमित देखभाल पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, स्वयं सहायता समूहों, स्कूल प्रबंधन समितियों तथा स्थानीय नागरिकों ने सहभागिता करते हुए पौधरोपण किया और पर्यावरण संरक्षण एवं सुपोषण के लिए सामूहिक संकल्प लिया।
इस अवसर पर अधिकारियों ने बताया कि मुनगा पोषण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण पौधा है। इसकी पत्तियों, फलियों, फूलों एवं बीजों में प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, पोटेशियम, विटामिन-ए, विटामिन-सी सहित अनेक आवश्यक पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके नियमित सेवन से बच्चों के शारीरिक विकास, रोग प्रतिरोधक क्षमता तथा समग्र स्वास्थ्य में सुधार होता है।
अभियान के अंतर्गत आंगनबाड़ी केन्द्रों में लगाए गए फलदार पौधों के फलों का उपयोग पोषण गतिविधियों, पोषण माह, स्वास्थ्य दिवस एवं सामुदायिक कार्यक्रमों में किया जाएगा। साथ ही बच्चों एवं माताओं को पौष्टिक आहार, स्वच्छता, जल संरक्षण, जैविक खेती तथा संतुलित आहार के प्रति नियमित रूप से जागरूक किया जाएगा।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप देने के लिए विद्यालयों, स्वयं सहायता समूहों, युवा मंडलों, सामाजिक संगठनों तथा आम नागरिकों से जुड़ने की अपील की है। नागरिकों से अपने घर, विद्यालय, कार्यालय एवं सार्वजनिक स्थलों पर कम से कम एक मुनगा एवं एक फलदार पौधा लगाने तथा उसकी नियमित देखभाल करने का आग्रह किया गया है।साथ ही ’एक आंगनबाड़ी-एक सुपोषण वृक्ष, एक परिवार-एक फलदार पौधा’ के संदेश के साथ यह अभियान पूरे जिले में निरंतर संचालित किया जाएगा। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगी, बल्कि बच्चों एवं माताओं के बेहतर पोषण, कुपोषण में कमी तथा स्वस्थ एवं हरित समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।









